बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई स्थित हाजी अली दरगाह में मजार के पास महिलाओं के जाने पर लगी रोक को खारिज कर दिया है. दरगाह ट्रस्ट ने यह पाबंदी 2012 में लगाई थी. इसे असंवैधानिक बताते हुए जस्टिस वीएम कनाडे और जस्टिस रेवती मोहिते डेरे की बेंच ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद-14 (कानून के समक्ष समानता), अनुच्छेद-15 (लिंग, जाति, धर्म के आधार पर भेदभाव का निषेध), अनुच्छेद-19ए (भारत में कहीं भी जाने की आजादी) और अनुच्छेद-25 (धार्मिक मान्यता और आस्था की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करती है. हालांकि, बेंच ने अपने आदेश पर छह महीने के लिए रोक लगा दी है क्योंकि दरगाह ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए वक्त मांगा था.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह फैसला 'भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन' से जुड़ी नूरजहां की जनहित याचिका पर सुनाया है. 2014 में दाखिल याचिका में नूरजहां ने कहा था कि वे बचपन से दरगाह के भीतर जा रही थीं लेकिन अचानक दरगाह ट्रस्ट ने जून, 2012 में अंदरूनी हिस्सों में महिलाओं के जाने पर रोक लगा दी. सुनवाई के दौरान दरगाह ट्रस्ट ने कहा कि इस्लाम में महिलाओं का मुस्लिम संतों की मजार के नजदीक जाना पाप माना गया है और मौजूदा व्यवस्था के तहत महिलाओं को प्रार्थना करने के लिए सुरक्षित जगह दी गई है.

हाई कोर्ट के इस फैसले से देश में धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश और पूजा करने के अधिकार के आंदोलन को मजबूती मिलने की उम्मीद है. इस साल की शुरुआत में महिलाओं को महाराष्ट्र के शनि शिंगनापुर मंदिर में पूजा करने का अधिकार मिला है.