मोदी सरकार ने विवादों में घिरे इस्‍लामिक उपदेशक डॉ जाकिर नाईक को एक और बड़ा झटका दिया है. सरकार ने नाईक के शिक्षण कार्यों से जुड़े 'आईआरएफ एजुकेशनल ट्रस्ट' को 'पूर्व अनुमति श्रेणी' में डाल दिया है. इस फैसले के बाद अब यह ट्रस्ट गृह मंत्रालय की अनुमति के बिना विदेशों से धन नहीं ले पाएगा.

शनिवार को गृह मंत्रालय की ओर से एक गजट अधिसूचना जारी की गई. इस अधिसूचना के अनुसार आईआरएफ एजुकेशनल ट्रस्ट ने विदेशी योगदान नियमन कानून (एफसीआरए) के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन किया है. अधिसूचना में कहा गया है कि प्रावधानों के उल्लंघन की वजह से इस ट्रस्ट को एफसीआरए क़ानून 2010 की धाराओं के तहत पूर्व अनुमति श्रेणी में डाला जाता है और अब से ट्रस्ट को हर बार विदेशी योगदान लेने से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी.

वहीं, मंत्रालय से जुड़े आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों हुईं विभिन्न जांचों में पाया गया कि नाईक की इस संस्था को मिले धन का इस्तेमाल युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए प्रेरित करने में किया गया था. इनके मुताबिक सरकार ने ये जांच रिपोर्टों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया है.

बीते एक जुलाई को ढाका में हुए आतंकी हमले के बाद बांग्लादेश ने दावा किया था कि इस हमले को अंजाम देने वाले आतंकवादी जाकिर नाईक से प्रेरित थे. बांग्लादेश के इस दावे के बाद भारत सरकार ने नाईक के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे.