हमेशा नियमों और अनुशासन की बात करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाजवादी पार्टी के एक बड़े नेता के कहने पर खुद नियमों की अनदेखी की है. एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल केंद्र सरकार ने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल यादव के आईएएस दामाद को नियमों के विरुद्ध जाकर अपना कैडर बदलने की मंजूरी दे दी. यह मंजूरी खुद प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति कमेटी (एसीसी) ने दी थी.

लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले के डीएम अजय यादव 2010 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. उनका मूल कैडर उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि तमिलनाडु है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के साथ मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक अजय ने अपना कैडर बदलने के लिए कार्मिक विभाग को दो बार अर्जियां भेजी थीं. इसमें उन्होंने अपने बच्चे की बीमारी और पिता के निधन के बाद अपनी वृद्ध मां की देखरेख को कैडर बदलने की वजह बताया था. लेकिन, कार्मिक मंत्रालय ने उनकी इन वजहों को बेहद साधारण माना और नियुक्ति के नियमों का हवाला देते हुए उनका कैडर बदलने से इनकार कर दिया. मंत्रालय का कहना था कि कैडर बदलने के लिए कम से कम नौ साल तक मूल कैडर में रहना ज़रूरी है.

इसके बाद इस मामले में तीसरी चिट्ठी खुद शिवपाल यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी जिसे 'यथोचित कार्यवाही' के लिए जुलाई 2015 में प्रधानमंत्री कार्यालय ने कार्मिक मंत्रालय को भेज दिया. एनडीटीवी की रिपोर्ट में मौजूद एक दस्तावेज के मुताबिक इसके बाद भी कार्मिक मंत्रालय ने नियमों का हवाला देते हुए अजय का कैडर बदलने की सिफारिश करने से इनकार कर दिया. लेकिन अक्टूबर 2015 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एसीसी ने इस मामले को 'स्पेशल केस' बताते हुए अजय यादव को 3 साल के लिए उत्तर प्रदेश भेज दिया.

भारतीय उच्चायोग के अधिकारी पाकिस्तान के स्कूलों से अपने बच्चों को निकाल लें : भारत सरकार

भारत ने पाकिस्तान के साथ बढ़ती कडवाहट के बीच भारतीय राजनयिकों से अपने बच्चों को पाकिस्तानी स्कूलों से निकाल लेने को कहा है. सोमवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि सरकार ने अपने राजनयिक मिशनों के कर्मचारियों, उनसे संबंधित नीतियों और पाकिस्तान की स्थिति की समीक्षा करने के बाद यह फैसला लिया है.

उनके मुताबिक भारत सरकार ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को वर्तमान अकादमिक सत्र से अपने बच्चों का दाखिला पाकिस्तान से बाहर कराने के लिए कहा है. भारतीय विदेश मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान में आर्मी स्कूल और इस साल जनवरी में वहां के बाचा खान विश्विद्यालय पर हुए आतंकी हमले को देखते हुए भारत सरकार ने यह फैसला लिया है.

सु्प्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, महिला को 24 हफ्ते बाद गर्भपात कराने की इजाजत दी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक महिला को 24 हफ्ते के भ्रूण के गर्भपात की इजाजत दे दी है. कोर्ट ने यह इजाजत मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट की धारा-5 के तहत दी है. कोर्ट के अनुसार एक्ट की धारा-3 कहती है कि 20 हफ्ते से ज्यादा होने पर गर्भपात नहीं हो सकता लेकिन इसी एक्ट की धारा-5 में कहा गया है कि अगर किसी महिला की जान को खतरा हो तो कभी भी गर्भपात किया जा सकता है.

अदालत ने यह निर्णय अपने द्वारा गठि‍त की गई स्वास्थ्य विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट देखने के बाद सुनाया है. समिति ने अपनी जांच में बच्चे को पूरी तरह से असामान्य पाया था जिसकी वजह से न केवल उसका बच पाना संभव नहीं था बल्कि प्रसव के वक्त वह मां की मृत्यु का कारण भी बन सकता था.

खुद को रेप पीड़िता बताने वाली महाराष्ट्र की इस महिला ने पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट से 24 हफ्ते के भ्रूण के गर्भपात की इजाजत मांगी थी. तब कोर्ट ने महिला की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद ही सुनवाई का फैसला किया था.