‘हम कलाकार हैं. हमें प्रेम और शांति की बात करनी चाहिए.’

— सैफ अली खान, अभिनेता

सैफ अली खान का यह बयान भारत में पाकिस्तानी कलाकारों के बहिष्कार की मांग पर आया. सीमाओं के दोनों तरफ सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री प्रतिभाओं के लिए खुली है. सैफ ने कहा कि कौन यहां काम करेगा या नहीं करेगा इसका फैसला सरकार पर छोड़ देना चाहिए. उरी आतंकी हमले के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने पाकिस्तानी कलाकारों को भारत छोड़ने की धमकी दी थी. इसके बाद अनुपम खेर ने भी कहा था कि भारत में काम करने वाले पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में हुए आतंकवादी हमले की निंदा करनी चाहिए.

‘जन्मदिन पर बधाई देने पहुंच जाना हमेशा काम नहीं आता है.’

— परवेज मुशर्रफ, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति

मुशर्रफ ने यह बात पिछले साल नवाज शरीफ को जन्मदिन की बधाई देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के अचानक लाहौर जाने पर कही. उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान को नेपाल या भूटान समझने की गलती नहीं करनी चाहिए. भारत पर पाकिस्तान को दबाने का आरोप लगाते हुए मुशर्रफ ने कहा कि भारत बड़ा मुल्क जरूर है लेकिन, उसका दिल छोटा है. उन्होंने भारत द्वारा सार्क शिखर सम्मेलन के बहिष्कार को दिखावा बताया. मंगलवार को भारत ने शिखर सम्मेलन में हिस्सा न लेने की घोषणा की थी. इसके बाद भूटान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान ने भी इसमें शामिल होने से इंकार कर दिया है. इससे यह सम्मेलन नहीं हो पाएगा. पाकिस्तान 19वें शिखर सम्मेलन का मेजबान देश है.


‘हम पाकिस्तान से हार कर अपने सैनिकों को दुखी नहीं करना चाहते.’

— पीआर श्रीजेश, राष्ट्रीय हॉकी टीम के कैप्टन

श्रीजेश का यह बयान अक्टूबर में होने जा रही एशियाई चैंपियंस ट्राफी में पाकिस्तान के साथ मुकाबले को लेकर आया. उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान का मैच सबसे ज्यादा रोमांचक होता है और उनकी टीम पाकिस्तान को हराने के लिए पूरी मेहनत करेगी. श्रीजेश ने कहा कि इस समय पाकिस्तान की हॉकी टीम अच्छा नहीं खेल रही है लेकिन, उनमें खेल में अचानक वापसी करने की अद्भुत क्षमता है. रियो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम अंतिम आठ में पहुंची थी, लेकिन पाकिस्तान की टीम क्वालीफाई नहीं कर सकी थी. एशियाई चैंपियनशिप से पहले इन दिनों भारतीय टीम नेशनल कैंप में ट्रेनिंग ले रही है.


 ‘राजीव गांधी की हत्या न हुई होती तो वे भी राव की तरह ही आर्थिक सुधारों को अपनाते.’

— पी. चिदंबरम, पूर्व वित्त मंत्री

चिदंबरम ने यह बात संजय बारू की किताब '1991: हाउ पीवी नरसिम्हा राव मेड हिस्ट्री' के विमोचन पर कही. उन्होंने कहा कि राजीव गांधी भी अर्थव्यवस्था में बदलाव चाहते थे. चिदंबरम ने कहा कि भले ही राव आर्थिक सुधारों को लागू करने के हीरो रहे हों, लेकिन उनके कुछ गलत फैसलों से 1992 में कांग्रेस को हारना पड़ा था. उनका इशारा बाबरी विध्वंस के समय लिए गए फैसलों की तरफ था. इससे पहले संजय बारू ने राजीव गांधी की आर्थिक नीति और चंद्रशेखर से समर्थन वापस लेने के फैसले को 1991 के आर्थिक संकट के लिए जिम्मेदार बताया था. बारू ने अपनी किताब में कहा है कि राव के साथ कांग्रेस का बर्ताव ठीक नहीं था.