विवेक फरीदाबाद में रहते हैं और एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर मैनेजर हैं. मोटी पगार मिलने के बावजूद भी कुछ महीनों पहले तक वे बिलकुल भी बचत नहीं कर पाते थे. फिर किसी ने उन्हें ‘सोशल ट्रेड’ से जुड़ने की सलाह दी. विवेक को यह सलाह पसंद आई और बीती दस जून को वे 50 हजार रूपये लगाकर ‘सोशल ट्रेड’ से जुड़ गए. छह महीने के भीतर ही विवेक ‘सोशल ट्रेड’ में पार्ट टाइम काम करके सात लाख रूपये कमा चुके हैं. अब वे हर रोज़ सिर्फ दो घंटे ‘सोशल ट्रेड’ के लिए काम करते हैं और इससे करीब डेढ़ लाख रूपये हर महीने कमा लेते हैं.
विवेक की यह कहानी इन दिनों हजारों लोगों को ‘सोशल ट्रेड’ की तरफ आकर्षित कर रही है. कुछ ही महीनों में लखपति बन जाने का सपना लिए अनेकों लोग हर रोज़ ‘सोशल ट्रेड’ से जुड़ रहे हैं. कई लोग तो इससे जुड़कर लखपति बन भी चुके हैं. और अब भी जो लोग इस कंपनी से जुड़ रहे हैं, उनके बैंक खाते में कंपनी हर रोज़ पैसे जमा करा रही है. यह कंपनी किसकी है, क्या काम करती है, कैसे काम करती है और कैसे हजारों लोगों को रातों-रात अमीर बना देने का वादा कर रही है, इसे समझने की शुरुआत उन्हीं लोगों की बातों से करते हैं जो इस कंपनी से जुड़कर लाखों रूपये कमा चुके हैं.
विवेक बताते हैं, ‘सोशल ट्रेड’ ‘अब्लेज़ इन्फो सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी की एक इकाई है. इसकी शुरुआत अगस्त 2015 में हुई थी. यह डिजिटल मार्केटिंग का काम करती है. सोशल मीडिया पर कई लोग अपना और अपनी छोटी-बड़ी कंपनियों का प्रचार करते हैं. जैसे फेसबुक पर कई लोग अपने पेज को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए फेसबुक को पैसा देते हैं. सोशल मीडिया पर प्रचार का यही काम सोशल ट्रेड भी करती है.’ विवेक आगे बताते हैं, ‘हम लोगों को सोशल ट्रेड हर रोज़ कुछ लिंक्स भेजती है. हमें एक-एक कर इन लिंक्स पर क्लिक करना होता है. हर लिंक पर क्लिक करने के हमें पांच रूपये मिलते हैं. ये लिंक्स उन लोगों की वेबसाइट या फेसबुक पेज के होते हैं जिन्होंने अपने प्रचार के लिए कंपनी को पैसे दिए हैं. कंपनी उन लोगों से हर क्लिक के 10-15 रूपये लेती है. इसमें से हर क्लिक के पांच रूपये हमें मिलते हैं और बाकी कंपनी खुद रख लेती है.’
विवेक यह भी बताते हैं कि सोशल ट्रेड पर असली कमाई लोगों को जोड़ने से होती है. जैसे किसी भी मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) वाले व्यापार में लोगों को जोड़ना होता है, वैसे ही सोशल ट्रेड में भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को कंपनी से जोड़ने पर कमाई कई गुना तक बढ़ जाती है. विवेक बताते हैं, ‘पिछले छह महीनों में मैं करीब सात सौ लोगों को इस कंपनी से जोड़ चुका हूं. मेरे परिवार के तो लगभग सभी लोग इससे जुड़े हुए हैं और अच्छा पैसा कमा रहे हैं. इस कंपनी की सबसे अच्छी बात यह है कि यह रोज़ के रोज़ ही लोगों के अकाउंट में पैसे जमा करवाती है. इसलिए यहां पैसा डूबने का कोई खतरा नहीं है.’
