सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले ज्यादातर लोग भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी से जुड़ा वह किस्सा जानते ही होंगे जब फेसबुक ने एक दूसरे अकाउंट के खिलाफ उनकी शिकायत के बाद उनका ही फेसबुक पेज बैन कर दिया था. इस बात में कोई दोराय नहीं है कि स्वामी आज भारतीय राजनीति की सबसे अलहदा और दिलचस्प शख्सियत हैं. कभी-कभार बेहद तार्किक तो ज्यादातर अजब-गजब दावों और विवादों के लिए उन्हें पहचाना जाता है. यह पहचान सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता से भी साफ जाहिर होती है. जैसे एक बार उनके आधिकारिक फेसबुक पेज से ताजमहल के हिंदू मंदिर - तेजोमहालय - होने का दावा ठोका गया तो एक बार मोनालिसा को भारतीय वेशभूषा पहनाकर उसे भारतीय भी बताया गया.

इस तरह की पोस्ट के चलते स्वामी सोशल मीडिया के एक तबके विशेष में काफी लोकप्रिय हैं. वहीं सोशल मीडिया पर इन तुक-बेतुक की बातों से खीजने वालों की तादाद भी कम नहीं है. लेकिन सब यह जानते ही हैं कि ऐसी बातों पर भी स्वामी से बहस करना कोई हंसी-खेल नहीं है. शायद यही वजह होगी कि कुछ लोगों ने उनकी बातों का जवाब देने के लिए उन्हीं के अंदाज को जरिया बनाया और उन्हीं के पेज की तरह एक और फेसबुक पेज ‘अनऑफिशियल- सुब्रमण्यम स्वामी’ बना लिया.

शुरुआत में यह पेज भी हर देसी-विदेशी चीज पर भारतीय दावा जताने के अजब-गजब तर्क ढूढ़ लेता था. फिर इसने भाजपा की नीतियों पर बेहद तंज भरी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कीं. इसके बाद इस पेज पर भाजपा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं पर तीखी टिप्पणियां भी आने लगीं. यही वजह रही कि स्वामी की तरफ से इस पेज की शिकायत की गई. इस पूरे प्रकरण का सबसे दिलचस्प पहलू यह था कि इस पेज के बजाय फेसबुक ने उनके असली पेज को बैन कर दिया था. इस गफलत की एक वजह शायद यह भी रही होगी कि अनऑफिशियल- सुब्रमण्यम स्वामी की बातें फेसबुक प्रबंधन को ज्यादा तार्किक और असली लगी हों.

अनऑफिशियल- सुब्रमण्यम स्वामी फेसबुक पर इकलौता ऐसा पैरोडी पेज है जो असली पेज - सुब्रमण्यम स्वामी - से ज्यादा फॉलोअर्स रखता है. सुब्रमण्यम स्वामी के पैरोडी पेज पर फॉलोअर्स की संख्या जहां सात अंकों में यानी लगभग 12 लाख 74 हजार है वहीं असली स्वामी को सिर्फ तीन लाख 15 हजार लोग फॉलो करते हैं.

फेसबुक किसी को भी आधिकारिक तौर पर पैरोडी अकाउंट बनाने की इजाजत नहीं देता. ऐसे अकाउंट्स फेसबुक की भाषा में फेक (नकली) अकाउंट्स कहे जाते हैं. इन्हें शिकायत मिलते ही तुरंत प्रतिबंधित कर दिया जाता है. इनके बजाय फेसबुक फैन्स और फॉलोअर्स को फैन पेज बनाने देता है. अनऑफिशियल- सुब्रमण्यम स्वामी भी आधिकारिक तौर पर ऐसा ही पेज है.

ट्विटर की नीति इस मामले में थोड़ी अलग है इसलिए यहां पर आपको ढेरों पैरोडी अकाउंट्स मिल जाएंगे. इनमें से कुछ आज इस लिस्टिकल का हिस्सा हैं. अच्छे मनोरंजन और कुछ मुद्दों-विवादों के अलग पहलू समझने के लिए इन्हें फॉलो किया जा सकता है.

