रक्षा मंत्रालय ने सीबीआई को यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए एम्ब्रेयर विमान सौदे की जांच करने को कहा है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक मंत्रालय ने 20.8 करोड़ डॉलर (करीब 1,383 करोड़ रूपए) के इस सौदे में रिश्वत के आरोपों को गंभीर प्रकृति का माना है. तीन ईएमबी-145 एयरक्राफ्ट का यह सौदा वर्ष 2008 में ब्राजील की विमान निर्माता कंपनी एम्ब्रेयर और भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के बीच हुआ था.

पिछले हफ्ते रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस मामले में बात करते हुए कहा था कि अगर यह मामला केवल प्रक्रिया से जुड़ा है तो रक्षा मंत्रालय आतंरिक जांच कर सकता है. लेकिन अगर इसमें कोई आपराधिक पहलू है तो उसकी जांच सीबीआई ही करेगी.

2010 में कैरेबियाई देश डोमिनिकन रिपब्लिक में एम्ब्रेयर के साथ हुआ एक विमान सौदा संदेह के घेरे में आया था. इसके बाद अमेरिका के न्यायिक विभाग ने भारत सहित दुनिया भर में एम्ब्रेयर के साथ हुए सौदों की जांच शुरू कर दी थी. हाल ही में ब्राजीली मीडिया ने खबर दी थी कि एम्ब्रेयर में सेल्स से जुड़े रहे एक पूर्व निदेशक ने अमेरिकी जांचकर्ताओं को बताया है कि कंपनी ने ब्रिटेन के एक दलाल के माध्यम से कई सौदों को अंतिम रूप दिया था.

इसके बाद कई रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया कि कंपनी ने भारत में सौदा पक्का करने के लिए भी एक दलाल की मदद ली थी. इन आरोपों के बाद डीआरडीओ ने एम्ब्रेयर से स्पष्टीकरण भी मांगा था क्योंकि, भारतीय सैन्य खरीद के नियमों के अनुसार भारत में बिचौलियों की मदद से रक्षा सौदे करना प्रतिबंधित है. यानी अगस्ता वेस्टलैंड प्रकरण के बाद रक्षा मामलों से जुड़े इस सौदे की जांच से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.