सुप्रीम कोर्ट ने एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन के प्रतिबंध के मामले में गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी है. मंगलवार को न्यूज चैनल की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित पक्षों से पूछा, ‘इस मामले में अब क्या है?’ न्यायाधीश एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने आगे कहा, ‘हमने अखबार में पढ़ा कि प्रतिबंध पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है’. अदालत में एनडीटीवी की ओर से वरिष्ठ वकील फली नरीमन और अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने इस टिप्पणी पर सहमति जताई. इसके बाद कोर्ट ने इस संबंध में कोई भी नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया. शीर्ष अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख पांच दिसंबर तय की है.

सरकार की ओर से मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि चैनल के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री वैंकेया नायडू से इस संबंध में मुलाकात की थी. इसके बाद सोमवार को नायडू ने इस प्रतिबंध पर रोक लगाने का ऐलान किया था. यह प्रतिबंध नौ नवंबर को एक दिन के लिए लगना था. केंद्रीय मंत्री के मुताबिक चैनल अंतर-मंत्रालयी समिति के सामने एकबार फिर अपना पक्ष रख सकता है.

सोमवार को दायर अपनी याचिका में एनडीटीवी समूह ने उस कानूनी प्रावधान को भी चुनौती दी है जिसके आधार पर मंत्रालय ने उसके हिंदी चैनल के खिलाफ यह आदेश जारी किया था. अंतर-मंत्रालयी समिति ने बीती जनवरी में पठानकोट हमले के दौरान रणनीतिक रूप से संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक किए जाने के आरोप में चैनल पर पर एक दिन के लिए प्रतिबंध की सिफारिश की थी. इस सिफारिश को मानते हुए मंत्रालय ने इस संबंध में आदेश पारित किया था. इस आदेश के बाद मीडिया जगत ने सरकार को निशाने पर लिया और इसे आपातकाल के दिनों की याद बताया. हालांकि, कुछ मीडिया समूहों ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए इस सजा को नाकाफी बताया था.