तमिलनाडु में मानहानि कानून के दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री जयललिता की खिंचाई की है. एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक हस्ती होने के नाते आपको (जयललिता) आलोचनाएं सुननी पड़ेंगी और इसके लिए हर बार मानहानि का मामला दर्ज नहीं कराया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वस्थ लोकतंत्र के खिलाफ मानते हुए तमिलनाडु की मुख्यमंत्री को मानहानि के मामले दर्ज करवाने में संयम बरतने की सलाह दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को लताड़ लगाते हुए यह भी कहा कि किसी दूसरे राज्य में सरकारी मशीनरी का ऐसा दुरुपयोग नहीं होता जैसा तमिलनाडु में होता है. मानहानि कानून के दुुरुपयोग के मामले में कोर्ट ने दूसरी बार नोटिस जारी करके जयललिता से जवाब मांगा है. इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होनी है. इससे पहले जारी नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार या जयललिता की आलोचना के लिए दर्ज हुए मानहानि मामलों की सूची मांगी थी. एनडीटीवी के मुताबिक तमिलनाडु सरकार ने बताया है कि पिछले पांच साल में सरकार ने आपराधिक मानहानि के 200 से ज्यादा मामले दर्ज कराए हैं. इनमें से 55 मामले मीडिया और 85 मामले विपक्षी पार्टी डीएमके के नेताओं के खिलाफ हैं.

इसके अलावा दूसरी विपक्षी पार्टी डीएमडीके के प्रमुख विजयकांत के खिलाफ भी राज्य सरकार ने मानहानि के 14 मामले दर्ज कराए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के खिलाफ यह टिप्पणी विजयकांत की याचिका पर सुनवाई के दौरान ही की है. डीएमडीके प्रमुख ने याचिका में अपने खिलाफ दायर मानहानि मामलों को खारिज करवाने की अपील की थी और फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी मामलों की कार्रवाई पर रोक लगा रखी है.