अगले साल से रेल बजट को अलग से पेश करने की व्यवस्था समाप्त हो सकती है. वित्त मंत्रालय ने इसे आम बजट के साथ मिलाने के प्रस्ताव पर काम करना शुरू कर दिया है. सूत्रों के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली ने अधिकारियों की पांच सदस्यीय समिति गठित की है जो दोनों बजट को मिलाने के संभावित तरीकों का खाका तैयार करेगी. भारत में 1924 से रेल बजट को अलग से पेश किया जा रहा है.

कुछ दिन पहले रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने वित्त मंत्री को पत्र लिखा था. खबर के मुताबिक इसके बाद वित्त मंत्रालय ने दोनों बजट को मिलाने पर विचार करना शुरू किया है. इसी हफ्ते राज्यसभा को सुरेश प्रभु ने बताया था कि उन्होंने भारतीय रेल और अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए दोनों बजट को मिलाने के लिए वित्त मंत्री को पत्र लिखा है. हालांकि, उन्होंने इसके लागू होने की कोई समय-सीमा नहीं बताई.

नीति आयोग की एक समिति भी इसकी सिफारिश कर चुकी है. विवेक देबरॉय और किशोर देसाई की समिति ने अंग्रेजी हुकूमत के समय की इस व्यवस्था को खत्म करने की सिफारिश की थी. इसे कई लिहाज से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है. अगर रेल बजट को आम बजट में मिला दिया जाता है तो रेल मंत्रालय भी दूसरे मंत्रालयों की तरह वित्त मंत्रालय पर निर्भर हो जाएगा. इसके साथ-साथ उसकी आय और व्यय भी सीधे वित्त मंत्रालय की निगरानी में आ जाएंगे.