क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति और प्रमुख नेता फिदेल कास्त्रो का निधन हो गया है. वे 90 साल के थे और काफी समय से बीमार थे. शनिवार की सुबह उनके भाई और क्यूबा के वर्तमान राष्ट्रपति राउल कास्त्रो ने सरकारी न्यूज चैनल पर उनके निधन की जानकारी दी. क्यूबा की सरकार ने उनके निधन पर नौ दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है. इस दौरान सभी सरकारी भवनों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे. उनका अंतिम संस्कार चार दिसंबर को किया जाएगा.

क्यूबा में 1959 की क्रांति के बाद फिदेल कास्त्रो ने सत्ता संभाली थी. इससे पहले यहां अमेरिका समर्थित तानाशाह फुल्गेन्सियो बतिस्ता का शासन था. लगभग पांच दशक तक शासन करने के बाद सेहत संबंधी दिक्कतों के चलते 2008 में फिदेल ने अपने भाई राउल कास्त्रो को सत्ता पूरी तरह से सौंप दी थी. इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बना ली थी और खुद को लेखन व वैश्विक नेताओं के साथ कभी-कभार की मुलाकातों तक सीमित कर लिया था.

बीबीसी के मुताबिक इसी साल अप्रैल में फिदेल ने कहा था कि क्यूबा की साम्यवादी विचारधारा आज भी उपयोगी है और क्यूबा के लोग हमेशा विजेता बने रहेंगे. फिदेल के समर्थक मानते हैं कि उनकी बदौलत क्यूबा की सत्ता आम लोगों को हासिल हो पाई जबकि आलोचक उन पर विपक्षियों को दबाने और उनका उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हैं.

फिदेल के शासनकाल को क्यूबा और अमेरिका के तनावपूर्ण रिश्तों के लिए जाना जाता है. खासतौर पर शीत युद्ध के दौरान क्यूबा की रूस के साथ नजदीकी और अपने यहां रूस को परमाणु मिसाइल लगाने की इजाजत देने के बाद दोनों देशों के संबंध काफी बिगड़ गए थे. हालांकि, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने और राजनयिक व आर्थिक संबंध बहाल करने के प्रयास तेज हुए हैं.

दिसंबर 2014 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने क्यूबा के साथ संबंध जोड़ने का ऐलान किया था. इसके बाद मार्च 2016 में ओबामा क्यूबा की यात्रा पर पहुंचे. इस घटना को दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय के तौर पर देखा गया, क्योंकि बीते 88 वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली यात्रा थी. इन सभी कोशिशों को फिदेल का समर्थन हासिल था, लेकिन उन्होंने अमेरिकी राजनेताओं पर अपना संदेह बनाए रखा था. अमेरिका से रिश्ते सुधारने को लेकर उन्होंने कहा था, ‘मैं अमेरिका की नीति पर भरोसा नहीं कर सकता और न ही उनसे बात कर सकता हूं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं टकराव दूर करने के प्रयासों को खारिज करता हूं.’