केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय विधि आयोग में की गई एक और नियुक्ति विवाद का सबब बनती दिख रही है. गुजरात दंगों के आरोपितों का बचाव करने वाले वकील अभय भारद्वाज को आयोग के अंशकालिक सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया है. कांग्रेस पार्टी ने इस नियुक्ति की तीखी आलोचना की है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2002 में अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में हुए दंगे के आरोपियों के केस में अभय बचाव पक्ष के वकील थे. दंगों के दौरान इस सोसायटी में 69 लोगों की हत्या कर दी गई थी. इनमें कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी भी शामिल थे. इन दंगों के दौरान किसी एक जगह पर मारे गए सबसे ज्यादा लोगों के लिहाज से यह (गुलबर्ग सोसायटी) दूसरा बड़ा मामला था. इस मामले में कुल 66 आरोपित थे. इनमें से 36 को बरी कर दिया गया था जबकि 24 को दोषी ठहराया गया था. इनमें से भी 11 को हत्या का दोषी माना गया.

वैसे, यह पहला मौका नहीं है, जब सरकार ने विधि आयोग में किसी विवादित व्यक्ति को नियुक्त किया हो. इससे पहले चंडीगढ़ से भाजपा (लोकसभा) सांसद रह चुके सत्यपाल जैन को भी जून में अंशकालिक सदस्य बनाया गया था. सत्यपाल 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी के वकील रह चुके हैं.

कांग्रेस ने इन नियुक्तियों पर सरकार को आड़े हाथ लिया है. पार्टी नेता और पूर्व केन्द्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है, ‘सरकार महत्वपूर्ण सार्वजनिक नियुक्तियों में अपनी विचारधारा के लोगों को प्राथमिकता दे रही है.’

केन्द्र सरकार ने अभय भारद्वाज के अलावा विधि आयोग में दो पूर्णकालिक सदस्य भी नियुक्त किए हैं. इनमें पूर्व विधि सचिव डॉक्टर संजय सिंह को आयोग का सदस्य सचिव बनाया गया है. जबकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के कानूनी सलाहकार डॉ. एस. शिवकुमार को पूर्णकालिक सदस्य. आयोग में इससे पहले सिर्फ एक पूर्णकालिक सदस्य थे-जस्टिस रवि त्रिपाठी. वे मई में गुजरात हाईकोर्ट से बतौर जज रिटायर हुए हैं.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बलबीर सिंह चौहान को इस साल मार्च में आयोग का अध्यक्ष बनाया था. आयोग का गठन पिछले साल सितंबर में हुआ था. इसका कार्यकाल अगस्त 2018 तक है. अब तक एक तिहाई कार्यकाल निकल जाने के बावजूद आयोग सरकार को एक भी सिफारिश नहीं दे सका है जबकि इसके पास सरकार और सुप्रीम कोर्ट की ओर से कानूनी मशविरे के लिए भेजे गए कई संदर्भ लंबित हैं. हालांकि आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, ‘रिक्त पद भर दिए जाने के बाद अब हम पूरी क्षमता से काम कर सकेंगे.’

विधि आयोग में अध्यक्ष के अलावा चार पूर्णकालिक सदस्य होते हैं. अंशकालिक सदस्य ज्यादा से ज्यादा पांच हो सकते हैं. केन्द्र सरकार द्वारा गठित यह 21वां विधि आयोग है. इससे पहले 20वें विधि आयोग ने सरकार को तीन साल के कार्यकाल में 19 सिफारिशें सौंपी थीं. इनमें भ्रष्टाचार और मौत की सजा से संबंधित कानूनी प्रावधानों में महत्वपूर्ण संशोधनों का सुझाव दिया गया था.