विवादित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक से जुड़ी जांच राजनीतिक मोड़ लेती जा रही है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2011 में नाइक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) ने राजीव गांधी चेरिटेबल ट्रस्ट को 50 लाख रुपये बतौर डोनेशन दिए थे. तब केंद्र में यूपीए सरकार थी. हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि विवाद सामने आने पर पार्टी ने पैसे लौटा दिए हैं.

गृह मंत्रालय आतंकवाद को बढ़ावा देने के मामले में जाकिर नाईक और उनके संगठन आईआरएफ की जांच कर रहा है. इसी के तहत आईआरएफ को मिली विदेशी फंडिंग की जांच की जा रही है. खबर के मुताबिक मंत्रालय इस मामले में अपने तीन अधिकारियों को निलंबित करने की तैयारी कर रहा है. इन अधिकारियों पर फॉरेन कॉन्ट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (एफसीआरए) के तहत आईआरएफ की अनियमितताओं को नजरअंदाज कर विदेशी फंडिंग का उसका लाइसेंस रीन्यू करने का आरोप है. मंत्रालय इस मामले में पहले ही एक संयुक्त सचिव सहित चार अधिकारियों को लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर चुका है.

रिपोर्ट के अनुसार गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने पहले भी आईआरएफ की विदेशी फंडिंग की जांच की थी. इसमें कई तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं. इनमें 10 लाख दिरहम की विदेशी फंडिंग, विदेशी फंडिंग के 10 करोड़ रुपए का फिक्स्ड डिपॉजिट और राजीव गांधी चेरिटेबल ट्रस्ट जैसे अन्य संगठनों को विदेशी फंडिंग से मदद करने जैसी बातों की घोषणा न किया जाना शामिल था. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, ‘पहले की जांच रिपोर्ट में एफसीआरए उल्लंघन के इन मामलों का जिक्र था. लेकिन, अधिकारियों ने नोट शीट तैयार करते समय इन्हें कमजोर कर दिया. यहां तक कि फाइल को एफसीआरए डिवीजन के संयुक्त सचिव तक नहीं पहुंचने दिया गया, बल्कि अवर सचिव ने आईआरएफ को विदेशी फंडिंग के लिए अधिकृत करते हुए फाइल को लौटा दिया था.’

गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन ‘पूर्व अनुमति’ श्रेणी के संगठनों में रखा गया था. इसके तहत संगठन द्वारा कोई भी विदेशी फंडिंग लेने या उसे खर्च करने से पहले गृह मंत्रालय की मंजूरी अनिवार्य है.

उधर, आईआरएफ ने किसी गड़बड़ी के आरोपों का खंडन किया है. संस्था के प्रवक्ता आरिफ मलिक ने कहा, ‘जहां तक राजीव गांधी ट्रस्ट को फंड देने का सवाल है तो आईआरएफ कई तरह की गतिविधियों के लिए धन मुहैया करता है. इनमें उच्च शिक्षा, सर्जरी और मेडिकल स्टूडेंट की छात्रवृत्ति शामिल है. यह संगठन की नीतियों के दायरे में है. इन्हें आईआरएफ के सालाना रिटर्न में भी दिखाया गया है.’

उधर, कांग्रेस ने माना है कि राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट को कुछ साल पहले आईआरएफ से 50 लाख रु मिले थे. हालांकि पार्टी ने कहा कि जाकिर नायक की गतिविधियों पर विवाद उठने के बाद यह रकम वापस कर दी गई. कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने पार्टी का बचाव करते हुए कहा कि जब डोनेशन दिया गया तब आईआरएफ न तो संदिग्ध संगठनों की सूची में था और निगरानी सूची में.