‘पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान में आजादी की मांग दबाने की कोशिश करती है. धार्मिक चरमपंथियों की भी मदद लेती है.’

— हुसैन हक्कानी, पाकिस्तान के पूर्व राजदूत

हक्कानी ने यह बात एक साक्षात्कार में बलूचिस्तान के मौजूदा हालात पर कही. बलूचिस्तान को जटिल क्षेत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान के बड़े हिस्से पर पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार का नियंत्रण हो, ऐसा जरूरी नहीं है. हक्कानी ने कहा कि बलूच जाति राष्ट्रवादियों के साथ सहानुभूति रखती है और आजादी या स्वायत्त बलूचिस्तान का समर्थन करती है. 15 अगस्त को लालकिले से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोगों का जिक्र किया था. उन्होंने कश्मीर संकट पर सर्वदलीय बैठक के दौरान इन इलाकों में मानवाधिकार हनन पर बात करने की जरूरत पर जोर दिया था.

‘पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर स्वतंत्र होगा, वहां तिरंगा फहराया जाएगा. यह भारतीय समाज और राष्ट्र का संकल्प है.’

— जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री कार्यालय राज्यमंत्री

जितेंद्र सिंह का यह बयान एक निजी टीवी चैनल द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की आजाद कराने के बारे में पूछे जाने पर आया. उन्होंने कहा कि इसके लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास होते हैं लेकिन इसमें संकल्प का होना जरूरी है क्योंकि संकल्प ही आगे चलकर समाधान में बदलता है. राज्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय संसद ने इस बारे में 1994 में जो प्रस्ताव पारित किया था उसे बाद की कांग्रेस सरकारों ने छोड़ दिया, भाजपा सरकार उसे ही आगे बढ़ा रही है. बीते हफ्ते सीमावर्ती जिले कठुआ से तिरंगा यात्रा शुरू करने के बाद उन्होंने कहा था कि पीओके में तिरंगा फहराने के बाद ही यह यात्रा पूरी होगी.


‘बलूचिस्तान के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी अपनी राय पर कायम है. केंद्र सरकार की विदेश नीति अपरिपक्व है.’

— सलमान खुर्शीद, कांग्रेस नेता व पूर्व विदेश मंत्री

सलमान खुर्शीद ने यह बात विदेश नीति में आई आक्रामकता को लेकर कही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर संकट पर सर्वदलीय बैठक में बातचीत के जरिए हल निकालने का सुझाव आया था, लेकिन इतने दिन बीतने के बावजूद सरकार ने कोई प्रयास नहीं किया है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उनकी अपनी पार्टी सत्ता में है इसलिए वह जिम्मेदारी से बच नहीं सकती है. मंगलवार को कांग्रेस ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी बलूचिस्तान पर चिंता जताने वाले पहले पीएम नहीं हैं, कांग्रेसनीत यूपीए सरकार ने भी यह मुद्दा उठाया था.


‘पैसा गरीबों और मध्यम वर्ग के हाथ में जाना चाहिए, न कि अंबानी और अडानी के पास.’

— अरविंद केजरीवाल, दिल्ली के मुख्यमंत्री

केजरीवाल ने यह बात दिल्ली में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के फैसले को लेकर कही. उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के फैसले से अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा क्योंकि इससे मांग और उसके बाद उपभोग में इजाफा होगा. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, ‘यह देखने वाली बात होगी कि क्या भाजपा और कांग्रेस शासन वाले राज्यों में ऐसा कोई फैसला होता है या नहीं.’ प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि इस साल दिल्ली में शराब की नई दुकान नहीं खुली है और मोहल्ला सभाएं मौजूदा दुकानों को हटाने के बारे में फैसला करेंगी. मजदूरी बढ़ाने के बाद व्यापारिक संगठनों ने हड़ताल की धमकी दी है.