मुसलमानों को वोट बैंक की मंडी का माल न समझने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद केंद्र सरकार ने एक अहम पहल का ऐलान किया है. अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय मुसलमानों सहित सभी अल्पसंख्यकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गुरुवार से पूरे देश में सौ प्रगतिशील पंचायत आयोजित करने वाला है. मंत्रालय ने पंचायत की शुरूआत हरियाणा के मुस्लिम बहुल मेवात से करने की बात कही है. यह वही इलाका है जो हाल में बिरयानी में बीफ की जांच के चलते सुर्खियों में रहा था.

खबरों के मुताबिक प्रगतिशील पंचायत के जरिए अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनसे जुड़ी समस्याओं का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही करने का प्रयास किया जाएगा. पंचायत में अल्पसंख्यकों तक कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच की समीक्षा भी की जाएगी. केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी सहित मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के सभी पंचायतों में हिस्सा लेने की बात कही गई है. तीन महीने तक चलने वाली इस पहल का समापन दिल्ली में ‘अंत्योदय समागम’ के रूप में होगा. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी मौजूद रहने की बात कही गई है.

मुस्लिम विरोधी छवि खत्म करने की कोशिश

कांग्रेस ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है. उसका कहना है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए यह भाजपा की राजनीतिक कवायद है. अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करीब एक- तिहाई सीटों पर मुसलमानों की अहम भूमिका है. कई जानकारों की मानें तो मोदी सरकार का यह कदम अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा के बजाय अपनी पार्टी से जोड़ने की कोशिश ज्यादा है.