रोफल गांधी | @RoflGandhi_

गीतकार और स्टैंडअप कॉमेडियन वरुण ग्रोवर ने एक बार अपनी एक स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान कहा था कि राहुल गांधी और जोक्स एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं, अगर किसी सोते हुए आदमी के कान में जाकर कह दो –राहुल गांधी, तो वो हंस पड़ेगा. सोशल मीडिया में राहुल गांधी पर हजारों-लाखों नहीं, करोड़ों जोक्स बन चुके हैं और यह सिलसिला आज भी जारी है. राहुल गांधी भारतीय राजनीति की इकलौती ऐसी शख्सियत हैं जो मनोरंजन जगत के लिए लगातार कच्चा माल उपलब्ध करवाती रहती है. इस बात की बानगी उनका पैरोडी ट्विटर अकाउंट भी पेश करता है.

अव्वल तो इसका नाम ही बहुत मजेदार है क्योंकि यहां पर राहुल गांधी को कर दिया गया है रोफल गांधी. रोफल (ROFL) यानी रोलिंग ऑन फ्लोर विथ लाफ (हंसते-हंसते लोट-पोट हो जाना), यह नाम उन पर बिलकुल सटीक बैठता है. रोफल गांधी एक ऐसा अकाउंट है जो ट्विटर इंडिया पर राज करता है. कई बार सोशल मीडिया पर ट्रेंड इस बात से भी निर्धारित होते हैं कि रोफल गांधी ने किस बात पर अपनी टिप्पणी दी है. देश में कौन सी मसालेदार खबर चर्चा में है यह देखने के लिए भी लोग रोफल गांधी को फॉलो करते हैं. राहुल गांधी को जहां लगभग नौ लाख लोग फॉलो करते हैं वहीं रोफल गांधी के ट्विटर फॉलोअर्स की संख्या उसका दस प्रतिशत यानी लगभग 91 हजार है.

अगर राहुल गांधी का मतलब जोक होता है तो रोफल गांधी का मतलब कटाक्ष है. सर्जनात्मकता के साथ मारक टिप्पणियां इस अकाउंट की सबसे खास बात हैं. जैसे पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान रोफल गांधी ने अपने परिचय में लिखा था कि ‘दलित के घर का दलिया मुझे मम्मी की हाथ की मैकरोनी से ज्यादा अच्छा लगता है.’ यह एक लाइन सोशल मीडिया पर इतनी लोकप्रिय हुई थी कि अब भी कभी-कभार व्हाट्सएप पर फॉरवर्ड मेसेज में मिल जाती है. फिलहाल कई राजनेताओं के सामान्य ज्ञान पर तंज करते हुए आजकल रोफल गांधी अपना परिचय इन शब्दों में देते हैं- ‘यूनेस्को द्वारा प्रशंसित नॉवेलिस्ट.’

ट्रेंडुलकर | @Trendulkar

सोशल मीडिया पर भी ट्रेंडुलकर और तेंदुलकर में कोई तुलना नहीं हो सकती फिर भी अगर सचिन तेंदुलकर को सवा करोड़ लोग फॉलो करते हैं तो ट्रेंडुलकर के जुबानी छक्कों को लगभग सवा लाख लोग पसंद करते हैं. ट्रेंडुलकर ट्विटर पर कुछ ऐसे अकाउंट्स में से है जिनके ट्वीट सबसे ज्यादा वायरल होते हैं. ट्रेंडुलकर के फॉलोअर्स फेसबुक और इन्स्टाग्राम पर भी उन्हें उसी शिद्दत से फॉलो करते हैं. वैसे इस ट्रेंडुलकर का असली नाम अपूर्व सूद है. अपूर्व पहले मर्चेंट नेवी के साथ काम करते थे अब एक ई-कॉमर्स कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर हैं. ट्रेंडुलकर की लोकप्रियता का आलम यह है कि हर तरह के सवाल-जवाबों की वेबसाइट क्योरा डॉट कॉम पर ट्रेंडुलकर के पांच सबसे ज्यादा वायरल हुए ट्वीट भी मिल जाएंगे.