कंपनी की कार्यप्रणाली पर शक करने के कई कारण और भी हैं. इनमें सबसे पहला कारण तो यही है कि जिस पार्ट टाइम काम के नाम पर कंपनी पैसा बांट रही है, असल में वह कोई काम ही नहीं है
विवेक की तरह ही ‘सोशल ट्रेड’ से जुड़े अन्य लोग भी इस कंपनी और इसकी कार्यप्रणाली के बारे में लगभग ऐसी ही बातें बताते हैं. इन लोगों के लिए यह कंपनी ‘पार्ट टाइम’ काम देने वाली ऐसी कंपनी है जिससे जुड़कर कुछ ही महीनों में लखपति बना जा सकता है. लेकिन इस कंपनी की वेबसाइट, उसमें लिखी सेवा-शर्तों और कंपनी की कार्यप्रणाली पर यदि गौर करें तो एक ऐसी कहानी सामने आती है जो इशारा करती है कि ‘सोशल ट्रेड’ शायद आने वाले समय के सबसे बड़े घोटाले को अंजाम देने वाली है.
‘सोशल ट्रेड’ असल में एक ‘सोशल ट्रेड डॉट बिज़’ नाम की एक वेबसाइट है. इस वेबसाइट पर ही लिखे गए इसके परिचय की मानें तो यह मूल रूप से ‘एसईओ’ का काम करती है. ‘एसईओ’ यानी ‘सर्च इंजन ऑप्टीमाईजेशन.’ सरल भाषा में समझें तो इसका मतलब है गूगल और याहू जैसे सर्च इंजन पर किसी वेबसाइट को बढ़ावा देना. उदाहरण के लिए, गूगल पर यदि ‘शहीद’ लिख कर खोजा जाए तो लाखों परिणाम सामने आते हैं. ऐसे में यदि किसी व्यक्ति ने ‘शहीद’ नाम से कोई संस्था शुरू की है और वह चाहता है कि गूगल पर जब भी कोई ‘शहीद’ टाइप करे तो उसकी संस्था का जिक्र सबसे शुरुआत में ही आए तो वह व्यक्ति ‘एसईओ’ के जरिये ऐसा करवा सकता है.
‘सोशल ट्रेड’ इसी एसईओ का काम करने के नाम पर अपने ग्राहकों से पैसा ले रही है. इसके लिए ‘सोशल ट्रेड’ ने कुल चार तरह के पैकेज बनाए हैं. यह पैकेज 5750 रूपये से शुरू होकर 57,500 रूपये तक के हैं. ये पैकेज अपने ग्राहकों को देते हुए ‘सोशल ट्रेड’ जिन नियम व शर्तों पर लोगों के हस्ताक्षर करवा रही है, उसके अनुसार लोग अपनी वेबसाइट या फेसबुक पेज के प्रचार के लिए यह पैसा कंपनी को दे रहे हैं. साथ ही शर्तों में यह भी जिक्र है कि पैकेज लेने पर कंपनी अपने ग्राहकों को कुछ पार्ट टाइम काम भी देगी जिससे वे अन्य लोगों के प्रचार में मदद करके कुछ पैसा कमा सकते हैं. लेकिन इन नियम-शर्तों में कहीं भी मल्टी लेवल मार्केटिंग का जिक्र तक तक नहीं है. हालांकि वेबसाइट के कुछ अन्य हिस्सों में इसका जिक्र मिलता है लेकिन जो अनुबंध यह कंपनी अपने ग्राहकों के साथ कर रही है उसमें कहीं भी इसका जिक्र नहीं है.
