पटना हाईकोर्ट ने चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामला छिपाने पर सासाराम से भाजपा सांसद छेदी पासवान की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी है. पासवान के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की गई एक याचिका में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में नामांकन के दौरान दिए गए हलफनामे में 2006 के अपने एक आपराधिक मामले को जाहिर नहीं किया था जो कि नियम के विरुद्ध है. यह याचिका सासाराम निवासी गंगा मिश्र ने दायर की थी.

सुनवाई के दौरान छेदी पासवान के वकील ने दलील दी कि हलफनामे में नहीं शामिल किये गए मामले में छेदी पासवान न तो सजायाफ्ता हैं और न ही अभी तक इसमें चार्जशीट ही दाखिल की गई है. लेकिन कोर्ट ने उनकी इन दलीलों को खारिज करते हुए पासवान की सदस्यता रद्द कर दी.

कोर्ट का निर्णय आने के बाद छेदी पासवान ने मीडिया को बताया कि यह मामला 2006 में तब का है जब वे जनहित में एक परियोजना को लेकर धरने पर बैठे थे. इसमें उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी लेकिन अभी तक आरोप तय नहीं किये गए हैं. पासवान के मुताबिक यह कोई आपराधिक मामला नहीं था इसलिए वे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में जाएंगे. छेदी पासवान 2014 लोकसभा चुनाव में सासाराम से तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष और कांग्रेस नेता मीरा कुमार को हराकर संसद पहुंचे थे.

नरसिंह यादव पर नाडा में सुनवाई पूरी, शनिवार या सोमवार को फैसला आएगा

डोपिंग मामले में फंसे पहलवान नरसिंह यादव पर नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) में सुनवाई पूरी हो गई है. खबरों के मुताबिक नाडा की अनुशासन समिति इस मामले में शनिवार या सोमवार को अपना फैसला सुनाएगी. गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान नाडा के वकीलों ने कहा कि इस मामले में नाडा से जिस तरह की छूट नरसिंह चाह रहे हैं वह उन्हें नहीं दी जा सकती. क्योंकि वे अपने खिलाफ साजिश किए जाने का कोई सबूत पेश नहीं कर पाए हैं.

इससे पहले बुधवार को हुई सुनवाई में नरसिंह यादव के वकीलों ने कहा था कि नरसिंह के खिलाफ साजिश की गई है और किसी ने उनके खाने या पानी में प्रतिबंधित दवा मिलाई है. वकीलों ने इसी तथ्य के आधार पर नाडा से नरसिंह पर कोई बैन न लगाने की मांग की थी.

वहीं, नाडा से जुड़े कुछ सूत्रों का कहना है कि अपनी दलीलों के पक्ष में कोई सबूत न पेश कर पाने के कारण नरसिंह यादव पर दो से चार साल तक का प्रतिबंध लगना लगभग तय है. बीती 25 जून और 5 जुलाई को नाडा द्वारा किए गए डोप टेस्ट में नरसिंह फेल हो गए थे जिसके बाद भारतीय कुश्ती संघ ने उनके ओलंपिक में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध लगा दिया था.

मशहूर लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी का निधन

बांग्ला की जानी मानी साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी का गुरुवार को कोलकाता में निधन हो गया है. वे पिछले दो महीने से कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं. 90 वर्षीय महाश्वेता देवी लंबे समय से गुर्दे और रक्त संक्रमण की समस्या से पीड़ित थीं.

ढाका में एक मध्यवर्गीय परिवार में जन्मीं महाश्वेता देवी ने करीब चार दशकों तक आदिवासियों के बीच रहकर उनके लिए काम किया था. उन्होंने आदिवासियों को सामाजिक अन्‍याय, भेदभाव और गरीबी से निजात दिलाने के लिए उनके मुद्दों को अपने साहित्य में भी काफी जगह दी थी. मूल रूप से बांग्ला में लिखे होने के बावजूद उनके साहित्य को दुनिया भर में सराहा गया.

उनकी चर्चित किताबों में हजार चौरासीर मां, अरण्येर अधिकार, झांसीर रानी, अग्निगर्भा और रूदाली शामिल हैं. साहित्य में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें ज्ञानपीठ, पद्म विभूषण, साहित्य अकादमी और मैग्सेसे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था. महाश्‍वेता देवी के निधन पर उपराष्‍ट्रपति हामिद अंसारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्‍यक्‍त किया है.