लम्बी सी जिंदगी में सब बड़ी-बड़ी बातों की चिंता करते हैं. बड़े सपने देखते हैं फिर उन्हें पूरा करने की बड़ी-बड़ी कोशिशें करते हैं. और इन सबके बीच जो गुंजाइश बचती हैं उसमें बड़े-बड़े प्लान बनाकर खुद को बड़ा खुश करने की भी कोशिश करते हैं. यह भी दिलचस्प है कि चलते-फिरते हम सब अपनी बातों में एक-दूसरे को छोटी-छोटी खुशियों में खुशी ढूंढ़ने की सलाह भी देते रहते हैं. यह अलग बात है कि ऐसा कर पाना हमारी आम जिंदगी में संभव नहीं हो पाता. लेकिन पांच एपिसोड्स की यह रोमांटिक कॉमेडी वेब सीरीज ‘लिटिल थिंग्स’ बात भी कुछ ऐसी कहती है और रोजमर्रा की जिंदगी में यह मुमकिन होते भी दिखाती है.

छोटी खुशियों को महत्व देने की बात कहती इन छोटी-छोटी कहानियों को परदे पर दो मुख्य पात्रों ध्रुव और काव्या के जरिए दिखाया गया है. दिल्ली का लड़का ध्रुव एक रिसर्च स्कॉलर है और नागपुर की काव्या सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव. अलग-अलग शहरों से आए ये प्रेमी अब एक साथ मुंबई में रहते हैं. वेब सीरीज इनकी प्रेम कहानी की शुरुआत या अंत दिखाने के बजाय उनके साझा पलों के नरम-गरम पहलू दिखाती है. गुदगुदाने वाली इस प्रेम कहानी में कैसे जरा सी बात पर हुए झगड़े दोनों के बीच अपनेपन डोरी को तान देते हैं और मनाने की एक कोशिश उन्हें उसी डोरी से थोड़ा और मजबूती से बांध देती है.

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अब तक इस सीरीज के दो एपिसोड प्रसारित किए जा चुके हैं. पहले में रात भर अगले दिन के सफ़र की तैयारी करता यह जोड़ा उस सफ़र पर जाने से चूक जाता है. दोस्तों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर देखकर अपनी लापरवाही पर थोड़ा नाराज भी है. ऐसे में दुखी होने के बजाय संडे की सुबह देर तक ली गई नींद की कीमत, गोवा की छूटी हुई फ्लाइट से कहीं ज्यादा आंकी जाती है. समंदर किनारे न बैठ पाने के दुःख को अपने डाइनिंग रूम में साथ-साथ ब्रंच करके बहला लिया जाता है. कुल मिलाकर ज्यादा खुश होने का मौक़ा चूक जाने का अफ़सोस दिन भर की किस्तों में आई ख़ुशी पर भारी नहीं पड़ने पाता. दूसरा एपिसोड भी आमतौर पर घरों में होने वाली बाथरूम फाइट से शुरू होता है और रात को एक खुशगवार पार्टी पर ख़त्म होता है.

काव्या की भूमिका में मिथिला पालकर और ध्रुव की भूमिका में ध्रुव सहगल हैं. मिथिला पालकर ऑनलाइन फिक्शन सीरीज का जाना-माना चेहरा हैं. लिटिल थिंग्स में वे कई बार अपनी पिछली चर्चित वेब सीरीज ‘गर्ल इन द सिटी’ की याद दिलाती हैं. उनके खुश होने, गुस्सा करने के अलग तरीकों, हावभाव और जल्दी-जल्दी बोलने को बेशक लोग पसंद करते हैं लेकिन इसका दोहराव थोड़ा बोरियत भी पैदा कर सकता है. ध्रुव सहगल पहली बार किसी फिक्शन सीरीज का हिस्सा बने हैं. इसके पहले वे छोटे-मोटे वीडियोज में नजर आते रहे हैं. ध्रुव इस सीरीज के लेखक भी हैं और उससे भी ज्यादा ध्यान देने लायक बात यह है कि वे कम अच्छे अभिनेता और ज्यादा अच्छे लेखक हैं.

इस सीरीज का निर्माण डिजिटल एंटरटेनमेंट कंपनी ‘पॉकेट एसेज’ की वीडियो डिवीज़न ‘डाइस’ ने किया है. सीरीज के निर्देशक अजय भुयान और संगीत निर्देशक नील अधिकारी हैं. इसका हर नया एपिसोड बुधवार को रिलीज़ किया जा रहा है. पहले दो एपिसोड देखकर लगता है कि छोटी-छोटी चीजों के बहाने सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें ही नहीं की जा सकतीं बल्कि एक अच्छी वेब सीरीज भी बनाई जा सकती है.

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