निर्देशक : विक्रम भट्ट

लेखक : विक्रम भट्ट

कलाकार : इमरान हाशमी, गौरव अरोरा, कृति खरबंदा

रेटिंग : 2 / 5

राज़... राज़ 2... राज़ 3... राज़ रीबूट. कायदे से तो यह फिल्म समीक्षा यहीं पर ख़त्म हो जानी चाहिए. फिल्म में कहानी वही है, लोकेशन भी लगभग पिछली फिल्मों से मिलती-जुलती हैं. भूत के डराने का, यहां तक कि उसे भगाने का तरीका भी पुराना है. फिर भी फिल्म में एक ट्विस्ट ऐसा है जिसकी टेक लेकर कहा जा सकता है कि कई एरर होने के बावजूद राज़ रीबूट एक बार देखी जा सकती है.

फिल्म का पहला हिस्सा बिपाशा बासु और डीनो मोरिया वाली पहली राज़ की याद दिलाता है. फिल्म का नायक रेहान (गौरव अरोरा) और उसकी पत्नी शायना (कृति खरबंदा) एक नए शहर में बसने पहुंचते हैं. पहली वाली राज़ की तरह वे यहां पर पहले भी आ चुके हैं. रेहान अपने काम में बेतरह मशरूफ हैं और शायना इस नए महलनुमा घर में एकदम अकेली. शुरुआत से ही पता चल जाता है कि शायना को भूत से डरने के लिए ही अकेला छोड़ा गया है. यहां पर भी फ़्लैशबैक में भूला हुआ प्यार और वर्तमान में शादी तोड़ने की कोशिश करता एक भूत है. आगे के दृश्यों में हीरोइन घिसटते हुए बिस्तर के नीचे भी समाई है, हवा में भी लटकी है और उसने अपने पसंदीदा फावड़े से कब्र भी खोदी है.

कृति खरबंदा के चेहरे पर पूरे समय एक जैसे ही भाव नजर आते हैं. मजेदार बात यह है कि भूत के प्रभाव में आने के बाद वे डरावनी लगने के बजाय एक सुन्दर भूत नजर आती हैं

फिल्म देखते हुए राज़ सीरीज की कई फिल्मों की याद आती है क्योंकि भूत अपने उन्हीं पुराने तरीकों, जैसे दरवाजे-परदे हिलाकर, वॉश बेसिन से झांककर डराने की कोशिश करता है. पहले हिस्से में डर इसलिए भी नहीं लगता है क्योंकि हर दृश्य के बाद आपको पता होता है कि अब कुछ होने वाला है और दुर्भाग्य (दर्शकों के) से वैसा ही कुछ स्क्रीन पर दिखाई देता है.

पहले हिस्से में जब भूत दर्शकों को डराने की कोशिश कर रहा होता है तब तो वह तकरीबन असफल हो जाता है. और तो और दूसरे हिस्से में जब भूत फिल्म की हीरोइन के साथ-साथ बाकी पात्रों के सामने आ जाता है तब कई बार आपकी हंसी पूरे जोर से छूटती है. हां, पर कई बार डर भी लगता है, सच में! फिल्म में भूत से जुड़ी ज्यादातर चीजें स्टीरियोटाइप हैं. बस यहां पर भूत थोड़ा सांप्रदायिक हो गया है. पादरी के मंत्र पढ़ने पर जहां उसकी पोल खोल उसे वहां से चलता कर देता है वहीं अपने धर्म का मंगलसूत्र देखकर और मंत्र सुनकर तुरंत ही काबू में आने लगता है. इसके बाद आप राज़ सीरीज की बाकी फिल्मों और '1920', 'मर्डर' के कई दृश्यों के मिश्रण की कल्पना कर सकते हैं.

ट्रेलर में जहां इकलौता जाना पहचाना चेहरा होने के कारण इमरान हाशमी ध्यान खींच रहे थे. वहीं फिल्म में गौरव अरोरा उन पर भारी पड़े हैं. इमरान हाशमी की भूमिका न सिर्फ लंबाई के लिहाज से छोटी है बल्कि अभिनय के लिहाज से भी कमतर रह गई है. यहां तक कि अंतरंग दृश्यों (जिनके वे मास्टर माने जाते हैं!) में भी वे सहज नजर नहीं आ रहे हैं. गौरव अरोरा चेहरे पर डर और बेबसी पूरी गहराई से लाते नजर आए हैं. फिल्म में अच्छा अभिनय करने वाला एकमात्र चेहरा वही हैं. कृति खरबंदा के चेहरे पर पूरे समय एक जैसे ही भाव नजर आते हैं. मजेदार बात यह है कि भूत के प्रभाव में आने के बाद वे डरावनी लगने के बजाय एक सुन्दर भूत नजर आती हैं.

यहां पर भूत थोड़ा सांप्रदायिक टाइप का है. पादरी के मंत्र पढ़ने पर जहां उसकी पोल खोल उसे वहां से चलता कर देता है वहीं अपने धर्म का मंगलसूत्र देखकर और मंत्र सुनकर तुरंत ही काबू में आने लगता है

फिल्म का संगीत अच्छा है, गाने ठुंसे हुए से नहीं लगते. अगर आपने गाने पहले से सुन रखे हैं तो फिल्म देखते हुए आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अब कौन सा गाना बजेगा.

‘सीक्रेट्स आर एनिमी ऑफ़ लव (राज़ प्यार के दुश्मन होते हैं)’ - इस संवाद ने ट्रेलर में भी हमारा ध्यान खींचा था और यह फिल्म के पहले दृश्य में शामिल है. इसके बाद राज़-राज़-राज़ इतनी बार दोहराया गया है कि आपको यकीन हो जाता है कि आप कोई और हॉरर फिल्म नहीं बल्कि राज़ ही देखने आए हैं. वही राज़ जिसकी तीन किश्तें भट्ट कैंप पहले भी पेश कर चुका है. पिछली फिल्मों की तरह राज़ रीबूट भी यही संदेश देती है कि प्यार भूत से ज्यादा ताकतवर होता है.