अपूर्व सूद ने यह अकाउंट 2011 में क्रिकेट विश्वकप के दौरान बनाया था. ट्रेंडुलकर के ट्वीट ऐसे होते हैं कि उनके कई फॉलोअर्स को आज भी उनका पहला ट्वीट याद है. ट्रेंडुलकर पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ियों और फैन्स पर टिप्पणी कर न सिर्फ भारत में बल्कि पाकिस्तान में भी चर्चा का विषय बन गए थे. पहले ट्वीट से लेकर अब तक लगातार तिलमिला देने वाली टिप्पणियां करने का क्रम अब भी जारी है. रोफल गांधी की तरह की तरह ट्रेंडुलकर भी ट्रेंड सेटर है.

ट्रेंडुलकर के लोकप्रिय होने के पीछे का एक कारण यह भी है कि वे अलग तरह के राष्ट्रवादी हैं. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर कथित राष्ट्रवादियों की बाढ़ आ गई है. इनमें से ज्यादातर बिना सिर-पैर की बातें करते नजर आते हैं या अधिक से अधिक राहुल और सोनिया गांधी पर जोक बना लेते हैं. ट्रेंडुलकर उन कुछ गिने-चुने राष्ट्रवादियों में शामिल हैं जो तार्किक हैं. पाकिस्तान को मुफ्त की गालियां देने और बेजा मोदी समर्थन करने के बजाय वे स्तरीय कटाक्ष करते नजर आते हैं. ऐसा ही एक ट्वीट उन्होंने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के दिन किया था, '14 अगस्त 1947 : पाकिस्तान को आर्थिक स्थायित्व, 24 घंटे बिजली, शिक्षा, नौकरियों और भारत के खिलाफ विश्वकप में जीत, से आजादी मिली थी.'

बाबू भईया | @Babu_Bhaiyaa

अभिनेता परेश रावल इस समय पूर्वी अहमदाबाद (गुजरात) से भाजपा सांसद हैं. लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने अपने एक भाषण में कहा था कि वे अहमदाबाद यह पक्का करने आए हैं कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनें. उनके इस कथन ने उन्हें पहली बार सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग टॉपिक बनाया था. जैसे अभिनेता परेश रावल की कॉमिक टाइमिंग का जवाब नहीं है वैसे उनके पैरोडी अकाउंट का भी जवाब मिलना मुश्किल है. बाबू भइया (@Babu_Bhaiyaa) ट्विटर हैंडल के साथ यह अकाउंट लगभग परेश रावल के बराबर ही फॉलोअर्स की गिनती रखता है.

फिल्म हेराफेरी का यह पात्र बाबू भइया अपने आप में पागलपन से भरा देसी आदमी है जो गुस्से में लोटा फेंककर मार सकता है. ट्विटर पर बाबू भइया के वनलाइनर्स भी कुछ ऐसा ही माहौल पैदा करते नजर आते हैं. इस अकाउंट पर आने वाली पोस्ट वायरल हुए बगैर नहीं रह सकतीं. इस अकाउंट के अबाउट में खुद को ओरिजिनल डुप्लीकेट और फन-ऑफिशियल अकाउंट बताया गया है. कई बार ऐसा हुआ है कि पैरोडी परेश रावल के ट्वीट मीडिया में असली अभिनेता के नाम से छप चुके हैं. यह पैरोडी अकाउंट खुद को रावल का फैन बताता है. सबसे मजेदार बात है कि खुद परेश रावल भी इसके फैन हैं और इसे फॉलो करते हैं और पिछले दिनों इसकी जमकर तारीफ़ भी की है. बाबू भइया एक लाख 68 हजार फॉलोअर्स की गिनती के साथ परेश रावल से (1 लाख 77 हजार) थोड़े ही पीछे हैं.

नीचे दिया गया ट्वीट बाबू भइया के अकाउंट से उस समय आया जब दिल्ली सरकार के मंत्री संदीप कुमार का सेक्स सीडी प्रकरण चर्चा में था.

