बारिश आने से पहले /बारिश से बचने की तैयारी जारी है
सारी दरारें बन्द कर ली हैं/ और लीप के छत, अब छतरी भी मढ़वा ली है
खिड़की जो खुलती है बाहर/उसके ऊपर भी एक छज्जा खींच दिया है...
गले न पड़ जाए सतरंगी/भीग न जाएं बादल से
सावन से बच कर जीते हैं/बारिश आने से पहले
बारिश से बचने की तैयारी जारी है !
– गुलजार

गीतकार गुलजार ने बारिश से बचने की तैयारियों का बखान कुछ इन शब्दों में किया है. यह बात तो तब की हुई जब बचने की तैयारी करने का मौका पास हो. लेकिन जब आप सड़क या मैदान में हों और अचानक बारिश आ जाए तब क्या करना चाहिए? आम व्यवहार में इसका एक ही जवाब है. वह ठौर ढूंढ़ना जहां पर पहुंचकर आप भीगने से बच सकें. ऐसा ठौर दिख जाए तो अमूमन हम सब उसकी तरफ तेजी से दौड़ लगाते हैं और यहां एक सवाल फिर जन्म लेता है. बारिश में एक निर्धारित दूरी तय करने के लिए पैदल चलने पर आप ज्यादा भीगते हैं या दौड़ने पर?

हम चाहे जो भी मानें या करें लेकिन इस सवाल पर वैज्ञानिक सालों से बहस करते रहे हैं. इस विषय पर सन 2012 में ‘यूरोपियन जर्नल ऑफ फिजिक्स’ में इटली के भौतिक विज्ञानी फ्रैंको बोच्ची का एक शोधपत्र प्रकाशित हुआ था. यह इस विषय पर अब तक हुए अध्ययनों की कड़ी में काफी विश्वसनीय माना जाता है.

गणित कहता है कि यदि आपके नजदीक बारिश में छिपने का कोई ठिकाना नहीं है तो चलने के बजाय एक स्थान पर खड़े रहने पर आप कम से कम भीगेंगे 

इस अध्ययन से दो बड़ी महत्वपूर्ण बातें साबित होती हैं. यदि आपके पास बारिश में छिपने का कोई ठिकाना नहीं है तो एक स्थान पर खड़े रहने पर आप कम से कम भीगेंगे या आपके ऊपर कम से कम पानी की मात्रा गिरेगी. वहीं यदि आपके पास कोई ठौर है तो वहां तक चलने के बजाय दौड़कर जाने से आप कम से कम भीगेंगे. ये दोनों बातें विरोधाभासी लगती हैं लेकिन फ्रैंको ने गणित के माध्यम से यह साबित किया है.

गणित-विज्ञान के हर प्रयोग या अध्ययन में कुछ परिस्थितियां स्थिर मानी जाती हैं फिर उसके आधार पर नतीजे निकाले जाते हैं. फ्रैंको ने अपने अध्ययन यह माना है कि बारिश सामान्य परिस्थितियों में हो रही है. कोई आंधी-तूफान की स्थिति नहीं है और बूंदें धरती की सतह पर लंबवत गिर रही हैं. इस अध्ययन के नतीजे समझने के लिए हम मान लेते हैं कि ‘क’ नाम का व्यक्ति बारिश के बीच में हैं. चूंकि बारिश की दर या प्रति सेकंड प्रति वर्गमीटर में गिरने वाली पानी की बूंदों की संख्या एक समान है तो फ्रैंको के मुताबिक एक ही स्थान पर खड़े इस व्यक्ति से सिर और कंधों पर निश्चित समयावधि में निश्चित मात्रा में पानी गिरेगा.

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लेकिन अब ‘क’ चलना या दौड़ना शुरू कर दे तो उसके सिर पर तो पहले की तरह बराबर मात्रा में पानी गिरेगा लेकिन अब इस व्यक्ति की गति की दिशा चूंकि लंबवत गिरने वाली बूंदों को काटने लगी है तो इस व्यक्ति के शरीर पर पड़ने वाली बूंदों की संख्या बढ़ जाएगी. यानी वह ज्यादा भीगने लगेगा.

