500 और 1000 के नोट बंद करने के फैसले से उत्पादन पर पड़ने वाले असर से निपटने में सरकार को तेजी दिखानी होगी. नकदी की कमी सभी बाजारों में खर्च और बिक्री में गिरावट ला चुकी है. यह असर अब उत्पादन तक जाएगा और अगर इसे जारी रहने दिया गया तो इसका नतीजा आर्थिक संकुचन यानी अर्थव्यवस्था के सिकुड़ने के रूप में दिखेगा.

रबी के उदाहरण से इसे समझा जा सकता है. सर्दियों की इस फसल की बुआई और कटाई का समय अक्टूबर के आखिरी दिनों और मार्च की शुरुआत में होता है. खरीफ की फसल से जो पैसा आता है उसका एक हिस्सा किसान रबी की फसल में भी लगाते हैं. खरीफ की फसल इस बार अच्छी हुई थी. अगर अचानक नोटबंदी का ऐलान नहीं हुआ होता तो रबी की बुआई, कटाई और बिक्री का काम सामान्य तरीके से ही होता. लेकिन अब पूरी फसल पर खतरा है. खबरों के मुताबिक बुआई का काम 60 फीसदी पर अटक गया है. नकदी की कमी ने बीज सहित उन सभी कारकों पर शिकंजा कस दिया है जो बुआई के लिए इस्तेमाल होते हैं. कुछ ही महीने बाद होने वाली कटाई में इससे भी ज्यादा मुश्किल होगी और यही हाल बिक्री का भी हो सकता है.

ट्रैक्टर, डीजल और खेत मजदूरों के लिए नकदी होना जरूरी है. बाकी चीजें उधार ले ली जाएं तो भी मजदूरी देने के लिए तो जेब में पैसा चाहिए ही. लेकिन नोटबंदी के चलते यह पैसा अब बेकार हो चुका है. उधर, खरीदारों के पास भी पैसे की कमी है तो बाजार में मांग भी कम हो सकती है जिसका मतलब होगा उत्पादन की बर्बादी. मूल्य के हिसाब से देखें तो देश की खेती में 65 फीसदी हिस्सा फल, सब्जियों और डेरी पदार्थों का है और बाकी खाद्यान्न का. अगर भंडारण की सुविधा न हो- और यह समस्या हमारे देश में काफी है- तो पहले वर्ग में आने वाली चीजें हफ्ते भर के भीतर ही खराब होने लगती हैं.

इसलिए रबी की फसल वाले इलाकों में ज्यादा नकदी भेजना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए. ग्रामीण भारत में बैंक सेवाओं की उपलब्धता भी बनिस्बत कम है इसलिए वहां पर नोटबंदी के चलते पैदा हुए नकदी के संकट से निपटने के लिए मोबाइल कैश वैन और बैकिंग एजेंटों जैसे नए उपायों की मदद ली जानी चाहिए. ग्रामीण भारत भी बैंकिंग से जुड़ी सेवाओं का फायदा अपने फोन से ही उठा सके, इसके लिए सरकारी और निजी क्षेत्र को अपने संयुक्त प्रयास तेज करने की जरूरत है.

अगर यह नहीं हुआ तो इसके नतीजे बुरे होंगे. इस साल अच्छे मॉनसून से जो उम्मीद जगी है उसकी परिणति किसानों को नुकसान के रूप में होगी. इससे महंगाई बढ़ेगी. साफ है कि नोटबंदी का फैसला करते हुए इन बातों पर विचार नहीं किया गया. लेकिन अब भी देर नहीं हुई है. इसका बुरा असर टाला जा सकता है. (स्रोत)