ओमर अब्दुल्ला | @abdullah_0mar

दिग्विजय सिंह या अखिलेश यादव पर जोक्स बनना या उनके पैरोडी अकाउंट बनना आम बात है लेकिन उमर अब्दुल्ला का अकाउंट बने यह अपने आप में विशेष है. भारतीय राजनीति पर उत्तर भारत या दिल्ली केन्द्रित होने के आरोप हैं, मुख्यधारा का मीडिया भी इसी हिस्से को वरीयता देता है. ट्विटर इस मामले में अलग है. यहां पर उमर अब्दुल्ला भी अरविंद केजरीवाल के बराबर लोकप्रिय हैं और उनका पैरोडी अकाउंट भी.

उमर अब्दुल्ला अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ट्विटर पर खासे सक्रिय थे. कश्मीर के मुद्दों से ज्यादा ध्यान उनका ट्विटर के मुद्दों पर रहता था जिसके लिए वे लगातार ट्रोलिंग के शिकार हुए हैं. यहां तक कि कई बार चिड़कर खुद का अकाउंट भी डीएक्टिवेट कर चुके हैं.

ओमर अब्दुल्ला, घोषित रूप से जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का अनऑफिशियल अकाउंट है जिसे करीब 30 हजार लोग फॉलो करते हैं. इस अकाउंट के बायो में लिखा गया है, 'मुझपर एक एहसान करना, मेरे बाप को कुछ मत बताना.’ यह अकाउंट ट्रोलिंग में सबसे आगे नजर आता है खासतौर पर उमर अब्दुल्ला का पीछा करते हुए. जैसा कि बायो और पोस्ट्स पढ़ने से पता चलता है कि असली उमर अब्दुल्ला के पास नकली ओमर अब्दुल्ला पसंद न करने की कई वजहे हैं और उन्होंने एक से ज्यादा बार इस अकाउंट को ब्लाक-अनब्लॉक किया है.

केजरीवाल ऑन हॉलीडेज | @TrollKejri

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस पैरोडी अकाउंट के लगभग 65 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं. यह अकाउंट अरविंद केजरीवाल के ऑफिशियल अकाउंट से भी पुराना है. शायद यह पहले किसी और नाम से इस्तेमाल किया जाता था और बाद में इसका नाम बदलकर इसे अरविंद केजरीवाल के पैरोडी अकाउंट की पहचान दे दी गई.

अरविन्द केजरीवाल सोशल मीडिया पर जिस तरह से सक्रिय रहते हैं अगर उनका पैरोडी अकाउंट न होता तो यह आश्चर्य की बात होती. ट्विटर पर अरविंद केजरीवाल सर्च करने पर इसी नाम और एक ही प्रोफाइल फोटो के साथ करीब बीस से ज्यादा प्रोफाइल्स सामने खुल जाते हैं. हालांकि इनमें ट्रोल केजरीवाल असल मायनों में अरविंद केजरीवाल का पैरोडी है क्योंकि बाकी पैरोडी एकाउंट्स पर जहां अलग-अलग मुद्दों की बात होती है वहीं इसपर लगातार अरविंद केजरीवाल निशाने पर रहते हैं.

आमतौर पर ऐसा होता है कि किसी भी बड़ी हस्ती के पैरोडी अकाउंट में ट्वीट्स की संख्या असली व्यक्ति से अधिक होती है. लेकिन अरविन्द केजरीवाल सोशल मीडिया के मामले में अनोखे हैं. उन्होंने अपने सबसे पॉपुलर पैरोडी अकाउंट से तीन गुने ज्यादा ट्वीट किये हैं. इस मामले में ट्रोल केजरीवाल असली केजरीवाल से पीछे जरूर है लेकिन अंदाजे-बयां में कहीं आगे. जैसे अभी नरेंद्र मोदी के जन्मदिन यानी 17 सितंबर को इस अकाउंट पर यह ट्वीट आया था, 'कृपया आज दोपहर तीन बजे जंतर-मंतर पर मोदी जी के खिलाफ धरने में शामिल हों क्योंकि उन्हें आम आदमी के साथ केक शेयर नहीं किया था.'