‘लोकतंत्र बातचीत से चलता है. हमने बड़े-बड़े स्पीकर देखे हैं.’

— मुलायम सिंह यादव, सपा के राष्ट्रीय अक्ष्यक्ष

मुलायम सिंह यादव ने यह बात लोकसभा में हंगामे पर अपनी शिकायत को नजरअंदाज किए जाने पर कही. इससे पहले उन्होंने लोकसभा स्पीकर से सदन में बोलने की अनुमति मांगी थी. इस पर स्पीकर ने जब उनकी बात को हंसी में टालने की कोशिश की तो वे नाराज हो गए. उन्होंने कहा कि उन्हें भी सदन का अच्छा अनुभव है और वे आसन में भरोसा रखते हैं, लेकिन आसन को परवाह नहीं है कि वे और बाकी सदस्य भी सदन में मौजूद हैं. शून्यकाल के दौरान वाईएसआर कांग्रेस के सांसद आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हंगामा कर रहे थे.

‘प्रधानमंत्री को दलित मुद्दे पर ड्रामा करना बंद कर देना चाहिए.’

— दिग्विजय सिंह, कांग्रेस महासचिव

दिग्विजय सिंह ने यह बात तेलंगाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयानों को लेकर कही. उन्होंने कहा , ‘प्रधानमंत्री का यह बयान कि दलितों को नहीं मुझे गोली मार दो, उनकी हताशा का सबूत है.’ उन्होंने दादरी, झारखंड और ऊना में गौरक्षा के नाम पर हुई हिंसक घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री की चुप्पी पर निशाना साधा. कांग्रेस महासचिव ने भाजपा शासित सरकारों पर ऐसे तत्वों की मदद करने का आरोप लगाया और भाजपा के वसुधैव कुटुंबकम के नारे पर सवाल उठाया. शनिवार को प्रधानमंत्री ने भी गौरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों की खिंचाई की थी. उन्होंने कहा था कि 70-80 फीसदी गौरक्षक रात में असामाजिक काम करते हैं और दिन में गौरक्षक बन जाते हैं.


‘सरकार को लोकसभा को अपना जूनियर पार्टनर समझना बंद कर देना चाहिए.’

— वीरप्पा मोइली, कांग्रेस सांसद

मोइली का यह बयान जीएसटी बिल पर लोकसभा की तुलना में राज्यसभा को ज्यादा महत्व देने को लेकर आया. उन्होंने कहा, ‘यह ऐसा मामला है जैसे इस सदन (लोकसभा) के पास दिमाग ही नहीं है.’ मोइली ने कहा, ‘इस सदन में हम लोगों ने जीएसटी विधेयक को संसदीय समिति को सौंपने की बात कही थी, लेकिन हमारी बात नहीं मानी गई थी.’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस जीएसटी का समर्थन करती है लेकिन, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इससे बहुत बड़ा परिवर्तन आ जाएगा. सरकार पिछले हफ्ते राज्यसभा में जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने में सफल रही है.


‘हिजबुल्ला दस हजार मिसाइलों के साथ इजरायल पर हमला करने के लिए तैयार है.’

— हुसैन सलामी, ईरान की सेना के डिप्टी कमांडर

हुसैन सलामी का यह बयान इजरायल को फिलिस्तीनी इलाके में पुरानी गलतियां न दोहराने की चेतावनी देते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘अभी यहूदी शासन के पतन के लिए पहले से कहीं ज्यादा मौके मौजूद हैं.’ सलामी ने कहा कि इजरायल जैसे ही कोई गलत हरकत करेगा, हमले की जद में आ जाएगा. कुछ हफ्ते पहले ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के वरिष्ठ सलाहकार अहमद करीमपुरी ने भी कहा था कि अगर सर्वोच्च नेता अली खमैनी आदेश कर दें तो ईरान आठ मिनट के भीतर इजरायल को तबाह कर सकता है. तनाव बढ़ाने वाले ईरान के ऐसे बयानों को मनोवैज्ञानिक युद्ध और जनता में राष्ट्रवादी भावना उभारने की कोशिश का हिस्सा माना जाता है.