बारिश में कोई व्यक्ति जब चलना शुरू करता है तब उसकी गति जो भी हो, उसके सिर और कंधों पर गिरने वाले पानी की दर में कोई बदलाव नहीं होता. यानी एक निश्चित समयावधि में वह पैदल चले या दौड़ लगाए, एक समान ही भीगेगा

अब हम दो परिस्थितियों की कल्पना करते हैं. पहली परिस्थिति यह है कि उस व्यक्ति के नजदीक बारिश से बचने के लिए कोई ठिकाना नहीं है. इसके साथ हम यह भी मान लेते हैं कि बारिश सिर्फ पांच मिनट होती है. ऐसे में यदि ‘क’ एक स्थान पर खड़ा रहे तो चलने या दौड़ने के बजाय उसके शरीर पर पानी की कम बूंदें पड़ेंगी. वह कम भीगेगा.

अब दूसरी परिस्थिति की कल्पना करते हैं. बारिश के बीच इस व्यक्ति से 100 मीटर दूर एक घर है जहां वह शरण ले सकता है. अब इस व्यक्ति को पैदल चलना चाहिए या दौड़ना चाहिए ताकि वह कम से कम भीगे और उस घर तक पहुंच जाए?

फ्रैंको इस सवाल का जवाब देने से पहले यह साबित करते हैं कि चलने या दौड़ने, दोनों ही दशाओं में इस व्यक्ति के ऊपर समान मात्रा में बारिश की बूंदें पड़ेंगी. दरअसल जब ‘क’ चलना शुरू करता है तब उसकी गति जो भी हो, उसके सिर और कंधों पर गिरने वाले पानी की दर में कोई बदलाव नहीं होता. यानी एक निश्चित समय तक यदि ‘क’ पैदल चले या दौड़ लगाए, वह एक समान ही भीगेगा. इसके साथ ही अब लंबवत गिरने वाली बूंदें इस व्यक्ति के शरीर पर पड़ने लगती हैं और फ्रैंको के मुताबिक एक निश्चित दूरी तय करते हुए आप पैदल चलें या दौड़ लगाएं, इन बूंदों की संख्या भी समान रहेगी.

मोटा व्यक्ति उसी बारिश में किसी पतले व्यक्ति की तुलना में ज्यादा भीग सकता है क्योंकि उसके शरीर पर ज्यादा संख्या में बूंदें गिरेंगी

कुल मिलाकर ‘क’ के ऊपर पड़ने वाली बूंदों की संख्या उसके द्वारा तय दूरी और बारिश में बिताए गए समय पर निर्भर करेगी. चूंकि दूरी को हम अपनी तरफ से कम नहीं कर सकते लेकिन दौड़ लगाकर हम बारिश में रुकने का समय कम कर सकते हैं. इस तरह से गणित कहता है कि बारिश में भागकर छिपने का कोई ठिया ढूंढ़ने की कोशिश में आप कम से कम भीगेंगे.

यहां पर एक और महत्वपूर्ण घटक के रूप में भीगने वाले इंसान का शरीर भी इस बहस में शामिल हो जाता है. मोटा व्यक्ति उसी बारिश में किसी पतले व्यक्ति की तुलना में ज्यादा भीग सकता है क्योंकि उसके शरीर पर ज्यादा संख्या में बूंदें गिरेंगी. इसके अलावा दौड़ते समय व्यक्ति की शारीरिक भंगिमाएं भी उसे तर-बतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं. फिर भी गणित यही कहता है कि यदि आप बिना छाता लिए बाहर निकले हैं और बारिश होने लगी है तो सुरक्षित ठिकाना दिखने पर दौड़ लगाकर उस तक पहुंचें. इस तरह आप कम से कम भीगेंगे.