भारत सरकार ने बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान खरीदने का मन बना लिया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक भारतीय रक्षा मंत्रालय ने विदेशी कंपनियों के सामने कम से कम 200 लड़ाकू विमान खरीदने का प्रस्ताव रखा है. हालांकि, इसमें मंत्रालय ने एक शर्त भी रखी है जिसके अनुसार इन कंपनियों को ये विमान भारत में ही किसी भारतीय पार्टनर के साथ बनाने होंगे. इसके अलावा रक्षा मंत्रालय ने कई कंपनियों को सिंगल इंजन लड़ाकू विमान के लिए भारत में प्रोडक्शन लाइन स्थापित करने के लिए भी आमंत्रित किया है. इन कंपनियों से पूछा गया है कि क्या वे तकनीक स्थानांतरण के साथ भारत में ही प्रोडक्शन लाइन स्थापित करने के लिए राज़ी हैं.

रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सरकार के इस प्रस्ताव पर विदेशी कंपनियों ने सकारात्मक रुख दिखाया है. अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने एफ-16 लड़ाकू विमानों के भारत में निर्माण की इच्छा जताई है. साथ ही उसका कहना है कि वह भारत से ही इन विमानों का निर्यात भी करना चाहती है. वहीं, स्वीडन की कंपनी साब ग्रुप ने भारत सरकार को अपने ग्राइपेन एयरक्राफ्ट के लिए प्रोडक्शन लाइन स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है.

सेना के एक अधिकारी के अनुसार इस समय वायु सेना में करीब 200 लड़ाकू विमानों की कमी है. इस मामले में वायु सेना की क्षमता चीन और पाकिस्तान की संयुक्त क्षमता के मुकाबले एक तिहाई है. इसीलिए वायुसेना जल्द से जल्द इस कमी को पूरा करना चाहती है. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ऐसा ही चाहते हैं, लेकिन वे इसके साथ चाहते हैं कि ये विमान भारत में ही किसी देसी कंपनी के साथ मिलकर बनाए जाएं, जिससे घरेलू एयरक्राफ्ट उद्योग को बढ़ावा मिले और महंगे आयात से भी सरकार को निजात मिल सके. जानकारों का कहना है कि अगर यह डील हो जाती है तो यह अब तक की सबसे बड़ी डील होगी जिसकी कीमत करीब एक लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है.