बीते कुछ महीनों के दौरान तुर्की और रूस के संबंधों में आई खटास मिट गई है. पिछले महीने तुर्की में सैन्य तख्तापलट की कोशिश के बाद राष्ट्रपति रेचप तैय्यप एर्दोऑन अपनी पहली विदेश यात्रा पर मंगलवार को रूसी शहर सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे. यहां वे रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक में शामिल हुए. इस मौके पर राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस, तुर्की के साथ आर्थिक सहयोग के अलावा अन्य समझौते करने के लिए तैयार है. पिछले साल नवंबर में तुर्की और रूस के रिश्ते उस समय बिगड़ गए थे जब सीरिया सीमा पर तुर्की ने रूस के एक लड़ाकू विमान को मार गिराया था. इस घटना में पायलट मारा गया था. इसके बाद रूस ने तुर्की पर व्यापार प्रतिबंध लगाने के अलावा अपने पर्यटकों के वहां जाने पर रोक भी लगा दी थी.

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की से रवाना होने के पहले एर्दोऑन ने पुतिन को अपना मित्र बताया. उन्होंने यह भी कहा कि वे रूस के साथ रिश्तों का नया अध्याय शुरू करना चाहते हैं. रूसी समाचार एजेंसी तास के बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मुझे यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में नई उपलब्धियों की तरह लगती है जिसमें नए सिरे से शुरूआत होनी है.’ रूस के प्रतिबंधों से तुर्की को काफी नुकसान उठाना पड़ा है. स्थानीय अखबार सबह की रिपोर्ट के अनुसार इस साल पहली छमाही में ही तुर्की से रूस को होने वाले निर्यात में 60 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है.

थाईलैंड में दिसंबर 2017 तक निर्वाचित सरकार बनने की उम्मीद

थाईलैंड में अगले साल दिसंबर तक निर्वाचित सरकार बन सकती है. रॉयटर्स के मुताबिक संविधान मसौदा समिति के प्रवक्ता चैचई नै चियंग माई ने कहा, ‘हमारा मानना है कि सितंबर या अक्टूबर 2017 तक चुनाव हो जाएंगे और दिसंबर 2017 से पहले सरकार बन जाएगी.’ इससे पहले रविवार को जनता ने सेना समर्थित संविधान पर हुए जनमत संग्रह में इसके पक्ष में मतदान किया है. जुंटा विरोधी गठबंधन ने भी जनमत संग्रह के परिणाम को स्वीकार करने की घोषणा की है. जनमत संग्रह होने से पहले जुंटा के प्रधानमंत्री प्रयुथ चान ने भी 2017 में चुनाव कराने की घोषणा की थी.

सेना समर्थित संविधान के पक्ष में जनमत संग्रह के परिणाम को विशेषज्ञ जनता के बीच राजनीतिक स्थिरता के पक्ष में बने रुझान से जोड़कर देख रहे हैं. हालांकि, थाईलैंड उन देशों में शामिल है जहां संविधान या उसके मसौदे अंतिम तौर पर राजनीतिक स्थिरता लाने में विफल रहे हैं. 1932 में संवैधानिक राजशाही आने के बाद से यहां पर अब तक 19 संविधान या उसके मसौदे पेश हो चुके हैं. इसके बावजूद यहां पिछले एक दशक से राजनीतिक उथल-पुथल बनी हुई है. इस दौरान दो बार सैन्य तख्तापलट हुए हैं और इसके विरोध में कई हिंसक प्रदर्शन हो चुके हैं.

सऊदी अरब ने यमन की राजधानी पर दोबारा हमले शुरू किए

सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना ने पांच महीने बाद दोबारा यमन की राजधानी सना पर हमले शुरू कर दिए. बताया जा रहा है कि पिछले हफ्ते यमन में टकराव समाप्त करने से संबंधित वार्ता टूटने के बाद ये हमले शुरू हुए हैं. सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन निर्वासित राष्ट्रपति अब्द-रबू-मंसूर के प्रति वफादार सेना के समर्थन में हमले कर रहा है. यह सेना ईरान समर्थित हौदी विद्रोहियों को सना से बाहर करने के लिए लड़ रही है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक सऊदी गठबंधन ने सना में राष्ट्रपति भवन के परिसर और सैन्य अड्डे को निशाना बनाया है. इसके अलावा सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नजदीक अरहाब क्षेत्र में सैन्य अड्डे पर हमला किया गया है. इसे देखते हुए सना एयरपोर्ट प्रशासन ने सोमवार को अगले 72 घंटे तक एयरपोर्ट की उड़ानों को रोकने का फैसला किया है. रविवार रात सना के बाहरी इलाके में सऊदी गठबंधन के हमले में नौ नागरिक मारे गए थे.

यमन के गृह युद्ध में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में दखल दिया था. लेकिन, मार्च 2016 में यमन-सऊदी सीमा पर लड़ाई रोकने का अनौपचारिक समझौता होने के बाद हवाई हमलों को रोक दिया गया था.