कंपनी की कार्यप्रणाली पर शक करने के कई कारण और भी हैं. इनमें सबसे पहला कारण तो यही है कि जिस पार्ट टाइम काम के नाम पर कंपनी पैसा बांट रही है, असल में वह कोई काम ही नहीं है. कंपनी अपने हर ग्राहक को रोजाना कुछ लिंक्स भेजती है. ग्राहकों का काम है इन लिंक्स को एक-एक कर क्लिक करना. लिंक पर क्लिक करते ही एक ‘पॉप-अप’ खुलता है जो 20 सेकंड बाद अपने-आप ही बंद हो जाता है. इसके बाद ग्राहक को अगले लिंक पर क्लिक करना होता है. कंपनी अपने ग्राहकों को बता रही है कि ऐसा करने से उन लिंक्स का ट्रैफिक बढ़ रहा है जिन्होंने इसके लिए कंपनी को पैसे दिए हैं. लेकिन इन लिंक्स पर गौर करें तो इनमें से लगभग आधे फर्जी हैं, यानी वे किसी वेबसाइट तक पहुंचते ही नहीं. और बाकी लिंक्स उन ग्राहकों द्वारा दिये होते हैं जो इन लिंक्स के प्रचार के लिए नहीं बल्कि पैसा कमाने के लिए सोशल ट्रेड से जुड़े हैं.
सोशल ट्रेड जितना पैसा अपने ग्राहकों को बांट रही है, उससे भी इस पर शक पैदा होता है. दुनिया में ऐसी कोई कंपनी नहीं जो अपने हर निवेशक को एक साल के भीतर ही उसके निवेश का कम से कम ढाई गुना पैसा वापस लौटाती हो.
सोशल ट्रेड से कोई भी पैकेज खरीदते वक्त हर ग्राहक को एक वेबसाइट या किसी फेसबुक पेज का लिंक देना होता है. ग्राहकों द्वारा दिए गए इन लिंक्स को ही कंपनी अपने अन्य ग्राहकों को भेज रही है और पार्ट टाइम काम के नाम पर इन लिंक्स पर क्लिक करवा रही है. ग्राहक एक-दूसरे के लिंक्स पर ही क्लिक कर रहे हैं और हर क्लिक का पांच रुपया कमा रहे हैं. कंपनी के अधिकतर ग्राहक ऐसे हैं जो जानते ही नहीं कि उन्होंने ‘सोशल ट्रेड’ को जो पैसा दिया है वह अपनी किसी वेबसाइट के प्रचार के लिए दिया है. राजस्थान के रहने वाले एक ग्राहक बताते हैं, ‘कंपनी यह पैसा इसलिए ले रही है ताकि लोग अपना काम गंभीरता से करें. जब तक कोई चीज़ मुफ्त मिलती है तब तक हम उसकी कद्र नहीं करते. यहां जब हम अपने पैसे लगाते हैं तो हमें उस पैसे को वसूलना होता है इसलिए हम गंभीरता से काम करने लगते हैं.’
सोशल ट्रेड जितना पैसा अपने ग्राहकों को बांट रही है, उससे भी इस कंपनी पर शक पैदा होता है. दुनिया में ऐसी कोई कंपनी नहीं है जो अपने हर निवेशक को एक साल के भीतर ही उसके निवेश का ढाई गुना पैसा वापस लौटा रही हो. लेकिन सोशल ट्रेड यही कर रही है. कंपनी दावा कर रही है कि जो भी लोग उससे जुड़ रहे हैं उन्हें वह न्यूनतम ढाई गुना एक साल के भीतर ही वापस लौटा देगी और अधिकतम की तो कोई सीमा ही नहीं है. यह बिलकुल वैसा ही है जैसा कुछ साल पहले ‘स्पीक एशिया’ नाम की एक कंपनी ने किया था.
‘स्पीक एशिया’ ने ऑनलाइन सर्वे करने के नाम पर शुरुआत में लोगों को जमकर पैसा बांटा और जब लाखों लोग उससे जुड़ गए तो वह सारा पैसा लेकर गायब हो गई. ऑनलाइन मार्केटिंग के जानकार मानते हैं कि सोशल ट्रेड भी ऐसा ही कुछ कर सकती है क्योंकि ग्राहकों से जो पैसा वह ले रही है उसी पैसे को अन्य ग्राहकों में बांट रही है और उसके पास आय का कोई अन्य जरिया ही नहीं है.
