गुजरात से भाजपा के लिए लगातार चिंताजनक खबरें आ रही हैं. गुरुवार को सूरत में आयोजित एक कार्यक्रम में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री विजय रूपानी के लिए तब असहज करने वाली स्थिति पैदा हो गई जब पाटीदार समुदाय के कई लोगों ने इसमें हंगामा खड़ा कर दिया. इस कार्यक्रम का नाम पाटीदार अभिवादन समारोह था. इसमें कई बड़े पाटीदार नेताओं जैसे गुजरात भाजपा के अध्यक्ष जीतू वघानी, केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपला और मनसुख मांडविया को भी सम्मानित किया जाना था. मकसद यह साबित करना था कि गुजरात का पाटीदार समुदाय भाजपा के साथ खड़ा है. लेकिन हाल में सुर्खियों में रहे पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल के समर्थकों ने कार्यक्रम में खलल डाल दिया.

खबरों के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान हार्दिक पटेल के समर्थकों ने ‘जय सरकार, जय पाटीदार’ के नारे लगाए. बात नारेबाजी तक सीमित नहीं रही. उन्होंने कुर्सियां तोड़ने के अलावा सभा स्थल पर पत्थरबाजी भी की. इसके चलते कार्यक्रम को 45 मिनट में समाप्त कर दिया गया. यह हंगामा तब हुआ जब सुरक्षा के लिए 1700 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात थे.

हार्दिक पटेल के समर्थकों के हंगामे और नारेबाजी के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह महज चार मिनट ही भाषण दे पाए. मुख्यमंत्री विजय रूपानी और केंद्रीय मंत्री रूपाला को भी पांच मिनट बोलने का मौका मिल पाया. दोनों नेताओं ने अपने भाषण में भाजपा का समर्थन करने के लिए पाटीदार समुदाय का आभार जताया लेकिन पाटीदार आरक्षण जैसे विवादित मुद्दे को छूने से परहेज किया. गुजरात में पाटीदार समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल किए जाने और शिक्षा वह रोजगार में आरक्षण की मांग रहा है.

सभा स्थल के बाहर गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया गया. इसमें पुलिस वाहन भी शामिल थे. हंगामे की वजह से प्रशासन को डायमंड सिटी के पाटीदार बाहुल्य इलाके में बस रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (बीआरटीएस) सेवा बंद करनी पड़ी. हालांकि, गुजरात भाजपा के अध्यक्ष जीतू वघानी ने दावा किया कि ‘केवल कुछ दर्जन लोगों ने गड़बड़ी पैदा करने की कोशिश की. बाकी पाटीदार समुदाय के हजारों लोग मौजूद रहे और उन्होंने भाजपा के पक्ष में अपना समर्थन जताया है.’

पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग कर रही पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के संस्थापक हार्दिक पटेल ने उदयपुर में कहा, ‘सूरत में जो कुछ हुआ, वह गुजरात में पाटीदारों के गुस्से को दिखाता है.’ हार्दिक पटेल ने भाजपा पर गुजरात के पाटीदार समुदाय को बांटने का आरोप लगाया. सूरत में पाटीदारों ने अपने विरोध का संकेत पहले ही दे दिया था. अगस्त 2015 में पाटीदार समुदाय की रैली पर लाठीचार्ज के लिए अमित शाह की तुलना जनरल डायर से करते हुए शहर में ‘जनरल डायर गो बैक’ के पोस्टर चिपकाए गए थे. अन्य पोस्टरों में पाटीदार समुदाय से आने वाले 44 विधायकों को बेकार बताया गया था.