समान नागरिक संहिता पर चल रही बहस के बीच मोदी सरकार का कहना है कि इसे सबके बीच सहमति बनने के बाद ही लाया जाएगा. बुधवार को केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने इस आरोप से इनकार किया कि भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की वजह से इस मुद्दे को हवा दे रही है. उन्होंने कहा कि पार्टी विकास के एजेंडे पर चुनाव लड़ेगी.

वेंकैया नायडू ने आगामी चुनाव में राजनीतिक फायदे के लिए तीन तलाक, समान नागरिक संहिता और राम मंदिर जैसे मुद्दों का इस्तेमाल नहीं करने का दावा भी किया. उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों को चुनावी लाभ के पैमाने से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने तीन तलाक को लैंगिक संवेदनशीलता का मुद्दा बताते हुए इसे धार्मिक मामला मानने से इनकार किया. नायडू ने इस आरोप को भी खारिज किया कि सरकार धार्मिक मुद्दों में दखल दे रही है. उनका कहना था, ‘भारतीय संसद द्वारा हिन्दू कोड बिल, तलाक कानून, दहेज रोकथाम कानून, सती प्रथा रोकथाम जैसे कानून पारित किए जा चुके हैं.’

तीन तलाक और समान नागरिक संहिता को लेकर कुछ समय से बहस गर्म है. हाल में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा था कि सरकार इन मुद्दों पर सबसे बात करेगी. विधि आयोग ने हाल ही में समान नागरिक संहिता के संबंध में एक प्रश्नावली जारी कर लोगों की प्रतिक्रिया भी मांगी है. मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक की प्रथा के खिलाफ हलफनामा भी दिया है. इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने बीते सोमवार को तीन तलाक के मुद्दे पर सार्वजनिक मंच से पहली बार कहा था कि मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उनकी सरकार की है. उधर, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) का कहना है कि सरकार धर्म के मामलों में गैरजरूरी दखल दे रही है.