सरकार ने एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन के बैन का अपना आदेश स्थगित किया | सोमवार, 07 नवंबर 2016

चौतरफा हो रही आलोचना के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने एनडीटीवी इंडिया पर लगाया गया एक दिन का बैन हटा लिया है. पीटीआर्इ के अनुसार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने हिंदी चैनल एनडीटीवी इंडिया के खिलाफ जारी अपने आदेश पर रोक लगा दी है. खबरों में कहा गया है कि मंत्रालय ने यह निर्णय केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू और एनडीटीवी के प्रमोटर प्रणय रॉय के बीच हुई एक बैठक के बाद लिया है. उधर, एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय ने नौ नवंबर के बैन के आदेश को फिलहाल 'होल्‍ड' पर रखा है और वह अपने इस निर्णय पर दोबारा विचार कर रहा है.

पिछले हफ्ते सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एनडीटीवी इंडिया पर पठानकोट एयर बेस पर हुए हमले के दौरान संवेदनशील जानकारी लीक करने का आरोप लगाया था. मंत्रालय का कहना था कि इस जानकारी के लीक होने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंच सकता था, क्योंकि आतंकवादी भी लगातार टीवी चैनलों के संपर्क में थे. सरकार ने सजा के तौर पर एनडीटीवी इंडिया को एक दिन (नौ नवंबर) के लिए बंद करने का आदेश दिया था.

दिल्ली-एनसीआर में सभी निर्माण कार्यों पर सात दिन की रोक | मंगलवार, 08 नवंबर 2016

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर में अगले सात दिनों तक सभी तरह के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है. एनजीटी ने यह कदम पिछले कई दिनों से वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए उठाया है.प्राधिकरण ने दिल्ली के तीनों नगर निगमों को निर्माण कार्यों और कचरा जलाए जाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए कहा. इसके अलावा उसने दिल्ली और इसके पड़ोसी राज्यों राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से इस संबंध में एक प्रभावी कार्य योजना बनाने के लिए कहा है.

इस मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई. उसने पूछा कि सड़कों पर पानी का छिड़काव करने के लिए क्रेन की जगह हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है. मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने कहा, ‘जब वायु प्रदूषण सामान्य स्तर से ऊपर जा रहा था तब आपने क्या किया? आपने सोमवार से पहले इस चुनौती से निपटने के लिए कौन से कदम उठाए? इसके बाद पीठ ने केंद्र सरकार को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार ने भी शुरुआती पांच दिनों में कुछ नहीं किया.

अलगाववादी नेताओं का ऐलान, कश्मीर घाटी में विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा | बुधवार, 09 नवंबर 2016

जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी नेताओं ने पिछले चार महीने से जारी विरोध प्रदर्शनों को जारी रखने का फैसला किया है. द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक श्रीनगर में अलगाववादियों और नागरिकों के समूहों के बीच बैठक के बाद यह फैसला लिया गया. इस बैठक में आगे उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार किया गया. पिछले एक हफ्ते में दूसरी बार होने वाली इस बैठक में हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुक और जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक के अलावा धार्मिक, कारोबार और शैक्षणिक समूहों के प्रतिनिधि मौजूद थे.

खबर के मुताबिक एक ओर जहां बंद कमरे में बैठक चल रही थी वहीं, दूसरी ओर कश्मीर घाटी के युवा बड़ी संख्या में बाहर इकट्ठे होकर ‘सौदेबाजी नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगा रहे थे. युवाओं के गुस्से को देखते हुए यासीन मलिक ने बाहर आकर उनके गुस्से को कम करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि लोगों के विद्रोह को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी फैसला नहीं लिया जाएगा.

अगले साल से सभी नई कारों में एयरबैग अनिवार्य करने की तैयारी | गुरुवार, 10 नवंबर 2016

मोदी सरकार अक्टूबर 2017 से सभी गाड़ियों में एयरबैग के साथ-साथ रिवर्स गियर सेंसर, स्पीड वार्निंग सिस्टम और सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसे सुरक्षा उपायों को अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बुधवार को इसके लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. भारत में गाड़ियों की कीमत को कम रखने के लिए कार निर्माता सुरक्षा उपायों और मानकों से समझौता करते हैं. लेकिन, सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो वे अगले साल से ऐसा नहीं कर पाएंगे.

