हाल ही में संपन्न हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों ने अमेरिका सहित दुनिया के बहुत से लोगों को चिंतित किया है. डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से अमेरिका में लगातार उनके विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं. इन चुनाव परिणामों ने उन लोगों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया जो अमेरिका में पहली महिला राष्ट्रपति देखना चाहते थे.

लेकिन, इसी चुनाव में एक ऐसी घटना भी घटी जिसने इस उम्मीद को कायम रखा है. यह घटना थी वर्तमान में कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल कमला हैरिस के सीनेटर चुने जाने की. भारतीय-अमेरिकी मूल की 52 वर्षीय कमला हैरिस को अमेरिका में 'फीमेल ओबामा' के नाम से भी जाना जाता है. अमेरिका में हैरिस अभी तक की दूसरी और पिछले 20 सालों में सीनेट पहुंचने वाली पहली अश्वेत महिला हैं.

स्वभाव से काफी तेजतर्रार हैरिस एक भारतीय ब्रेस्ट कैंसर सर्जन श्यामला गोपालन की बड़ी बेटी हैं. गोपालन 1960 में चेन्नई से अमेरिका गई थीं और फिर वहीं बस गईं. वहां उन्होंने इकनॉमिक्स के प्रोफेसर डोनाल्ड हैरिस से शादी की. हालांकि, जमैकन मूल के हैरिस के साथ उनकी यह शादी ज्यादा दिन नहीं चली. जल्द ही दोनों अलग हो गए. तब कमला हैरिस की उम्र पांच साल थी. इसके बाद हैरिस और उनकी छोटी बहन माया की परवरिश उनकी मां ने ही की.

डेमोक्रेटिक पार्टी में उच्च पदस्थ लोगों के बीच भी हैरिस ने अपने काम के दम पर अपना दबदबा बना लिया है. कई मौकों पर खुद राष्ट्रपति बराक ओबामा हैरिस की तारीफों के पुल बांधते नजर आ चुके हैं.

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से लॉ की पढाई करने के बाद कमला हैरिस ने कई साल तक एक वकील के तौर पर अपने काम में परिपक्वता हासिल की. इसके बाद 1990 से उन्हें कैलिफोर्निया की अल्मिडा शहर की उप डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के रूप में काम करने का मौका मिला. 2003 में उन्हें सैन फ्रांसिस्को की 'डिस्ट्रिक्ट गवर्नर' चुना गया. वे ऐसा करने वाली वाली पहली महिला थीं और इस चुनाव में उन्होंने अपने बॉस रह चुके टेरेंस हलिनन को हराकर कइयों को चौंका दिया था. इस चुनाव में हलिनन ने कमला हैरिस पर एक गंभीर आरोप लगाए थे. हलिनन का कहना था कि कमला हैरिस ने सैन फ्रांसिस्को के तत्कालीन गवर्नर और हैरिस से उम्र में करीब 30 साल बड़े विली ब्राउन को प्रेम संबंधों में फंसाकर उनके जरिये कई अहम पद हासिल किए हैं. लेकिन फिर भी कमला हैरिस हलिनन को पछाड़ते हुए सैन फ्रांसिस्को की गवर्नर बनीं.

जानकार कहते हैं कि उस समय ही कइयों को हैरिस की राजनीतिक कुशलता का अहसास हो गया था. उनके मुताबिक हैरिस ने हलिनन को उन्हीं के खेल में मात दे दी थी. उन्होंने हलिनन के द्वारा लगाए गए आरोपों को बड़ी चतुराई से महिला विरोधी रंग देते हुए चुनाव में अपने पक्ष को मजबूत कर लिया था. लगातार दो बार सैन फ्रांसिस्को की 'डिस्ट्रिक्ट गवर्नर' चुने जाने के बाद हैरिस ने 2011 में कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल पद के लिए दावेदारी ठोकी और कई महारथियों को पछाड़ते हुए लगातार दो बार राज्य की अटॉर्नी जनरल बनीं. वे इस पद पर चुनी गई पहली अश्वेत महिला थीं.

जानकारों की मानें तो कमला हैरिस ने अभी तक अपने आप को राष्ट्रपति के दावेदार के रूप में नहीं दिखाया है. लेकिन उन्होंने पिछले पदों पर रहते हुए कई ऐसे काम किए हैं जो न सिर्फ उन्हें दूसरे अटॉर्नी जनरलों से काफी आगे ले गए बल्कि जिन्होंने उनको एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर भी स्थापित किया. जानकार कहते हैं कि हैरिस के इन कामों की वजह से ही जनता के दिलों में भी उनकी जगह बन गई.

