कारोबारी और पूर्व राज्य सभा सांसद विजय माल्या के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने की खबर को आज सभी अखबारों ने मुख्य पृष्ठ पर जगह दी है. खबर के मुताबिक यह वारंट दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट से विदेशी मुद्रा नियमन कानून के उल्लंघन के मामले में जारी समन की तामील न होने पर जारी किया गया है. इसके अलावा केजी बेसिन में ओएनजीसी के ब्लॉक से गैस चोरी के मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसके विदेशी साझेदारों पर जुर्माना लगाए जाने की खबर भी अखबारों ने प्रमुखता से छापी है.

देश विरोधी गतिविधियों की वजह से 25 एनजीओ के लाइसेंस रद्द

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन ऐक्ट-2010 के तहत 25 गैर- सरकारी संगठन (एनजीओ) का फिर से रजिस्ट्रेशन करने से इनकार कर दिया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय ने यह कदम उनके देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की वजह से उठाया है. खबर के मुताबिक भारत में विदेशों से फंड हासिल करने वाले एनजीओ की संख्या 33,138 से घटकर अब करीब 20,000 रह गई है.

अखबार ने गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा है कि वैसे एनजीओ जो देश हित से जुड़े काम नहीं करते या विध्वंसकारी गतिविधियों में लिप्त हैं, उन्हें विदेश से फंड हासिल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. इससे पहले गुरुवार को खबर आई थी कि मंत्रालय ने समयसीमा के तहत रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं करने की वजह से 11 हजार से भी ज्यादा एनजीओ का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है.

लंबित आरटीआई आवेदनों की संख्या में 240 फीसदी तक बढ़ोतरी

द इकॉनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक पिछले दो वर्षों में सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट सहित 16 राज्यों के सूचना आयोग के पास लंबित आवेदनों की संख्या में 40 से 240 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. एक संगठन के अध्ययन के मुताबिक इन लंबित आवेदनों पर कार्रवाई पूरी करने में राज्यवार दो महीने से 30 साल तक का समय लग सकता है. अध्ययन के मुताबिक 16 राज्यों के सूचना आयोग के पास लंबित आवेदनों की संख्या 1,87,974 है.

असम राज्य सूचना आयोग के पास जनवरी, 2014 से जनवरी, 2016 के बीच आवेदनों की संख्या में 240 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इसके बाद पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 60 फीसदी से अधिक, केरल में 49 फीसदी और केंद्रीय सूचना आयोग के पास लंबित आवेदनों की संख्या में 43 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. लंबित आरटीआई आवेदनों के मामले में मेघालय राज्य सूचना आयोग की स्थिति अन्य राज्यों से बेहतर बताई गई है.

ओआरओपी योजना के लाभ से वंचित पूर्व सैनिकों को जल्द ही योजना का लाभ

वन रैंक वन पेंशन योजना से वंचित एक लाख पूर्व सैनिकों को जल्द ही इसका लाभ मिलने की बात कही गई है. हिन्दुस्तान की एक खबर के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि पूर्व सैनिकों के पास दस्तावेज नहीं होने के बावजूद इन्हें योजना का लाभ दिया जाए. मंत्रालय ने दस्तावेज संबंधी प्रक्रिया बाद में पूरी करने की बात कही है.

अखबार के मुताबिक ओआरओपी के तहत आने वाले 20.6 लाख पूर्व सैनिकों में से एक लाख को इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. इनमें से करीब 95 फीसदी सैनिकों के उम्र और सेवा संबंधी दस्तावेज नहीं मिले हैं. मंत्रालय ने सैनिकों के दस्तावेज नहीं मिलने की स्थिति में उनसे शपथपत्र लिए जाने की बात कही है. खबर के मुताबिक योजना के लाभ से वंचित करीब 96,000 सैनिकों के दस्तावेज मंत्रालय के पास भी नहीं हैं.

एनडीटीवी इंडिया पर प्रतिबंध के फैसले की मीडिया जगत में कड़ी निंदा

द एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन के लिए प्रतिबंध लगाने के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के फैसले की कड़ी निंदा की है. द इंडियन एक्सप्रेस ने इस खबर को मुख्य पृष्ठ पर जगह दी है. खबर के मुताबिक देश के संपादकों की शीर्ष संस्था ने सरकार की इस कार्रवाई को आपातकाल के दिनों की याद दिलाने वाला बताया है. इसके अलावा द न्यूज ब्रॉडकॉस्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) ने भी मंत्रालय के आदेश को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है.

अखबार के मुताबिक गिल्ड ने मंत्रालय के इस फैसले को अनोखा बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है. उनके मुताबिक एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन के लिए प्रतिबंध लगाने का फैसला मीडिया और देश के लोगों की आजादी का उल्लंघन है. केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालय समिति की सिफारिश के आधार पर नौ नवंबर को चैनल को ‘ऑफ एयर’ किए जाने का आदेश दिया है.

दिल्ली- एनसीआर में खतरनाक धुंध को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार को एनजीटी की फटकार

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली- एनसीआर में जारी धुंध को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एनजीटी के अध्यक्ष न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार ने मौजूदा हालात को आपात स्थिति करार दिया है. इसके अलावा एनजीटी ने दिल्ली सरकार को 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों पर रोक लगाने संबंधी अपना पहले का फैसले सख्ती से लागू करने के लिए कहा है. उन्होंने इस आदेश को सख्ती से लागू नहीं किए जाने पर नाराजगी जाहिर की.

एनजीटी ने राज्य सरकार से सभी संबंधित प्राधिकरणों को 10 साल पुराने डीजल वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए निर्देश जारी करने के लिए कहा है. इसके अलावा उन्होंने वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर तक पहुंचने को लेकर दिल्ली सहित इसके पड़ोसी राज्यों के सचिवों को भी तलब किया है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भी प्रदूषण रोकने के उपायों पर अमल नहीं होने की बात को स्वीकार किया.

हाइकोर्ट में पूर्व न्यायाधीशों की बहाली पर सरकार और न्यायपालिका के बीच सहमति

देश के 24 हाइकोर्टों में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने की दिशा में केंद्र सरकार और न्यायपालिका के बीच एक महत्वपूर्ण पहल पर सहमति बन गई है. इस पहल के तहत हाइकोर्ट में पूर्व न्यायाधीशों को बहाल किए जाने की बात कही गई है. दैनिक जागरण ने इस खबर को मुख्य पृष्ठ पर जगह दी है. खबर के मुताबिक केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के प्रस्ताव को मंजूरी दी है.

शीर्ष न्यायालय ने इस साल अप्रैल में केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था. इस प्रस्ताव में असामान्य स्थिति को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद 224 (ए) को लागू करने की बात कही गई थी. इस अनुच्छेद के तहत हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश किसी पूर्व न्यायाधीश को फिर से बहाल कर सकते हैं. भारतीय संविधान में इस अनुच्छेद को साल 1963 में 15वें संविधान संशोधन के जरिए जोड़ा गया था. उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के लिए स्वीकृत 1079 पदों में से 461 खाली हैं.