जैसी कि आशंका थी, कक्षा पांच के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के ताजा 'नेशनल अचीवमेंट सर्वे' के निष्कर्ष चिंताजनक ही हैं. सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक प्राथमिक से जूनियर कक्षाओं में जाने की तैयारी कर रहे ज्यादातर छात्र भाषा या गणित के मामूली सवालों के जवाब भी नहीं जानते.

एनसीईआरटी शिक्षण प्रक्रिया के अलग-अलग स्तरों पर छात्रों की क्षमता को आंकने के लिए हर तीन साल में एक सर्वे करता है. बहुविकल्पीय प्रश्नावलियों के जरिये इसमें यह आकलन किया जाता है कि भाषा से लेकर गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में छात्रों के बुनियादी ज्ञान की क्या हालत है. ताजा सर्वे 8266 विद्यालयों के डेढ़ लाख से अधिक विद्यार्थियों के बीच किया गया है. पिछले सर्वे से तुलना करें तो हिमाचल प्रदेश,पंजाब और हरियाणा को छोड़कर बाकी सारे राज्यों में छात्रों की सीखने की क्षमता में गिरावट दिख रही है.

बहुविकल्पीय प्रश्नावलियों के जरिये सर्वे में यह आकलन किया जाता है कि भाषा से लेकर गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में छात्रों के बुनियादी ज्ञान की क्या हालत है

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक कुल मिलाकर देखा जाए तो कक्षा पांच के छात्र कोई पाठ पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों में से औसतन 45 फीसदी ही हल कर सके. गणित के मामले में यह आंकड़ा 46 फीसदी रहा जबकि पर्यावरण अध्ययन के मामले में 50 फीसदी. पाठ पढ़कर सवालों का जवाब देने के मामले में 43 फीसदी विद्यार्थियों ने 35 फीसदी या उससे कम अंक हासिल किए. सिर्फ 11 फीसदी ही ऐसे थे जिन्होंने इस मामले में 75 फीसदी या इससे ज्यादा अंक हासिल किए.

उदाहरण के लिए पाठ समझने की क्षमता परखने का एक सवाल था

'…आजकल कई लोग अपनी आंखें दान करते हैं. उनकी मृत्यु के बाद उनकी आंखें नेत्रहीन लोगों को लगाई जाती हैं. इससे कई लोग दुनिया देख सकते हैं.'

कई लोग अपनी आंखें दान क्यों करते हैं?

  1. उनकी आंखें कमजोर होती हैं
  2. ताकि नेत्रहीन लोग विद्वान बन सकें
  3. ताकि उनकी आंखों से नेत्रहीन देख सकें
  4. वे मशहूर होना चाहते हैं

करीब 64 फीसदी बच्चों ने इस सवाल का गलत जवाब दिया

गणित के सवाल संख्या ज्ञान, जोड़, घटाना, गुणा, भाग और आधारभूत ज्यामिति और मापन से संबंधित थे. इसमें 37 फीसदी छात्र ऐसे थे जिन्होंने 0 से 35 फीसदी के बीच अंक हासिल किए. 26 फीसदी छात्र ऐसे थे जिनका स्कोर 36 से 50 फीसदी के बीच रहा. सिर्फ 10 फीसदी छात्रों को 75 फीसदी से ज्यादा अंक मिले.

पर्यावरण अध्ययन विषय में परिणाम अपेक्षाकृत कम बुरे रहे. गनीमत रही कि इसमें कम से कम कुछ सवाल थे जिनके ज्यादातर बच्चों ने सही जवाब दिए. उदाहरण के लिए 75 फीसदी बच्चों ने इस सवाल का सही जवाब दिया.

इन पक्षियों में से कौन उड़ नहीं सकता

  1. तोता
  2. कौवा
  3. बाज
  4. शुतुरमुर्ग

राज्यों की स्थिति

रिपोर्ट के मुताबिक केवल दो राज्यों (केरल, मिजोरम) और दो केंद्र शासित प्रदेशों (दमन और दीव, दादरा नगर हवेली) के आधे से अधिक विद्यार्थियों ने पाठ पढ़कर उसे समझने के मामले में 50 फीसदी से अधिक अंक हासिल किए हैं. मणिपुर एकमात्र ऐसा राज्य रहा है, जहां के 20 फीसदी से अधिक बच्चों ने तीनों परीक्षाओं में 75 फीसदी से अधिक अंक हासिल किए. केरल में लड़कों की तुलना में लड़कियों का प्रदर्शन बेहतर रहा. राज्यों के शहरी और ग्रामीण इलाकों के प्रदर्शन में कोई खास अंतर नजर नहीं दिखा. पाठ समझने और गणित के मामले में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के बच्चों का प्रदर्शन शहरी इलाकों के बच्चों से बेहतर रहा.

सामाजिक विभाजन

सर्वे के मुताबिक अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से ताल्लुक रखने वाले छात्रों ने पाठ पढ़ने और पर्यावरण अध्ययन में समान अंक हासिल किए हैं. हालांकि गणित में वे दूसरे सामाजिक वर्गों की तुलना में पीछे हैं. अनुसूचित जाति और जनजाति से आने वाले बच्चों ने सभी विषयों में कम अंक हासिल किए हैं. लेकिन अरुणाचल प्रदेश में इस वर्ग के बच्चों ने अन्य सामाजिक वर्गों के बच्चों की तुलना में अधिक अंक हासिल किए हैं.

चार साल पहले एक ऐसे ही सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद कई नए कदम उठाने की घोषणा की गई थी. कई राज्यों में गैर-सरकारी संगठनों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया था. लेकिन इस नए सर्वे से साफ है कि हालात जस के तस भी नहीं बल्कि और खराब हो गए हैं. सवाल उठता है कि मेक इन इंडिया यानी भारत में चीजें बनाने पर इतना जोर है लेकिन, जो शिक्षा नया आदमी बनाती है उसके बुरे हाल की सुध कब ली जाएगी.