डेमोक्रेटिक पार्टी में उच्च पदस्थ लोगों के बीच भी कमला हैरिस ने अपने काम के दम पर अपना दबदबा बना लिया है. कई मौकों पर खुद राष्ट्रपति बराक ओबामा और उपराष्ट्रपति जो बिडन हैरिस की तारीफों के पुल बांधते नजर आ चुके हैं. अपनी पार्टी में यह कमला हैरिस का कद ही था कि जब उन्होंने कैलिफोर्निया से सीनेटर के लिए अपना नाम आगे बढ़ाया तो उन्हें किसी बड़े विरोध का सामना नहीं करना पड़ा. सीनेट के चुनाव में भी उन्होंने अपनी पार्टी की कद्दावर नेता और 20 साल से सांसद (प्रतिनिधि) लोरट्टा संचेज़ को शिकस्त दी है.

समलैंगिकों और अल्पसंख्यकों की लड़ाई को लेकर तो हैरिस कई बार अपनी ही पार्टी के लोगों के निशाने पर आ चुकी हैं. पुलिस की गोली से हुई अश्वेतों की मौत पर उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं को भी नहीं बख्शा था.

कमला हैरिस की राजनीति को करीब से देखने वाले लोग उनकी लगातार हो रही जीत का मुख्य कारण गरीब, अश्वेतों, अल्पसंख्यकों, प्रवासियों और समलैंगिकों के बीच बनी उनकी मजबूत पकड़ को मानते हैं. इन तबकों से आने वाले ज्यादातर लोग यह तक कहते हैं कि हैरिस उनके हक के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं. इसके कारण भी हैं.

2011 में स्टेट अटॉर्नी बनने के बाद हैरिस ने कैलिफोर्निया में उस प्रस्ताव को लागू करने से लिए मना कर दिया था जिसमें राज्य के नागरिकों ने ही वोटिंग के द्वारा समलैंगिक विवाह पर प्रतिबंध लगाने का फैसला सुनाया था. इस मामले में उन्होंने निचली अदालत के फैसले पर भी आपत्ति जताई थी. कमला हैरिस का कहना था कि अमेरिकी संविधान में हर किसी को अपनी इच्छा के मुताबिक शादी करने का अधिकार दिया गया है और अगर समलैंगिकों को इस अधिकार से वंचित किया जाता है तो इससे संविधान का उन्लंघन होगा. इसके बाद जब साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा समलैंगिकों की शादी को कानूनी मान्यता दी गई तो समलैंगिकों ने इसका अधिकांश श्रेय हैरिस को दिया.

अमेरिका में साल 2008-09 में आई मंदी के दौरान रियल एस्टेट क्षेत्र को हुए बड़े घाटे से देश के लाखों लोगों के मकान छिनने का खतरा पैदा हो गया था. इसके सबसे ज्यादा शिकार कैलिफोर्निया के लोग होने वाले थे. उस समय कमला हैरिस ने इन लोगों की मदद के लिए बड़ा कदम उठाया. उन्होंने वित्तीय संस्थानों और लोगों के बीच मध्यस्थता करते हुए कैलिफोर्निया को 18.4 बिलियन डॉलर की वित्तीय सहयता दिलवाई. साथ ही उन्होंने भविष्य में लोगों को ऐसी दिक्कतों से बचाने के लिए साल 2012 में 'होम ओनर बिल ऑफ राइट्स' भी बनाया जिसे राज्य विधानसभा में पारित कराया गया. अमेरिका में इस मुद्दे को लेकर कमला हैरिस के प्रयासों को काफी सराहा गया था.

अल्पसंख्यकों की लड़ाई को लेकर तो कमला हैरिस कई बार अपनी ही पार्टी के लोगों के निशाने पर आ चुकी हैं. कैलिफोर्निया में पुलिस हिरासत के दौरान और पुलिस की गोली से हुई मौतों को लेकर उन्होंने पुरजोर विरोध दर्ज कराया था. साथ ही समय-समय पर पुलिस द्वारा अश्वेत समुदाय के साथ किए गए अन्याय को लेकर भी उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी है. इसके अलावा वे जेलों में कैदियों के साथ होने वाले गलत बर्ताव को लेकर भी विरोध जताती रही हैं. कमला हैरिस ड्रग्स से जुड़े मामलों में लोगों को लंबी सजा दिए जाने के बजाय उनके रोजगार प्रशिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य उपचार और पुनर्वास को लेकर भी कानून बनाने की वकालत करती रही हैं.

अमेरिका में हैरिस जैसी तेज तर्रार महिला के सीनेट पहुंचने के बाद से उनके और डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक बड़ी लड़ाई छिड़ने की संभावना जताई जाने लगी है. कई मुद्दों पर इनके बीच अभी से बहस छिड़ गई है.