नोटिफिकेशन के मुताबिक स्पीड वार्निंग सिस्टम गाड़ी की रफ्तार 80 किमी. प्रति घंटे से ज्यादा होने पर सचेत करेगा जबकि 100 किमी से ज्यादा स्पीड होने पर वह लगातार ऑडियो चेतावनी देने लगेगा. सरकार की इस पहल का मकसद भारत में चलने वाली गाड़ियों में सुरक्षा मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाना है. मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर कार बनाने वाली कंपनियों से भी राय मांगी है.

कर्नाटक के शिक्षा मंत्री एक कार्यक्रम में मोबाइल पर पोर्न देखते पाए गए | शुक्रवार, 11 नवंबर 2016

एक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपने मोबाइल पर पोर्न देखने के आरोप के बाद कर्नाटक के शिक्षा मंत्री तनवीर सैत विवादों में घिर गए हैं. यह मामला राज्य के रायचूर जिले का है जहां सैत गुरुवार को टीपू सुल्तान की जयंती से जुड़े एक समारोह में बतौर अध्यक्ष मंच पर मौजूद थे. इस दौरान अपने फोन पर अश्लील सामग्री देखती उनकी तस्वीरें कैमरों में कैद हो गईं. हालांकि शिक्षा मंत्री से इस बात से इनकार किया है. उनका कहना है कि वे सिर्फ वाट्सऐप पर आये मैसेज देख रहे थे.

इस घटना के बाद विपक्षी भाजपा को नया मुद्दा मिल गया है जो पहले ही टीपू सुल्तान की जयंती पर सरकार की ओर से आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों का विरोध कर रही है. इस घटना पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जगदीश शेट्‌टार का कहना है, ‘सैत ने शिक्षा विभाग की साख पर बट्टा लगाया है. उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर मुख्यमंत्री उन्हें अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दें.’ उधर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि वे इस विवाद पर रिपोर्ट मंगाएंगे और सैत से बात भी करेंगे.

राजस्थान रणजी टीम के खिलाड़ी अपना खर्च खुद उठाने को मजबूर | शनिवार, 12 नवंबर 2016

लोढ़ा समिति द्वारा राज्य क्रिकेट संघों के भुगतान पर लगाई गई रोक की पहली शिकार राजस्थान की टीम बनी है. शनिवार को राजस्थान की रणजी टीम जब कर्नाटक से मैच खेलने के लिए विशाखापत्तनम हवाई अड्डे पहुंची तो उसे अपने भारी भरकम अतिरिक्त सामान का भुगतान नहीं करने की वजह से रोक लिया गया. जब टीम के कप्तान पंकज सिंह ने बोर्ड से संपर्क किया तो उसने राज्य संघों के भुगतान पर लगाई गई रोक का हवाला देते हुए पैसा देने से इनकार कर दिया. ख़बरों के मुताबिक इसके बाद जब टीम के खिलाडियों ने एक लाख से ज्यादा की इस राशि का भुगतान अपनी जेब से किया तब उन्हें एयरपोर्ट से बाहर जाने की इजाजत दी गई.

पंकज सिंह ने एक हिंदी अखबार को बताया कि इस समय खिलाड़ियों को भायवह स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. उनके पास खुद भुगतान करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. पंकज के मुताबिक लोढ़ा समिति की रोक के बाद खिलाड़ियों को रोजाना मिलने वाला दो हजार रुपये का भत्ता भी बंद कर दिया गया है जिससे खाने-पीने, मेडिकल और अन्य जरूरी चीजों का खर्च भी उन्हें खुद उठाना पड़ रहा है. बताया जाता है की लोढ़ा समिति के आदेश के बाद से राजस्थान महिला अंडर-19 टीम को भी ऐसी ही मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.