पाकिस्तान के क्वेटा में सोमवार को हुए एक विस्फोट में 70 लोग मारे गए और 100 से ज्यादा घायल हो गए. प्रशासन ने इसके आत्मघाती हमला होने की पुष्टि की है. खबरों के मुताबिक इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान तालिबान के एक गुट जमातुल अहरार ने ली है. बलूचिस्तान के गृह सचिव अकबर हारिफल ने बताया कि बलूचिस्तान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष की मौत के बाद उनके अंतिम दर्शन करने अस्पताल पहुंचे वकीलों और पत्रकारों को निशाना बनाकर यह हमला किया गया. स्थानीय अखबार डॉन के मुताबिक सोमवार सुबह बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बिलाल अनवर कासी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सनाउल्लाह जाहिरी ने पहले इस हमले का आरोप भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) पर लगाया था. बलूचिस्तान में पिछले एक दशक से ज्यादा समय से हिंसक घटनाएं हो रही हैं. पिछले 15 वर्षों में यहां खास तौर पर शिया और हजारा अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की 1400 से ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं.

तुर्की में मौत की सजा से प्रतिबंध हटाने की तैयारी

तुर्की में सैन्य तख्तापलट की कोशिश के बाद से मौत की सजा को दोबारा शुरू करने की चर्चा हो रही है. रविवार को राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोऑन ने एक बार फिर दोहराया है कि वे मौत की सजा से प्रतिबंध हटाने का समर्थन करेंगे. 15 हालिया सैन्य तख्तपलट की कोशिश के विरोध में आयोजित एक रैली में उन्होंने कहा, ‘मौत की सजा को लेकर तुर्की की संसद फैसला करेगी. मैं पहले ही बता रहा हूं कि मैं संसद के फैसले को मंजूरी दे दूंगा. अब जनता को इसके बारे में फैसला करना है, मुझे यही लगता है कि राजनीतिक दल उसके फैसले को लागू करने के लिए बाध्य होंगे.’

तुर्की ने यूरोपीय संघ (ईयू) की सदस्यता पाने के लिए 2004 में मौत की सजा पर प्रतिबंध लगा दिया था. ऐसा माना जा रहा है कि अगर तुर्की मौत की सजा को बहाल करता है तो ईयू में शामिल होने की उसकी अब तक की कोशिशें बेकार चली जाएंगी. ईयू में शामिल देशों में मौत की सजा पर पाबंदी है और वे तुर्की में इसे दोबारा शुरू करने का विरोध कर रहे हैं. खबरों के मुताबिक एर्दोऑन ने धर्मगुरू फतुल्लाह गुलेन पर भी निशाना साधा. उन्होंने तुर्की से गुलेन के समर्थकों का नामोनिशान मिटाने की बात कही. तुर्की अमेरिका में रहने वाले गुलेन को सैन्य तख्तापलट के लिए जिम्मेदार बता रहा है.

रियो ओलंपिक आयोजन समिति ने प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई का समर्थन किया

ब्राजील के अंतरिम राष्ट्रपति मिशेल टेमर के विरोध की छाया रियो ओलंपिक पर भी पड़ रही है. इसे देखते हुए ओलंपिक आयोजन समिति ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कानून का हवाला देकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का समर्थन किया है. ओलंपिक आयोजन समिति की प्रवक्ता मारियो एंड्राडा ने कहा, ‘हम प्रदर्शनकारियों को आगाह करते हैं कि खेल परिसरों में ऐसे प्रदर्शनों की इजाजत नहीं है.’

दरअसल खेलों के दौरान प्रदर्शनकारियों को स्टेडियमों में विरोध दर्ज कराते देखा जा रहा है. शुक्रवार के बाद से अब तक खेलों के दौरान नारेबाजी और पोस्टर लहराने की कई घटनाएं सामने आई हैं. लोग कागज पर ‘फोरा टेमर’ (टेमर गद्दी छोड़ो) लिखकर दर्शकों के बीच तब तक खड़े रहते हैं जब तक पुलिस उन्हें नहीं हटाती है.

शुक्रवार को ओलंपिक समारोह के दौरान माराकाना स्टेडियम में भी प्रदर्शनकारियों ने ‘फोरा टेमर’ के नारे लगाए थे. भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से टेमर का विरोध हो रहा है. इससे पहले वे उपराष्ट्रपति थे और मई में निर्वाचित राष्ट्रपति डिलेमा रोसेफ के निलंबन के बाद वे राष्ट्रपति बने हैं. रोसेफ को बजटीय कानूनों के उल्लंघन के आरोप में महाभियोग चलाने के लिए निलंबित किया गया था.