नोटबंदी के फैसले ने लोगों को अलग-अलग प्रभावित किया है. नकदी की किल्लत से एक तरफ थोक और खुदरा व्यापारी बिक्री घटने की शिकायत कर रहे हैं तो दूसरी तरफ पेटीएम और मोबीक्विक जैसी मोबाइल भुगतान और वॉलेट कंपनियों ने अपने कारोबार में उछाल का दावा किया है. द मिंट के मुताबिक पेटीएम ने अपने ऐप के ट्रैफिक में पिछले हफ्ते से 700 फीसदी बढ़ोत्तरी होने का दावा किया है. केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते मंगलवार को आधी रात से 500 और 1000 रु के नोट को बंद करने का फैसला किया था.

पेटीएम के मुताबिक बीते हफ्ते शुक्रवार और शनिवार के दिन उसके प्लेटफॉर्म से भुगतान की संख्या 50 लाख के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई. उसने कहा है कि वह मार्च 2017 तक 24,000 करोड़ रुपये के लेन-देन का आंकड़ा पार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जो देश के मोबाइल भुगतान नेटवर्क में सबसे ज्यादा होगा. पेटीएम ने ऐप में जमा राशि में 1000 फीसदी और औसत लेन-देन की मात्रा में 300 फीसदी बढ़ोत्तरी का भी दावा किया है. इसके अलावा ऐप डाउनलोड करने की संख्या भी 300 फीसदी बढ़ गई है.

उधर, मोबीक्विक ने भी पेटीएम से मिलता-जुलता ही दावा किया है. मोबीक्विक ने अपने प्लेटफॉर्म पर जमा राशि और लेन-देन के मूल्य में 2000 फीसदी की अतिरिक्त बढ़ोतरी का दावा किया है. मोबीक्विक के मुताबिक लेमनट्री, मेक माइ ट्रिप और इंडिगो जैसे उसके सहयोगियों ने मोबाइल वॉलेट आधारित भुगतान में 300 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है.

बड़े नोटों के बंद होने और छोटे नोटों की किल्लत के बीच कैशलेस लेन-देन की जरूरत देखते हुए दोनों कंपनियों ने अपनी ऑफलाइन मौजूदगी बढ़ाने की घोषणा भी की है. इसके तहत दुकानदारों के साथ साझेदारी की जाएगी, जिससे ग्राहक अपने मोबाइल ऐप के जरिए कैशलेस भुगतान कर सकें. मोबीक्विक का कहना है कि वह अगले तीस दिन में 10 लाख से ज्यादा कारोबारियों को जोड़ेगा, जबकि पेटीएम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कीरा वासीरेड्डी के मुतााबिक उनकी कंपनी ने मौजूदा वित्त वर्ष तक 50 लाख दुकानदारों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है.

इन दोनों कंपनियों का दावा ऐसे समय में आया है, जब विपक्षी दल नोटबंदी को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल यह भी आरोप लगा चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दोस्तों को नोटबंदी के फैसले की जानकारी लीक कर दी थी, ताकि वे अपनी बेहिसाबी संपत्ति को ठिकाने लगा सकें. इसके अलावा वे पेटीएम के विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर इस्तेमाल करने पर भी सवाल उठा चुके हैं.