राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा नोबेल पुरस्कार की तर्ज पर दिए जाने वाले सम्मान के प्रस्ताव को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. संघ की सांस्कृतिक इकाई संस्कार भारती ने इस पुरस्कार का नाम नैमिष्य सम्मान रखा है. यह सम्मान शांति, मानवाधिकार, साहित्य, कला, विज्ञान और शिक्षा सहित 11 क्षेत्रों में प्रत्येक साल दिए जाने की बात कही गई है.

खबरों के मुताबिक नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आयोजित होने वाले संस्कृति महोत्सव में पहली बार इस सम्मान का ऐलान किया जा सकता है. बताया जा रहा है कि इस महोत्सव के लिए 220 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है जिनमें से 70 करोड़ सम्मान के लिए रखे गए हैं. प्रत्येक नोबेल पुरस्कार विजेता को करीब साढ़े छह करोड़ रुपए मिलते हैं.

पिछले कुछ समय से इस सम्मान की गाहे-बगाहे चर्चा हो रही थी. हाल ही में द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में एक संघ प्रचारक ने इस बारे में बात करते हुए कांग्रेस को निशाने पर लिया था. उनका कहना था, ‘राष्ट्रवादी विचार वाले काफी लोग हैं, जो रचनात्मकता और शिक्षा के क्षेत्र में काफी अच्छा काम कर रहे हैं. हालांकि, 60 वर्षों तक देश पर शासन करने वाली कांग्रेस ने राष्ट्रवाद को हाशिए पर धकेल दिया था. पिछले कुछ समय से देश में राष्ट्रवाद का माहौल पैदा हुआ है. इससे पूरे विश्व में भारतीय विचारों को ख्याति मिल रही है.’ उन्होंने इस सम्मान को भारतीय विचारों की समृद्धता का उत्सव मनाने का मंच कहा था.