उरी आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव बनाना शुरू कर दिया है. प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को पाकिस्तान के साथ हुए सिंधु जल संधि की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा ‘एक ही समय में खून और पानी साथ नहीं बह सकते’. इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, विदेश सचिव एस जयशंकर, जल संसाधन सचिव शशि शेखर और प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी मौजूद थे. मोदी सरकार के इस कदम को पाकिस्तान पर दवाब बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

बैठक में लिए गए निर्णय

सूत्रों के मुताबिक बैठक में सिंधु जल समझौते को रद्द करने का फैसला तो नहीं हुआ है लेकिन, आक्रामक रुख़ अपनाते हुए पाकिस्तान को जाने वाली छह में से तीन नदियों के पानी का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना बनाई गई है. इसके अलावा साल 2007 में निरस्त तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट की समीक्षा की भी बात कही गई है. पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में झेलम नदी पर बनने वाले इस बांध पर आपत्ति जताई थी. पाकिस्तान के मुताबिक यह प्रोजेक्ट सिंधु जल समझौते का उल्लंघन है.

जम्मू कश्मीर सरकार का समर्थन

जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री और भाजपा नेता निर्मल सिंह ने पिछले हफ्ते इस संधि पर केंद्र सरकार द्वारा किए गए फैसले को समर्थन देने की बात कही थी. उनके मुताबिक इस संधि के कारण राज्य को काफी नुकसान हुआ है. निर्मल सिंह के मुताबिक समझौते के चलते राज्य खेती या अन्य जरूरतों के लिए इन नदियों, खासकर चिनाब नदी के पानी का इस्तेमाल नहीं कर पाता है.

सुप्रीम कोर्ट में सिंधु जल संधि पर याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने सिंधु जल समझौते को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग संबंधी एक याचिका को खारिज कर दिया है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मामले की सुनवाई तत्काल किए जाने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने याचिकाकर्ता को मामले से राजनीति को अलग रखने के लिए कहा. इसके अलावा कोर्ट ने साफ किया कि मामले में ऐसा कुछ नहीं है कि अदालत इसकी तत्काल सुनवाई करे.

सिंधु जल समझौता

भारत- पाकिस्तान के बीच सितंबर 1960 में सिंधु जल समझौते पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के तहत सिंधु, व्यास, रावी, चिनाब, सतलज और झेलम के पानी का बंटवारा तय किया गया. समझौते के मुताबिक सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी पर पाकिस्तान को अधिकार दिया गया और बाकी तीन पर भारत को. सिंधु नदी के मामले में भारत सिर्फ 20 फीसदी पानी का इस्तेमाल कर सकता है. भारत में कई बार इस समझौते की समीक्षा किए जाने की मांग की गई है लेकिन, 1960 के बाद आपस में तीन बड़े युद्ध (1965,1971 और 1999) लड़ चुके दोनों देशों ने संधि में अब तक कोई बदलाव नहीं किया है. पाकिस्तान की सिंचाई व्यवस्था एक बड़ी हद तक इन्हीं नदियों पर निर्भर है.