‘दोनों देशों के लिए युद्ध ठीक नहीं है. फिर भी ऐसा कुछ होता है तो मैं सीमा पर जाना चाहूंगा.’

— अन्ना हजारे, सामाजिक कार्यकर्ता

अन्ना हजारे ने यह बात उरी आतंकी हमले की निंदा करते हुए कही. अन्ना हजारे ने कहा कि दोनों देशों को पड़ोसी धर्म निभाना चाहिए और एक दूसरे के सुख-दुख में शामिल होना चाहिए. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा पाकिस्तानी कलाकारों को मिली धमकी पर उन्होंने कहा कि युद्ध और कला में अंतर है, इन्हें अलग-अलग रखना चाहिए लेकिन अगर कला का इस्तेमाल गलत काम में होता है तो इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है. अच्छे दिन के सवाल पर अन्ना हजारे ने कहा कि यह बात आप अच्छी तरह से जानते हैं. अन्ना हजारे आज मुंबई में अपनी बायोपिक ‘अन्ना’ का ट्रेलर रिलीज करने पहुंचे थे और ये बातें उन्होंने इसी मौके पर कहीं.

‘भारत सॉफ्टवेयर निर्यात करता है और पाकिस्तान आतंकवाद.’

— नरेंद्र मोदी, भारत के प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात केरल के कोझिकोड में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में कही. उन्होंने कहा कि हम भारतीय सैनिकों के बलिदान को बेकार नहीं जाने देंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत न तो आतंकवाद के सामने झुका है और न कभी झुकेगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हुक्मरान कश्मीर की बात करके अपनी जनता को गुमराह कर रहे हैं. प्रधानमंत्री के अनुसार भारत अतंरराष्ट्रीय फलक पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने में सफल है और पूरी तरह से अलग-थलग करने के लिए प्रयास तेज किए जाएंगे.


‘मुलायम सिंह यादव यूपी में शेर हैं.’

— अमर सिंह, सपा महासचिव

अमर सिंह ने यह बात यूपी चुनाव में लालू या नीतीश कुमार की भूमिका को लेकर कही. उन्होंने कहा कि यह लालू प्रसाद की महानता है कि उन्होंने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बना दिया. सपा नेता ने कहा कि नीतीश कुमार अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए पूरी तरह से लालू के समर्थन पर निर्भर है. उन्होंने कहा कि अगले चुनाव में नीतीश कुमार अगर मुलायम सिंह के विरोध में जाते हैं तो लालू उनका समर्थन नहीं करेंगे. अमर सिंह को इसी हफ्ते सपा का महासचिव बनाया गया है हालांकि, बीते दिनों सपा में चली उठा-पटक के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इशारों-इशारों में इसके लिए अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराया था.


‘सीरिया में सभी पक्षों के भागीदार होने पर ही संघर्ष विराम हो सकता है.’

— सर्गेई लावरोव, रूस के विदेश मंत्री

सर्गेई लावरोव ने यह बात सीरिया में संघर्ष विराम घोषित करने के मामले में कही. उन्होंने कहा कि यह केवल सामूहिक आधार पर ही संभव है, अकेले रूस के कहने से कुछ नहीं होगा. 20 सितंबर को मदद ले जा रहे काफिले पर हमले के बाद रूस और अमेरिका की मध्यस्थता से घोषित संघर्ष विराम खत्म हो गया है. लावरोव ने इस घटना की जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि सीरिया सरकार या रूस ने यह हमला नहीं किया था. रूस सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद का, जबकि अमेरिका विद्रोही गुटों का समर्थक है.