‘गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्रियों का सम्मेलन नहीं है.’

— हामिद अंसारी, उपराष्ट्रपति

हामिद अंसारी ने यह बात 17वें गुट निरपेक्ष शिखर सम्मेलन में भारतीय पीएम के शामिल न होने के सवाल पर कही. उनसे पूछा गया था कि इससे भारत किस तरह का संदेश दे रहा है. इस पर अंसारी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री हिस्सा लेते रहे हैं. वे कुछ वजहों से नहीं आ सके. लेकिन, भारत हिस्सा ले रहा है.’ वेनेजुएला के मार्गरीटा द्वीप पर चल रहे इस सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति में कोई बदलाव नहीं आया है. 1961 में शीत युद्ध की गुटबाजी से बचने के लिए भारत की अगुआई में गुट-निरपेक्ष आंदोलन की नींव पड़ी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले सिर्फ चौधरी चरण सिंह इसके सम्मेलन में शामिल नहीं हुए थे.

‘मुझे केवल अपने चुनावी वादे पूरा न कर पाने का अफसोस है.’ 

— अमिताभ बच्चन, अभिनेता,

अमिताभ बच्चन ने यह बात अपने राजनीति करियर से जुड़े सवाल पर कही. उन्होंने कहा, ‘चुनाव के दौरान इलाहाबाद शहर और यहां के लोगों से मैंने बहुत से वादे किए थे, लेकिन मैं उन्हें पूरा नहीं कर पाया.’ उन्होंने अपने राजनीति में जाने को भावुकतावश लिया गया फैसला बताया. अमिताभ बच्चन ने कहा कि राजनीति में जाने पर उन्हें महसूस हुआ कि वहां भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं है और इसके बाद उन्होंने राजनीति छोड़ दी. गांधी परिवार से रिश्तों को लेकर उन्होंने कहा, ‘दोस्ती पूरी तरह नहीं खत्म हुई है. हम आज भी दोस्त हैं.’ अमिताभ बच्चन ने राजीव गांधी के कहने पर 1984 में इलाहाबाद से लोकसभा का चुनाव लड़ा था. वे बड़े अंतर से जीते थे, लेकिन, उन्होंने तीन साल बाद ही इस्तीफा दे दिया था.


‘मेरे रहने तक समाजवादी पार्टी में दरार नहीं पड़ सकती.’

— मुलायम सिंह यादव, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष

मुलायम सिंह का यह बयान समाजवादी पार्टी में जारी अंदरूनी संघर्ष पर आया. उन्होंने कहा कि सपा एक बड़ा परिवार है, यहां किसी तरह का टकराव नहीं है. मुलायम ने मुख्यमंत्री अखिलेश के साथ मतभेद को बाप-बेटे के बीच होने वाला आम विषय बताया. उन्होंने कहा कि अखिलेश उनकी बात नहीं टाल सकते और उन्होंने अखिलेश को अपने चाचा शिवपाल के साथ विवाद दूर करने के लिए कहा है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा शिवपाल के करीबी मंत्रियों और मुख्य सचिव को हटाने के बाद यह विवाद उभरा था. गुरुवार को शिवपाल के इस्तीफे के साथ विवाद गहरा गया था.


‘अच्छा या बुरा आतंकवाद नहीं होता. यह सांप की तरह डसता है.’

— अशरफ गनी, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति

अशरफ गनी का यह बयान आतंकवाद पर पाकिस्तान की दोहरी नीति को लेकर आया. नई दिल्ली में ‘फिफ्थ वेव ऑफ पॉलिटिकल वायलेंस एंड ग्लोबल टेरेरिज्म’ पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद खत्म नहीं हो रहा है, बल्कि तेजी से अपना स्वरूप बदल रहा है. उन्होंने अफगानिस्तान में हालिया आतंकी वारदातों में शामिल तालिबान की मदद करने के लिए पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा. इस्लाम के नाम पर आतंकवाद अस्वीकार्य बताते हुए गनी ने कहा, ‘पाकिस्तान में युद्ध जैसी स्थिति है. यह बात मीडिया में नहीं आती है. खैबर पख्तूनवाह और बलूचिस्तान में 20,7000 पाकिस्तानी जवान तैनात हैं.’ आतंकवाद पर पाकिस्तान की दोहरी नीति को लेकर कई अन्य देश भी सवाल उठा चुके हैं.