कंपनी के दस्तावेज भी इस पर शक करने की कई वजह पैदा करते हैं. सोशल ट्रेड ने अपनी वेबसाइट पर अपनी प्रमाणिकता साबित करने के लिए कंपनी के पैन कार्ड, पंजीकरण प्रमाणपत्र, आईएसओ प्रमाणपत्र और सर्विस टैक्स प्रमाणपत्र की फोटो लगाई हुई हैं. कंपनी लॉ के जानकार बताते हैं कि किसी भी वैध कंपनी को अपनी वेबसाइट पर इन दस्तावेजों को दर्शाने की कोई आवश्यकता नहीं होती. उदाहरण के लिए टाटा मोटर्स की वेबसाइट पर ऐसे कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में सोशल ट्रेड द्वारा इन्हें दर्शाना चोर की दाढ़ी में तिनके जैसा है. साथ ही यदि इन दस्तावेजों पर गौर करें तो इन सभी में कंपनी के अलग-अलग पते दिए गए हैं.
कुल चार दस्तावेज जो कंपनी के पास हैं, उनमें तीन अलग-अलग पते हैं. इससे भी गंभीर बात यह है कि इन दस्तावेजों का सीधे-सीधे ‘सोशल ट्रेड’ से कोई लेना-देना भी नहीं दिखता
कंपनी के पंजीकरण प्रमाणपत्र पर दिल्ली के चांदनी चौक का पता दिया गया है. बिलकुल इसी पते पर कई अन्य कंपनियां भी पंजीकृत हैं. आईएसओ प्रमाणपत्र पर कंपनी का पता गाज़ियाबाद का है और सर्विस टैक्स प्रमाणपत्र के अनुसार यह कंपनी उत्तर प्रदेश के पिलखुवा की है. यानी कुल चार दस्तावेज जो कंपनी के पास हैं, उनमें तीन अलग-अलग पते हैं. इससे भी गंभीर बात यह है कि इन दस्तावेजों का सीधे-सीधे ‘सोशल ट्रेड’ से कोई लेना-देना भी नहीं दिखता. ये सभी दस्तावेज ‘अब्लेज़ इन्फो सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी के हैं. सोशल ट्रेड का दावा है कि वह इसी कंपनी की एक इकाई है लेकिन ‘अब्लेज़ इन्फो सोल्यूशंस...’ की वेबसाइट में कहीं भी ‘सोशल ट्रेड’ का कोई जिक्र ही नहीं है.
ये सारे तथ्य इसी तरफ इशारा करते हैं कि सोशल ट्रेड आम लोगों को मल्टी लेवल मार्केटिंग से रातों-रात लखपति बनाने का सपना दिखाकर उसी तरह फरार होने वाली है जैसे इससे पहले ‘स्पीक एशिया’ या और कई कंपनियां हो चुकी हैं. ऐसी कंपनियां शुरुआत में लोगों को जमकर पैसा बांटती हैं और जब ज्यादा-से-ज्यादा लोग इनसे जुड़कर अपना पैसा इनमें फंसा लेते हैं तो ये रातों-रात गायब हो जाती हैं. सोशल ट्रेड के बारे में इंटरनेट पर जितनी सकारात्मक जानकारियां उपलब्ध हैं लगभग उतनी ही नकारात्मक जानकारियां भी मौजूद हैं. लेकिन फिर भी विवेक जैसे लोगों के उदाहरण, जिन्होंने इस कंपनी से जुड़कर लाखों रूपये कमा लिए हैं, अन्य कई लोगों को इससे जुड़ने का लगातार लालच दे रहे हैं.
सोशल ट्रेड का पक्ष जानने के लिए सत्याग्रह ने कंपनी की वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर कई बार कॉल किया लेकिन किसी ने भी इन कॉल्स का जवाब नहीं दिया.
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