वीजा नियमों में ढील की आस लगाए भारतीय पेशेवरों को भारत दौरे पर आईं ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने बड़ा झटका दिया है. थेरेसा मे ने भारतीयों को वीज़ा देने में किसी तरह की और राहत देने से साफ इनकार कर दिया है.

ब्रिटेन के समाचार पत्र द गार्जियन के मुताबिक थेरेसा ने भारत यात्रा पर जाते समय कहा कि ब्रिटेन पहले से ही यूरोपीय संघ से बाहर के अच्छे लोगों को अपने यहां आकर्षित करने में सक्षम है. उनका कहना था, 'अगर आंकड़ों को देखा जाए तो हम ने अमेरिका, चीन और ऑस्ट्रेलिया तीनों को दिए गए कुल वर्किंग वीजा से ज्यादा वीजा भारत को दिए हैं. हम भारत से मिलने वाले 10 वीज़ा आवेदनों में से 9 को स्वीकार करते हैं.' थेरेसा ने आगे कहा कि ब्रिटेन में वीज़ा देने का मौजूदा सिस्टम पूरी तरह दुरुस्त है और भारत इस वीजा प्रणाली को स्वीकार कर चुका है. सोमवार को भारत पहुंचने के बाद थेरेसा मे ने यह भी कहा कि वीजा नियमों में किसी तरह की ढील देना इस बात पर निर्भर करेगा कि गैरकानूनी ढंग से ब्रिटेन में मौजूद भारतीय कितनी बड़ी संख्या में भारत वापस आते हैं.

हालांकि, द गार्जियन से बातचीत के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने भारतीय उद्द्योगपतियों का ब्रिटेन में दिल खोलकर स्वागत करने की बात कही है. उनका कहना था कि वे यूरोपीय संघ छोड़ने के बाद ब्रिटेन को मुक्त व्यापार का वैश्विक प्रतीक बना देना चाहती हैं और भारत-ब्रिटेन के बीच ज़्यादा निवेश से देश की व्यापारिक स्थिति बेहतर होगी.

पिछले हफ्ते ही ब्रिटेन ने अपनी नई वीजा नीति का ऐलान किया है. उसने टियर-2 इंट्रा-कंपनी ट्रांसफर वर्ग में वीजा आवेदन के लिए वेतन से जुड़ी शर्तों को सख्त कर दिया है. अब इसके लिए सालाना न्यूनतम 30,000 पाउंड्स वेतन होना जरूरी होगा. यह सीमा पहले 20,800 पाउंड्स की थी. 24 नवंबर से अमल में आने वाली इस नई नीति से भारतीय आईटी पेशेवरों के सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.