अखिलेश यादव बड़े ताम-झाम, झंडे-बैनर के साथ अपने मर्सिडीज़ रथ से निकले. अखिलेश की पत्नी डिंपल, तीनों बच्चे भी रथ पर सवार थे. लेकिन करीब पांच करोड़ के खर्चे से तैयार हाईटेक रथ एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर रूक गया. अखिलेश यादव बेहद नाराज़ हुए. डिंपल और बच्चों को वापस घर भेजना पड़ा और अखिलेश को बाकी यात्रा बिना रथ के अपनी एसयूवी में करनी पड़ी. इसके बाद मर्सिडीज़ कंपनी के इंजीनियरों को लखनऊ बुलाया गया.

कंपनी ने रथ की जांच की तो पता चला कि गलती ड्राइवर की थी. हैंडब्रेक बिना हटाए ही उसने करीब एक किलोमीटर तक रथ को चला दिया जिससे रथ की क्लच प्लेट खराब हो गई. दरअसल रथ तैयार होने के बाद मर्सिडीज़ ने कहा था कि रथ बेहद हाइटेक हैं इसलिए ड्राइवर भी ऐसा होना चाहिए जो सारी तकनीक समझता हो. इसने इसके लिए एक ड्राइवर देने की भी पेशकश की. लेकिन अखिलेश के पुराने ड्राइवर ने साहेब का रथ चलाने की जिद पकड़ ली. इसके बाद मर्सिडीज़ ने कहा कि वह ड्राइवर को ट्रेनिंग देगी. लेकिन इस पर भी खास ध्यान नहीं दिया गया. इसका अंजाम यह हुआ कि ड्राइवर को पता ही नहीं चला कि वह हैंडब्रेक लगाए हुए ही रथ को चला रहा है. अब रथ को ठीक किया जा रहा है और सुनी-सुनाई है कि इस बार रथ एक प्रशिक्षित ड्राइवर ही चलाएगा.

क्या अरुण जेटली, अमित शाह और क्या राहुल गांधी, अम्मा के दरबार में सारे धान एक पसेरी

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का इलाज़ देश का सबसे बड़ा सीक्रेट बन गया है. ऐसा पहली बार हुआ जब केंद्रीय मंत्रियों तक को उनकी बीमारी और इलाज़ के बारे में जानकारी नहीं दी गई. जयललिता का हालचाल जानने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह चेन्नई गए. अपोलो अस्पताल में उनकी मुलाकात डॉक्टरों से हुई. लेकिन उन्हें जयललिता को देखने तक की इजाजत नहीं दी गई. तमिलनाडु के राज्यपाल विद्यासागर राव उनकी तबियत के बारे में जानने पहुंचे थे. लेकिन उन्हें भी जया के आस-पास नहीं जाने दिया गया. उनकी मुलाकात भी अस्पताल के चेयरमैन से हुई और डॉक्टरों ने ही उन्हें ब्रीफ किया. राहुल गांधी भी जयललिता की हालत जानने चेन्नई गए थे. उन्हें उस मंजिल तक भी नहीं जाने दिया गया जहां मुख्यमंत्री भर्ती थीं. 22 सितंबर को जयललिता को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अब जाकर अच्छी खबर आई है. सुनी-सुनाई है कि वे अब स्वस्थ हैं. पता चला है कि उनकी सेहत में सुधार हुआ है. अब वे किसी इमरजेंसी सपोर्ट सिस्टम पर नहीं हैं. वे आस-पास के लोगों से बात भी करती हैं. जल्दी ही अस्पताल से उनकी छुट्टी हो सकती है.

मुलायम प्रशांत किशोर को पहचानते ही नहीं हैं और अखिलेश पहचानना चाहते नहीं?

पिछले दिनों दिल्ली में मुलायम सिंह के सरकारी बंगले पर एक ऐसी मुलाकात हुई जिसके बारे में पहले से मुलायम सिंह को भी नहीं पता था. एक दिन अमर सिंह अचानक प्रशांत किशोर को साथ लेकर वहां आ पहुंचे. आगे जो हुआ उसकी उम्मीद ना प्रशांत किशोर ने की होगी, ना अमर सिंह ने. सुनी सुनाई यह है कि मुलायम प्रशांत किशोर को पहचानते तक नहीं थे. उन्होंने पहले तो अमर सिंह से पूछ लिया कि ये कौन हैं? प्रशांत किशोर ने उन्हें अपने बारे में बताया कि वे किसी पार्टी के नेता नहीं बल्कि इलेक्शन मैनेजर हैं जो इस वक्त उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की चुनाव रणनीति बना रहे हैं.

इसके बाद मुलायम ने कहा कि मैंने सुना पहले आप जेडीयू के साथ थे. बिहार में जेडीयू का चुनाव देख रहे थे. प्रशांत ने बताया, वे जेडीयू के नेता नहीं हैं. पहले वे बिहार में जेडीयू का काम देख रहे थे अब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का देख रहे हैं और उसी सिलसिले में बात करने आए हैं.

मुलायम ने प्रशांत से कहा, अगर अलायंस के बारे में बात करने आए हैं तो अखिलेश से बात करनी होगी. इसके बाद अखिलेश यादव को फोन लगाया गया. मुलायम ने फोन पर अखिलेश यादव से कहा, प्रशांत किशोर आए हैं. कांग्रेस का काम देख रहे हैं. अलायंस करना चाहते हैं. बात कर लो. इस पर सुनी-सुनाई यह है कि अखिलेश ने यह कहते हुए प्रशांत किशोर से बात करने से इनकार कर दिया कि बात करनी ही है तो वे सोनिया या राहुल गांधी से करेंगे, प्रशांत किशोर से नहीं. इस वक्त उत्तर प्रदेश की रणनीति प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर बना रहे हैं. बताया जाता है कि प्रियंका गांधी के कहने पर ही प्रशांत किशोर मुलायम सिंह से मिलने गये थे.