केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को फर्जी डिग्री विवाद में दिल्ली स्थित पटियाला कोर्ट से राहत मिली है. मंगलवार को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने इस मामले में उनको अदालत में तलब करने से इनकार करते हुए यह मामला खारिज कर दिया. उन पर अपनी शैक्षणिक योग्यताओं के संबंध में चुनाव आयोग को गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया था.

पर्याप्त सबूतों का अभाव

अदालत ने स्मृति ईरानी को समन नहीं भेजे जाने का कारण पर्याप्त सबूतों का अभाव बताया. अदालत ने यह भी कहा कि 11 साल बाद यह शिकायत ईरानी को परेशान करने के लिए की गई है क्योंकि वे केंद्रीय मंत्री हैं. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विश्वविद्यालय से ईरानी के दस्तावेजों की मांग की थी. इसके जवाब में विश्वविद्यालय ने कहा था कि वह दस्तावेज खोज रहा है.

शपथपत्रों में अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि साल 2004 और 2014 के चुनावों में आयोग को सौंपे गए शपथ पत्र में स्मृति ईरानी ने अपनी शैक्षणिक योग्यता अलग-अलग बताई है. शिकायत के मुताबिक 2004 के शपथपत्र में उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता दिल्ली विश्वविद्यालय से 1996 में बीए (स्नातक) दर्ज की थी. इसके बाद साल 2014 के आम चुनावों ने उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता दिल्ली विश्वविद्यालय से ही बीए पार्ट-1 बताई थी.