पारदर्शिता और राजनीतिक शुचिता की बात करने वाले अरविंद केजरीवाल की सरकार पर जनता के पैसे के दुरुपयोग का आरोप लग रहा है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक उपराज्यपाल नजीब जंग को सौंपी गई अपनी जांच रिपोर्ट में शुंगलू समिति ने कहा है कि आम आदमी पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए दिल्ली सरकार ने दिल्ली से बाहर जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल किया. इसके अलावा अरविंद केजरीवाल की निगरानी में भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का सवाल उठाया गया है.

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उपराज्यपाल को दिल्ली का शीर्ष प्रशासक बताने के फैसले के बाद नजीब जंग ने तीन सदस्यीय शुंगलू समिति बनाई थी. इसे दिल्ली सरकार के पिछले 18 महीने के फैसलों की समीक्षा का काम सौंपा गया था. इसी समिति ने उपराज्यपाल को रिपोर्ट सौंपी है जिसमें ये सब बातें कही गई हैं.

रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के सोशल मीडिया के विज्ञापनों पर सवाल उठाया गया है. समिति के अनुसार दिल्ली सरकार ने फेसबुक, यूट्यूब और गूगल पर विज्ञापन के लिए 1.58 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ऐसे विज्ञापन क्यों तैयार किए गए हैं, इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है. इसमें दिल्ली के नागिरकों का सार्वजनिक हित नहीं दिखाई देता क्योंकि इसके दर्शक दूसरे राज्यों जैसे गोवा, गुजरात और पंजाब के हैं, जहां अगले साल चुनाव होने वाले हैं.’

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने दिल्ली, गोवा, हिमाचल प्रदेश और गुजरात के 1.8 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचने के लिए फेसबुक के लिए 60 लाख रुपये की रकम आवंटित की. इसके साथ देश भर के दर्शकों तक पहुंच बनाने के लिए यूट्यूब के लिए 20 लाख रुपये का बजट बनाया गया. इसके अलावा गूगल और फेसबुक के गूगल डिस्प्ले नेटवर्क पर विज्ञापन के लिए 20-20 लाख रुपये आवंटित किए गए.

जांच रिपोर्ट में पीआर कंपनी 'परफेक्ट रिलेशनशिप' को कांट्रेक्ट देने से पहले खुली बोली आमंत्रित न करने का मामला भी उठाया गया है. इंडिया टुडे की मानें तो इस बारे में सीबीआई से एक निजी शिकायत भी की गई है जिस पर प्राथमिक जांच शुरू हो सकती है.

भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप

उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के ओएसडी डॉ. निकुंज अग्रवाल की नियुक्ति की भी जांच कराई जा रही है. डॉ. निकुंज अग्रवाल मुख्यमंत्री केजरीवाल के रिश्तेदार हैं. उन्हें चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में ऑर्थोपेडिक्स के पहले सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में नियुक्त किया गया था. उनकी नियुक्ति इसलिए सवालों के घेरे में है, क्योंकि जब उन्हें नियुक्त किया गया तो इस अस्पताल में कोई भी पद खाली ही नहीं था.

तीन सदस्यीय शुंगलू समिति की जांच रिपोर्ट के मसौदे में कहा गया है कि उनकी नियुक्ति करने से पहले विज्ञापन नहीं निकाला गया जो किसी भी नियुक्ति में अनिवार्य प्रक्रिया है. रिपोर्ट के अनुसार हाथ से लिखे प्रार्थना पत्र के आधार पर उन्हें नियुक्ति दी गई थी. इसके अलावा सरकारी खर्च पर उन्हें आईआईएम अहमदाबाद में वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए मैनेजमेंट डेवलेपमेंट कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गया. नियमों के अनुसार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर होने के नाते वे इसमें शामिल नहीं हो सकते थे.

कुछ समय पहले कैग की एक रिपोर्ट में भी आप सरकार की विज्ञापन नीति पर सवाल उठाए गए थे. रिपोर्ट में कहा गया था कि दिल्ली सरकार जनता के पैसे से आम आदमी पार्टी की छवि चमकाने की कोशिश कर रही है. इसके मुताबिक दिल्ली सरकार ने एक ही विज्ञापन अभियान पर खर्च किए गए कुल 33.4 करोड़ रुपए का 85 फीसदी हिस्सा दिल्ली से बाहर खर्च किया.