दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल सरकार को जोरदार झटका दिया है. दिल्ली सरकार और केंद्र की बीच अधिकारों की लड़ाई पर फैसला सुनाते हुए उसने कहा है कि उपराज्यपाल (एलजी) ही दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख हैं. मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायाधीश जयंत नंत की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार एलजी की मर्जी के बिना कानून नहीं बना सकती. पीठ ने यह भी कहा कि संविधान में 69वें संविधान संशोधन (1991) के तहत जोड़ी गई धारा 239 (एए) दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश का विशेष दर्जा देती है.

अदालत के मुताबिक एलजी दिल्ली सरकार के फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं. एलजी के फैसला लेने के बारे में कोर्ट ने कहा कि वे अपने विवेक के आधार पर फैसला ले सकते हैं जबकि दिल्ली सरकार को कोई भी नोटिफिकेशन जारी करने से पहले एलजी की सहमति लेनी होगी. अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार के तहत आने वाला एंटी करप्शन ब्यूरो केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता.

एलजी और केजरीवाल सरकार के बीच अधिकारों को लेकर कई मुद्दों पर टकराव होता आया है. इस मसले को लेकर दिल्ली हाइकोर्ट में 10 याचिकाएं दाखिल की गई थीं. इनमें सीएनजी फिटनेस घोटाला और एसीबी में मुकेश मीणा की नियुक्ति जैसे मामले शामिल थे. दिल्ली हाइकोर्ट ने 24 मई को दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

फैसला आने के बाद आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता राघव चड्ढ़ा ने कहा कि लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार अपना काम नहीं कर पा रही है. उनका यह भी कहना था कि दिल्ली के मतदाताओं के हक की लड़ाई के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी.

स्वराज अभियान ने राजनैतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया

स्वराज अभियान ने अपने पहले राष्ट्रीय प्रतिनिधि अधिवेशन में राजनैतिक पार्टी के निर्माण का ऐलान किया. अधिवेशन में दो अक्टूबर तक राजनीतिक दल बनाने की बात कही गई. इसमें यह भी कहा गया कि राजनैतिक पार्टी की स्थापना के जरिए देश में वैकल्पिक राजनीति की आवाज़ बुलंद की जाएगी. स्वराज अभियान में आम आदमी पार्टी से राह अलग कर चुके कई नेता शामिल हैं. बुधवार को इसके राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सम्मेलन में 'राजनीतिक दल निर्माण के प्रस्ताव' पर प्रतिनिधियों के बीच सामूहिक बहस और चर्चा होने के बाद प्रस्ताव पर मतदान हुआ. इसमें 92.5 फीसदी सदस्यों ने राजनीतिक प्रस्ताव के समर्थन में मुहर लगाई.

अधिवेशन के दौरान स्वराज अभियान ने राजनैतिक पार्टी को मूर्त रुप देने के लिए छह सदस्यों की एक टीम का गठन किया है. प्रो. आनंद कुमार को स्वराज अभियान का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया. अधिवेशन को संबोधित करते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि उनके लिए पार्टी बनाने का मतलब देश में सच्चाई और ईमानदारी की ऊर्जा जहां कहीं भी है उसे जोड़ना है.