कमला हैरिस के करीबी लोग कहते हैं कि हैरिस ने कई मुद्दों पर पीछे न हटकर अपनी पहचान सशक्त और उसूलों पर चलने वाले राजनेता के तौर पर बना ली है और इसका भी उन्हें बड़ा फायदा मिलता है. 2004 में डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी रहते हुए उन्होंने एक पुलिस अधिकारी की हत्या के आरोपी को मौत की सजा न दिए जाने की वकालत कर सभी को चौंका दिया था. उस समय उन्हें अपनी पार्टी में ही तीखा विरोध सहना पड़ा था. डेमोक्रेटिक सीनेटर डिंने फिनिस्तीन ने तो यह तक कह दिया था कि अगर उन्हें पहले से हैरिस की इस ऐसी सोच के बारे में पता होता तो वे कभी उन्हें अटॉर्नी नहीं बनने देते. लेकिन, चौतरफा विरोध के बावजूद हैरिस अपनी बात पर अडिग रहीं. उनका कहना था कि वे मौत की सजा के बदले अपराधी को बिना पैरोल ताउम्र सजा दिया जाना ज्यादा सही समझती हैं.

कमजोर तबकों के लिए न्याय की लड़ाई को लेकर एक साक्षात्कार में हैरिस कहती हैं कि वे बचपन से ही ऐसे माहौल में पली बढ़ी हैं जहां उन्होंने अन्याय के खिलाफ लोगों को लड़ते देखा. वे बताती हैं कि उनके माता-पिता भी नस्लभेद के खिलाफ होने वाले आंदोलनों में हिस्सा लिया करते थे. बर्कले शहर में रहने के दौरान उन्हें खुद कई बार भेदभाव का समाना करना पड़ा. उनके मुताबिक उनके रंग की वजह से बचपन में गोरे पड़ोसियों के बच्चे उनके और उनकी बहन के साथ खेला नहीं करते थे. वे बताती हैं कि इन्हीं सब सामाजिक बुराइयों को देखते हुए उन्होंने वकालत के पेशे को अपनाने का निर्णय लिया था. इससे शुरुआत में उनके घर वाले काफी ज्यादा परेशान हो गए थे. हैरिस के मुताबिक उस समय वे अच्छे से जान गई थीं कि अगर किसी को न्याय दिलाना है तो आंदोलनों से कहीं ज्यादा जरुरी कानूनी लड़ाई लड़ना है. एक साक्षात्कार में हैरिस कहती हैं कि आज भी जब वे बचपन में अन्याय के खिलाफ लगाए नारों को याद करती हैं तो उन्हें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का अहसास होता है.

अमेरिका में कमला हैरिस जैसी तेज तर्रार महिला के सीनेट में पहुंचने के बाद से उनके और डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक बड़ी लड़ाई छिड़ने की संभावना जताई जाने लगी है. गन कंट्रोल और अल्पसंख्यकों सहित तमाम मुद्दों पर ये दोनों एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं और इसलिए सीनेट में ट्रंप को अपने लगभग सभी मुद्दों पर हैरिस के तीखे विरोध का सामना करना पड़ेगा. प्रवासियों के मुद्दे को ही देखें तो कमला हैरिस शुरू से ही उनकी बड़ी हमदर्द रहीं हैं तो ट्रंप हमेशा से प्रवासियों को देश से बाहर निकालने की बात करते आए हैं. ट्रंप के चुनावी मुद्दों में यह सबसे अहम मुद्दा भी था. चुनाव जीतने के बाद भी ट्रंप बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को देश से बाहर निकालने की बात कह चुके हैं. साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि जो राज्य इस मसले पर उनका सहयोग नहीं करेंगे उन्हें प्रवासियों के लिए संघीय सरकार की ओर से दी जाने वाली वित्तीय सहायता बंद कर दी जाएगी.

उधर, कमला हैरिस ने चुनाव बाद आए ट्रंप के इस बयान को लेकर उनकी आलोचना की है. उन्होंने साफ किया है कि वे सड़क से सीनेट तक ट्रंप की ऐसी नीतियों का विरोध करेंगी. उन्होंने अमेरिकियों से भी कहा है कि डेमोक्रेट्स की हार के बाद यह समय चुपचाप बैठने का नहीं है, बल्कि अब चुनौतियां पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं और एक नई जंग की तैयारी शुरू करने का समय आ गया है. अमेरिका की राजनीति में ओबामा और हिलेरी के जाने बाद अब जो शख्स ट्रंप विरोधी राजनीति के केंद्र में दिख रहा है वह कमला हैरिस हैं और यही कारण है कि अमेरिकियों के एक बड़े वर्ग की उम्मीदें अब उन पर आकर टिक गई हैं.