प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मंगलवार आधी रात से 500 और 1000 रुपए के नोटों को बंद किए जाने की खबर आज सभी अखबारों के पहले पन्ने पर छाई हुई है. द इंडियन एक्सप्रेस ने इसे शीर्षक दिया है- ‘द ग्रेट कैश क्लीनअप’ तो द टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है- ‘ब्लैक आउट? 500, 1000 नोट्स नो लॉन्गर वैलिड’, द इकनॉमिक टाइम्स की खबर का शीर्षक है- ‘मोदी स्ट्राइक्स बिग बैंग नोट’ तो नवभारत टाइम्स ने हेडलाइन दी है- 'मोदी ने किया मनी पल्यूशन पर अटैक’.

एनडीटीवी ने सरकार के दावे को गलत बताया

एनडीटीवी इंडिया पर बैन के मामले में समूह के सह-संस्थापक प्रणय रॉय ने सूचना प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू से मुलाकात के संबंध में सरकार के दावे को गलत बताया है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक रॉय ने एक ब्लॉग में लिखा है कि मंत्रालय ने एनडीटीवी से संपर्क साधा था और मामले के समाधान के लिए रॉय के केंद्रीय मंत्री नायडू से मुलाकात करने की बात कही थी. रॉय के मुताबिक सरकार की इस पहल के पीछे मीडिया जगत का एनडीटीवी के पक्ष में एकजुट होना था.

माना जा रहा है कि प्रणय रॉय के इस दावे के बात एक बार फिर एनडीटीपी और सरकार के बीच तनाव बढ़ सकता है. बीते सोमवार को नायडू ने लगातार ट्वीट करके चैनल के खिलाफ दिए गए अपने आदेश पर रोक लगाने का ऐलान किया था. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा था कि एनडीटीवी के शीर्ष प्रतिनिधियों ने मुलाकात का अनुरोध किया था और इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मंत्रालय से चैनल के खिलाफ दिए गए आदेश को वापस लेने का निवेदन किया था.

फिल्मों को सर्टिफिकेट जारी करने संबंधी मामले पर गठित पैनल की रिपोर्ट स्वीकार

सेंसर बोर्ड ने केंद्र सरकार द्वारा गठित एक पैनल की सिफारिशों को मान लिया है. पैनल ने अपनी रिपोर्ट में फिल्मों के दृश्यों में छेड़छाड़ किए बिना नए श्रेणी के सर्टिफिकेट जारी करने की सिफारिश की थी. हिंदुस्तान टाइम्स ने इस खबर को मुख्य पृष्ठ पर जगह दी है. खबर के मुताबिक फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल की अध्यक्षता वाले इस पैनल की सिफारिशों को लागू किए जाने के बाद सेंसर बोर्ड के फिल्मों को संपादित किए जाने संबंधी अधिकार सीमित हो जाएंगे.

सरकार ने पहलाज निहलानी की अध्यक्षता वाले सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्मकारों की आजादी में दखल देने का आरोप लगने के बाद पैनल का गठन किया था. पैनल ने सरकार को सौंपी अपने रिपोर्ट में सिनेमेटोग्राफी कानून में बदलाव किए जाने की सिफारिश की है. इस कानून के तहत फिल्मों के कंटेट के आधार पर उन्हें विभिन्न श्रेणियों के सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं.

सरकार के 500 और 1000 के नोट बंद करने के बाद देशभर में अफरा-तफरी का माहौल

हिन्दुस्तान ने मोदी सरकार के 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने के ऐलान के बाद पूरे देश में हड़कंप मचने की खबर को मुख्य पृष्ठ पर जगह दी है. खबर के मुताबिक बहुत से दुकानदारों ने इन नोटों को लेने से इनकार कर दिया. सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक जहां कुछ पेट्रोल पंपों ने इन दो बड़े नोटों को स्वीकार किया, वहीं कई ने इससे इनकार कर दिया है.

सरकार के इस फैसले के बाद सबसे अधिक परेशानी की सामना उन्हें करना पड़ा है जो, घर से बाहर हैं. इसके अलावा देशभर में एटीएम के आगे 100 के नोट निकालने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखीं गई. सरकार के मुताबिक 500, और 1000 रुपए के नोट तय 50 दिनों के अंदर बैंकों और डाकघरों में बदले जा सकते हैं. इसके बावजूद लोगों के बीच संशय और बाजार में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया.

पीके और पार्टी नेताओं के बीच मतभेद को खत्म करने के लिए बीच का रास्ता

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) के अतिसक्रिय होने की वजह से पार्टी नेताओं में नाराजगी की बात सामने आई है. नवभारत टाइम्स में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सपा नेताओं के साथ प्रशांत किशोर की मुलाकात के बाद पार्टी के बड़े नेता खासे नाराज हैं. उन्होंने पार्टी हाईकमान से किशोर को बाहर करने की मांग की है. दूसरी ओर, प्रशांत किशोर की ओर से भी मीडिया में कांग्रेस से मतभेद के संकेत दिए गए हैं.

खबर के मुताबिक तनाव खत्म करने के लिए एक फॉर्मूला निकाला गया है. इस फॉर्मूले के तहत पार्टी में राजनीति से जुड़े तमाम नीतिगत फैसले नेता ही करेंगे जबकि प्रशांत किशोर केवल इन्हें अमली जामा पहनाने का काम करेंगे. कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि पीके कांग्रेस के साथ जुड़े रहेंगे.

सुरक्षा परिषद अपने ही समय के जाल और राजनीति में फंस गई : भारत

भारत ने आतंकवाद को लेकर दोहरा रवैया अपनाए जाने को लेकर सुरक्षा परिषद की आलोचना की है. दैनिक भास्कर ने इस खबर को जगह दी है. खबर के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने कहा है कि भारत में रोज आतंकी हमले हो रहे हैं. दूसरी ओर सुरक्षा परिषद आतंकियों को आतंकी घोषित करने में राजनीति कर रही है. उन्होंने आगे कहा कि जैश ए मोहम्मद के प्रतिबंधित होने के बावजूद उसके सरगना मसूद अजहर को प्रतिबंधित सूची में शामिल नहीं किया जा रहा.

अकबरुद्दीन ने परिषद को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह अपने ही ‘समय के जाल और राजनीति’ में फंस गई है. भारत ने सुरक्षा परिषद में अजहर को प्रतिबंधित सूची में डालने के लिए प्रस्ताव रखा था. इस प्रस्ताव पर परिषद के स्थाई सदस्य चीन दो बार अड़ंगा लगा चुका है.