जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी पार्टी पीडीपी ने आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं. पीडीपी के वरिष्ठ नेता और सांसद मुज़फ्फर बेग ने समाचार वेबसाईट एनडीटीवी से बातचीत में दावा किया है कि बुरहान पर कार्रवाई से पहले राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती को भरोसे में नहीं लिया गया था. बेग का कहना है कि बुरहान कोई बड़ा आतंकी नहीं था वह केवल एक पोस्टर ब्वाय था.

उनके मुताबिक खुद राज्य की पुलिस और सुरक्षा बलों का कहना था कि वे जब चाहें बुरहान को गिरफ्तार कर सकते हैं, तो फिर उसे गोली क्यों मार दी गई. बेग के अनुसार कश्मीर पर प्रधानमंत्री का यह कहना कि ज़्यादा बल प्रयोग नहीं होना चाहिए बताता है कि कश्मीर के लोगों पर ज्यादा बल का प्रयोग किया जा रहा है.

वे यह भी कहते हैं कि प्रधानमंत्री देश की जिस छवि को दुनिया भर में बनाने की कोशिश कर रहे हैं, कश्मीर के ऐसे हालात से उसको धक्का लगा है. बेग सवाल उठाते हुए कहते हैं कि बुरहान को मारने से पहले यह क्यों नहीं पता किया गया कि इससे कश्मीर के माहौल पर क्या फर्क पड़ेगा. उनके अनुसार ख़ुफिया तंत्र की नाक़ामी की वजह से ही आज कश्मीर में ऐसे हालत पैदा हुए है. मुज़फ्फर बेग़ ने बुरहान के मारे जाने और उसके बाद पैदा हुए हालात की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से कराए जाने की मांग की है.

डीएसपी आत्महत्या मामला : एफआईआर के आदेश के बाद कर्नाटक के मंत्री ने इस्तीफा दिया

मंगलोर के डीएसपी एमके गणपति की खुदकुशी के मामले में कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री केजे जॉर्ज ने इस्तीफा दे दिया है. जॉर्ज ने यह इस्तीफ़ा अपने खिलाफ एफआईआर का आदेश होने के बाद दिया है. सोमवार सुबह मडिकेरी जिले की एक अदालत ने पुलिस को जॉर्ज और दो पुलिस अधिकारियों एएम प्रसाद और प्रणब मोहंती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था.

कोर्ट ने यह फैसला डीएसपी गणपति के परिवार की ओर से लगाई गई एक अर्जी पर सुनाया है. इसमें इन तीनों के खिलाफ गणपति को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करने की अपील की गई थी. इससे पहले राज्य सरकार ने जार्ज के इस्तीफे और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने से इनकार कर दिया था. इसके बाद से बंगलुरु में सरकार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे थे.

बीती 7 जुलाई को डीएसपी गणपति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. इससे पहले उन्होंने एक वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए इसके लिए मंत्री केजे जॉर्ज के साथ-साथ राज्य के खुफिया विभाग के प्रमुख एएम प्रसाद और लोकायुक्त के आईजीपी प्रणब मोहंती को जिम्मेदार ठहराया था.

चुनाव से पहले अखिलेश सरकार का कर्मचारियों को तोहफा, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें जल्द लागू होंगी

उत्तर प्रदेश की सपा सरकार राज्य के कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देने जा रही है. सरकार ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने का फैसला किया है. सोमवार को लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि उनके इस फैसले से राज्य के करीब 16 लाख कर्मचारियों और 6 लाख पेंशनधारियों को फायदा होगा.

मुख्यमंत्री के अनुसार वे इस मामले में जल्द ही एक कमेटी का गठन करेंगे जो छह महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी. उनके मुताबिक सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने में राज्य सरकार पर 24 हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा. मीडिया में आई खबरों मुताबिक सपा सरकार कर्मचारियों को खुश करने और चुनाव आचार संहिता से बचने के लिए इन सिफारिशों को इस साल अक्टूबर में ही लागू कर देगी.

इसके अलावा सरकार ने राज्य के बुनकरों को खुश करने के लिए सोमवार को 'समाजवादी हथकरघा बुनकर पेंशन योजना' की घोषणा भी की है जिसके तहत 60 साल के ऊपर के बुनकरों को हर महीने 500 रुपये पेंशन दी जाएगी.