जापान में मंगलवार सुबह की शुरुआत भूकंप के तेज झटकों और सूनामी से हुई. देश के मौसम विभाग के अनुसार टोक्यो में महसूस किए गए इन झटकों की तीव्रता 7.4 थी. भूकंप का केंद्र फुकुशिमा तट पर जमीन में 10 किलोमीटर नीचे था. इसके बाद फुकुशिमा से लगभग 70 किमी उत्तर में सेंदेई के आसपास 1.4 मीटर ऊंची सुनामी देखी गई. उत्तरी जापान का यह इलाका 2011 में भूकंप और सुनामी की भारी तबाही का सामना कर चुका है.

हालांकि, चेतावनी पहले से जारी हो जाने की वजह से सूनामी के चलते किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. हवाई स्थित पैसिफिक सुनामी वार्निंग सेंटर ने कहा है कि जापान में सुनामी का बड़ा खतरा टल चुका है, लेकिन अगले कुछ घंटों तक जापान के तटों पर ऊंची लहरें उठती रहेंगी.

सुनामी के खतरे को देखते हुए जापान के सभी तटीय परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को बंद कर दिया गया है. टोक्यो इलेक्ट्रिक पॉवर (टेपको) के प्रवक्ता के अनुसार भूकंप से फुकुशिमा दाईची न्यूक्लियर पॉवर प्लांट के एक कूलिंग सिस्टम को थोड़ी देर के लिए रोका गया था लेकिन, थोड़ी ही देर बाद उसे फिर चालू कर दिया गया. यही वह रिएक्टर है जो 11 मार्च 2011 को आई सूनामी की चपेट में आ गया था जिससे हवा और समुद्र में रेडियोएक्टिव प्रदूषण फैलने लगा था. हालांकि, इसे पूरी बंद कर दिया गया है लेकिन बचे हुए रेडियोएक्टिव ईंधन को ठंडा रखने के लिए कूलिंग सिस्टम को चालू रखने की जरूरत होती है.

बाकी किसी परमाणु बिजली घर में किसी भी तरह की समस्या सामने नहीं आई है. जापान में अभी केवल दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के दो परमाणु बिजलीघर काम कर रहे हैं. इस वजह से अधिकांश इलाकों की बिजली गुल है.

जापान दुनिया से सबसे अधिक भूकंप सक्रिय क्षेत्र में आता है. दुनिया में 20 फीसदी भूकंप यहीं पर आते हैं. यही वजह है कि यहां भवन निर्माण से लेकर परिवहन तक तमाम क्षेत्रों में इस खतरे का विशेष ध्यान रखा जाता है.