कॉल्स, मेसेज और ढेर सारे एप्स के ढेर सारे नोटिफिकेशन्स के साथ हमारा स्मार्टफोन दिनभर हमारी स्मार्टनेस बढ़ाने की कोशिश में लगा होता है. दिन ख़त्म होने पर जब हम घर लौटते हैं तो हमें आराम की और फोन को चार्जिंग की जरूरत होती है. ऐसे में अक्सर यूं होता है कि ज्यादातर लोग रात को सोने से पहले फोन चार्जिंग पर लगा देते हैं और सुबह फुल चार्ज बैटरी पाकर खुश होते हैं. पर उनकी खुशी यह तथ्य जानकर काफूर हो सकती है कि एक निश्चित समय बाद पूरी चार्ज हो चुकी बैटरी की चार्जिंग जारी रखकर वे उसकी उम्र कम कर रहे होते हैं.

हममें से ज्यादातर लोग स्मार्टफोन की उम्र दो साल ज्यादा नहीं समझते. रोज लॉन्च हो रहे नए मोबाइल्स की रेंज किसी को भी इतना आकर्षित कर सकती है कि पिछले फोन में समस्या आए बगैर लोग नए फोन का शौक पाल लेते हैं. लेकिन जिन्हें सालों-साल अपना फोन चलाना है, वह भी बैटरी की समस्या के बगैर तो उन्हें रातभर फोन चार्जिंग में लगाने से बचना चाहिए.

चार्जिंग का सामान्य नियम कहता है कि असली या किसी अच्छे ब्रांड के चार्जर से फोन को चार्ज करने पर उसे कोई भी नुकसान होने की आशंका कम होती है. लेकिन जरूरत से ज्यादा चार्ज करने की प्रक्रिया अपने आप में बुरी है. यह भी सच है कि ज्यादातर फोन इस तकनीक से बनाए जाते हैं कि उनकी बैटरी जल्दी से जल्दी और ज्यादा से ज्यादा करंट संग्रह कर सके. ऐसे में रातभर फोन चार्ज करने की जरूरत नहीं रह जाती.

आजकल मोबाइल फोन में लिथियम-आयन बैटरी होती है. इनसे पहले मोबाइलों में निकिल-कैडमियम बैटरी का इस्तेमाल किया जाता था. इस तरह की बैटरी को चार्जिंग पर लगाने के पहले उसके पूरी तरह ख़त्म यानी डिस्चार्ज होने का इंतज़ार करना पड़ता था जबकि लिथियम-आयन बैटरी के साथ इसका ठीक उल्टा करना होता है. लीथियम-आयन बैटरी अगर 50 से 80 प्रतिशत तक चार्ज कर रखी जाए तो सबसे बेहतर है और ऐसे में बैटरी लम्बे समय तक फोन का साथ निभाती है.

ज्यादातर विशेषज्ञ लिथियम-आयन बैटरी को पूरी तरह डिस्चार्ज होने के पहले चार्ज करने की सलाह देते हैं. इस तरह की बैटरी में लीथियम पॉलीमर के 0 से 100 प्रतिशत तक चार्ज या आवेशित होने की एक निश्चित गिनती होती है. यानी कि अगर फोन की बैटरी के जीरो से फुल चार्ज होने की प्रक्रिया को एक चक्कर माना जाय तो बैटरी के साथ ऐसे कुछ सीमित चक्कर ही दोहराए जा सकते हैं. यह बैटरी की उम्र कही जा सकती है. लीथियम-आयन बैटरी के साथ रातभर चार्जिंग अपेक्षाकृत सुरक्षित होने के बावजूद हर रात फोन चार्ज करने पर यह प्रक्रिया रोज-रोज होगी और फोन को जल्दी ही नई बैटरी की जरूरत पड़ जाएगी.

वायरलेस चार्जिंग कंपनी ओशिया के सीईओ और वैज्ञानिक हाटम जीन का कहना है कि टेक्नोलॉजी की मदद से ज्यादातर फोन चार्जिंग की मात्रा को नियंत्रित करने में सक्षम होते हैं. आजकल ज्यादातर एंड्रॉइड और आईफोन्स को सुरक्षित रखने के लिए उनमें एक विशेष चिप भी लगाई जाती है. इस चिप का काम एक बार फोन के पूरी तरह से चार्ज होने के बाद, जरूरत से ज्यादा करंट एब्जॉर्बिंग को रोकना होता है. लेकिन यह प्रक्रिया भी लीथियम-आयन (और लीथियम पॉलीमर) को ज्यादा तेजी से खर्च या खराब करता है. ज्यादा चार्जिंग से फोन गर्म हो जाता है. एप्पल की वेबसाइट के अनुसार 95 डिग्री फ़ॉरेनहाइट या 35 डिग्री सेल्सियस डिग्री का तापमान बैटरी की क्षमता को पूरी तरह ख़त्म करने के लिए काफी है.

अगर आप अपने फोन की बैटरी को बचाना चाहते हैं तो फोन को गर्म होने से भी बचाना चाहिए. चार्जिंग के समय बैटरी के गर्म होने से लीथियम-आयन तेजी से एक्साइट होते हैं और तेजी से उनकी ऊर्जा भी खत्म होती है. इसीलिए ऐसा होने पर फोन जितनी जल्दी चार्ज होता है उतनी ही जल्दी डाउन भी हो जाता है. कुछ जानकारों के अनुसार फोन को एक ऐसी सतह पर रखकर, जहां उसके गर्म होने की स्थिति में उसकी सारी ऊष्मा बाहर निकल सकती हो, रातभर चार्ज किया जा सकता है. लेकिन ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि फोन को रातभर चार्ज करना अगर खतरनाक नहीं भी है तो भी सही नहीं है. बैटरी सालों साल चले इसके लिए फोन को उसके असली या किसी ब्रांडेड चार्जर से 50 और 80 प्रतिशत के बीच चार्ज करके रखा जाना चाहिए.