छत्तीसगढ़ में हत्या के एक मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की फैकल्टी सदस्य अर्चना प्रसाद को आरोपित बनाया गया है. पीटीआई के मुताबिक यह मामला माओवादी हिंसा से प्रभावित सुकमा जिले में पिछले हफ्ते मारे गए आदिवासी शामनाथ बघेल की पत्नी की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है.

शामनाथ की पत्नी ने पुलिस शिकायत में माओवादियों पर अपने पति की हत्या करने का आरोप लगाया है. उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि मई में सुंदर और अन्य आरोपितों के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराने के बाद से ही शामनाथ को माओवादियों से धमकी मिल रही थी. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक शामनाथ ने सुंदर और अन्य आरोपितों पर माओवादियों के लिए समर्थन जुटाने की शिकायत की थी.

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक एसआरपी कल्लूरी ने बताया कि शिकायत के आधार पर माओवादियों और डीयू व जेएनयू प्रोफेसरों के अलावा दिल्ली के जोशी अधिकार संस्थान के विनीत तिवारी और छत्तीसगढ़ सीपीआई (एम) के राज्य सचिव संजय पराते के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. इन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा-120 बी (आपराधिक साजिश), 302 (हत्या), 147 (दंगा) और 148 के तहत आरोपित बनाया गया है.

आईजी कल्लूरी ने प्रोफेसर सुंदर पर फर्जी पहचान पत्र के साथ माओवाद प्रभावित गांवों का दौरा करने का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को जांच और बस्तर में उनकी मौजूदगी के बारे में चिट्ठी भेजी जा चुकी है. नंदिनी सुंदर दिल्ली विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में प्रोफेसर हैं. 2011 में उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार समर्थित सलवा जुडूम को भंग कर दिया था. आदिवासियों के सशस्त्र आंदोलन सलवा जुडूम को राज्य सरकार ने माओवादी से निपटने के लिए आगे बढ़ाया था.