नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट ने केंद्र सरकार के रसोई गैस सब्सिडी से बचत के बड़े दावों की पोल खोल दी है. शुक्रवार को संसद में पेश की गई रिपोर्ट में कैग ने कहा है कि सरकार को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के तहत केवल 1,764 करोड़ रुपए की बचत ही हुई है. कैग के मुताबिक सरकार इस योजना में जिस भारी बचत का दावा कर रही है, उसमें से 21,552 करोड़ रुपए की बचत वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी के कारण हुई है.

इससे पहले पांच मई को पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि सरकार ने पिछले दो वित्त वर्षों में रसोई गैस सब्सिडी में 21,000 करोड़ रुपये से भी अधिक की बचत की है. उनका कहना था कि डीबीटी योजना से 3.34 करोड़ नकली गैस कनेक्शनों का पता चला और इन्हें हटाने से सरकार को वित्त वर्ष 2014-15 में 14,672 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है. प्रधान का कहना था कि 2015-16 में इस योजना से 7,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है. उनके मुताबिक बीते वित्तीय वर्ष की तुलना में यह आंकड़ा इसलिए कम रहा कि कच्चे तेल के दामों में आई कमी ने सब्सिडी का बिल भी कम कर दिया.

डीबीटी योजना मोदी सरकार ने नवंबर 2014 में शुरू की थी. इसके तहत सब्सिडी की रकम सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में भेज दी जाती है. बीते 15 अगस्त को लाल किले से दिए गए अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि डीबीटी और ‘गिव इट अप’ अभियान से दलालों और ब्लैक मार्केटिंग करने वालों को चोट पहुंची है जिससे गैस सब्सिडी के नाम पर हर साल होने वाली 15 हजार करोड़ रु की चोरी रुकी है