यूपी की चुनावी सियासत में तेजी के साथ सवर्णों के आरक्षण का मुद्दा भी गरमाने लगा है. बसपा और कांग्रेस के बाद अब भाजपा के प्रमुख सहयोगी और दलित नेता रामदास अठावले ने भी गरीब सवर्णों के लिए आरक्षण का समर्थन किया है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री अठावले ने कहा कि 49.5 फीसदी मौजूदा आरक्षण को बढ़ाकर 75 फीसदी कर दिया जाना चाहिए ताकि इसमें राजपूत, मराठा, जाट, पटेल, गुज्जर और ब्राह्मण जातियों के कमजोर वर्गों को शामिल किया जा सके.

अठावले ने कहा, ‘सवर्ण जातियों में जिनकी सालाना आय छह लाख रुपये से कम है उन्हें नौकरियों और शिक्षा क्षेत्र में आरक्षण मिलना चाहिए. इसके लिए मौजूदा आरक्षण में 25 फीसदी की बढ़ोतरी करनी चाहिए ताकि अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) के हितों पर कोई असर न पड़े.’ उन्होंने कहा कि अगर मौजूदा सीमा को बढ़ाते हुए गरीब सवर्णों को आरक्षण के दायरे में लाया जाता है तो दलितों व पिछड़ी जातियों को कोई दिक्कत नहीं होगी. अभी सरकारी नौकरियों व शैक्षणिक संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी को क्रमशः 15, 7.5 और 27 फीसदी आरक्षण मिलता है. 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में एससी, एसटी और ओबीसी की आबादी क्रमशः 16.6, 8.6 और 52 फीसदी है.

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के अध्यक्ष रामदास अठावले ने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से चर्चा करने का वादा किया है. उन्होंने कहा कि इस पर संसद में बहस होनी चाहिए और इसके लिए संविधान संशोधन किया जाना चाहिए. तमिलनाडु में लागू 69 फीसदी आरक्षण का उदाहरण देकर अठावले ने कहा, ‘सामाजिक न्याय का मतलब आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सहारा देना है.’ उन्होंने कहा, ‘जाट, मराठा, पटेल, गुज्जर, राजपूत और ब्राह्मण जातियों के बीच भी तंगी की स्थिति है, इसलिए इनमें आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के दायरे में आने वाले लोगों को अतिरिक्त 25 फीसदी आरक्षण में शामिल किया जाना चाहिए. आखिरकार, ओबीसी को भी इसी आधार पर आरक्षण के दायरे में लाया गया था.’

रविवार को आजमगढ़ की रैली में बसपा प्रमुख मायावती ने भाजपा पर दलितों और पिछड़े वर्गों का आरक्षण खत्म करने की साजिश करने का आरोप लगाया था और गरीब सवर्णों के लिए आरक्षण का समर्थन किया था. गरीब सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देने के कांग्रेस के वादे पर तंज करते हुए उन्होंने कहा था कि 54 साल केंद्र की सत्ता में रहने के दौरान पार्टी को इसकी याद नहीं आई.