2014 में यूक्रेन के इलाके में मार गिराए गए मलेशियाई यात्री विमान को लेकर यूक्रेन के दावे सही साबित हुए हैं. इस मामले की जांच कर रहे नीदरलैंड की केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा है कि उसके पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि इस मिसाइल को छोड़ने में इस्तेमाल किया गया लांचर रूस से लाया गया था. बुधवार को जांच एजेंसी के प्रमुख विल्बर्ट पौलिसेन ने मीडिया को बताया कि रूस समर्थक विद्रोहियों की बातचीत से यह पता लगा है कि इस हमले से पहले उन्होंने जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल तैनात करने की बातें कही थीं.

विल्बर्ट के अनुसार बातचीत से यह भी सामने आया है कि इस मिसाइल को पूर्वी यूक्रेन के विद्रोही नियंत्रित क्षेत्र से ही छोड़ा गया था. जांच अधिकारियों के मुताबिक उन्हें मिले अन्य सबूतों से यह पता लगा है कि यह हमला 9M38 मिसाइल से किया गया था और मिसाइल छोड़ने के लिए बक लॉन्चर रूस से लाया गया था. जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि हमले के बाद विद्रोहियों ने यह लॉन्चर रूस को लौटा भी दिया था.

17 जुलाई 2014 को एम्सटर्डम से कुआलालंपुर जा रहे मलेशियाई एयरलाइंस के एमएच17 विमान को यूक्रेन की सीमा के नजदीक मार गिराया गया था. इस हादसे में 283 यात्रियों और चालक दल के 15 सदस्यों सहित कुल 298 लोगों की मौत हो गई थी. पिछले साल यूक्रेन के जांचकर्ताओं ने भी कुछ फोन रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए दावा किया था कि इस विमान को रूस समर्थक विद्रोहियों ने यूक्रेन के अपने कब्जे वाले क्षेत्र से मार गिराया था. हालांकि, रूस और रूस समर्थक विद्रोही दोनों ही हमेशा से इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं. बीते सोमवार को भी रूसी सेना की ओर से कहा गया था कि मिसाइल के रेडियो-लोकेशन डेटा से पता लगा है कि इसे विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्र से नहीं छोड़ा गया था.