‘कानून निर्माण में उतावलापन रोकने और राज्यों के हित सुरक्षित रखने के लिए राज्यसभा जरूरी है.’

— हामिद अंसारी, उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति अंसारी ने यह बात राज्यसभा के नए सदस्यों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में कही. उन्होंने कहा कि रूस के संघीय ढांचे के विपरीत भारत का संघीय ढांचा अटूट है लेकिन, राज्यों के कुछ हित हैं और यह जरूरी नहीं है कि वे संसद के दूसरे सदन में स्पष्ट हो सकें. उन्होंने यह भी कहा, ‘संसद के दोनों सदन समान हैं. लेकिन, अगर आप संविधान को गौर से पढ़ें तो जहां-जहां दोनों सदनों का जिक्र है वहां राज्य सभा का जिक्र पहले आया है.’ हाल-फिलहाल में जीएसटी बिल जैसे कई विधेयक लोकसभा से पारित विधेयक राज्यसभा में लटके हुए हैं. इसने राज्यसभा की भूमिका और जरूरत पर नए सिरे से बहस को जन्म दे दिया है.

‘मायावती वास्तव में अंबेडकरवादी हैं तो उन्हें बौद्ध धर्म स्वीकार कर लेना चाहिए.’

— रामदास अठावले, सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्यमंत्री

अठावले का यह बयान दलित हितों पर बसपा प्रमुख मायावती की सक्रियता को लेकर आया. उन्होंने कहा कि मायावती वास्तव में हिंदू हैं, उनका दलितों के हितों से कोई सरोकार नहीं है और उन्होंने वोटों की वजह से अब तक बौद्ध धर्म नहीं अपनाया है. मायावती को अपनी पार्टी का नाम बहुजन की जगह सर्वजन समाज पार्टी रखने की सलाह देते हुए अठावले ने कहा कि मायावती बाबा साहेब के नाम पर केवल राजनीति करती हैं, उनके आदर्शों को नहीं मानतीं. बताया जा रहा है कि भाजपा ने यूपी विधानसभा चुनाव में दलित वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए मायावती के मुकाबले में अठावले को मैदान में उतारा है.


‘जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से केंद्र के पैसे का दुरुपयोग हुआ है.’

— वीके सिंह, विदेश राज्यमंत्री

वीके सिंह का यह बयान ‘कश्मीर में जनता, शांति और संभावनाएं’ विषय पर आयोजित सेमिनार में आया. उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने कश्मीर की जनता को गुमराह करने का काम किया है. पूर्व थलसेना अध्यक्ष ने कहा कि कश्मीर के लोग भी उतने ही देशभक्त हैं जितने कि देश के दूसरे हिस्सों के लोग. उन्होंने कहा कि कश्मीर में मुस्लिम, गुर्जर, हिंदू और गोजू समुदाय के लोग सदियों से एक-दूसरे के साथ रहते आए हैं और आज भी रह रहे हैं. जुलाई में हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से घाटी से हालात असामान्य हो गए हैं. प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों की झड़प में अब तक 47 लोग मारे जा चुके हैं.


‘ईमानदारी से कहूं तो मेरी नजर में ट्रंप के जीतने की संभावना बन रही है.’

— मिट रोमनी, राष्ट्रपति के लिए पूर्व रिपब्लिकन उम्मीदवार

रोमनी का यह बयान रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के बारे में लेकर आया. उन्होंने कहा कि ट्रंप व्हाइट हाउस की दौड़ में हैं लेकिन, हवाएं उनके खिलाफ हैं. 2012 में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उम्मीदवार रह चुके रोमनी ने कहा, ‘हम में से कई लोग मानते थे कि वे आदर्श उम्मीदवार नहीं होंगे, लेकिन अब वे उम्मीदवार हैं. काफी मुश्किल समय है. यह बता पाना संभव नहीं है कि आगे क्या होगा.’ रोमनी ने प्राइमरी चुनाव के दौरान ट्रंप को ‘धोखेबाज’ बताया था और ट्रंप विरोधी अभियान का नेतृत्व किया था. आठ नवंबर को होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी ने हिलेरी क्लिंटन को उम्मीदवार घोषित किया है.