बीते सोमवार यानी 21 नवम्बर को वर्ल्ड हेलो डे मनाया गया है. हम में से बहुत कम लोगों को ही इसके बारे में पता होगा और शायद यही वजह रही कि भारत में इसकी न के बराबर चर्चा थी. इसे मनाए जाने का उद्देश्य लोगों को बातचीत करने के लिए प्रेरित करना है ताकि वे सीखें कि हर समस्या का हल बातचीत से हो सकता है. और यूं ही की गई बातचीत भी दिल का बोझ हल्का करने का सबसे अच्छा जरिया बन सकती है. यह दिन मनाने की बुनियादी रस्म है कि लोग अपने आसपास कम से कम दस लोगों को 'हेलो' कहें. वर्ल्ड हेलो डे सन 1973 में शुरू हुआ था. यह दिवस अब 180 देशों में मनाया जाता है. हालांकि इसकी लोकप्रियता ऐसी नहीं है कि यह सामान्य ज्ञान का सवाल भी बन सके.

ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी के अनुसार हेलो अपेक्षाकृत नया शब्द है. इसका इस्तेमाल 19वीं सदी के आखिर से किया जा रहा है. हालांकि कुछ स्त्रोत इसकी शुरुआत 1827 से बताते हैं. यह अभिवादन के लिए इस्तेमाल होने वाले अंग्रेजी भाषा के शब्द हलो (hullo) का परिवर्तित रूप है. जहां तक फोन पर हेलो कहने का चलन शुरू करने की बात है तो टेलीफोन के आविष्कारक एलेक्जैंडर ग्राहम बेल ने हेलो के स्थान पर एहॉय (Ahoy) शब्द प्रयोग करने का सुझाव दिया था. एहॉय भी हेलो का समानार्थी शब्द है. यह शब्द हेलो की तुलना में सौ साल पुराना है. यह डच भाषा के शब्द हॉय (hoy) से बना है.

शुरुआत में टेलीफोन पर बातचीत से पहले ‘व्हाट इज वॉन्टेड?’, ‘आर यू देयर?’ और 'आर यू रेडी टू टॉक?’ बोलने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया गया. लेकिन ये किसी भी दौर में चलन में नहीं आ पाए. इसकी सबसे बड़ी वजह शायद यही होगी कि यहां आपको बात की शुरुआत में ही एक के बजाय तीन शब्द बोलने पड़ते थे. हेलो के स्थान पर ‘प्रोंटो’ शब्द का इस्तेमाल भी कुछ वक्त तक किया गया. प्रोंटो एक इटालियन शब्द है. इसका मतलब होता रेडी यानी तैयार. इस शब्द के इस्तेमाल के पीछे तर्क था कि सामने वाला व्यक्ति अगर आपसे बातचीत के लिए तैयार है तो इस शब्द से वह सूचना आपको मिल जाती है.

कुछ किस्से यह भी बताते हैं कि हेलो ग्राहम बेल की गर्लफ्रेंड का नाम था. उन्होंने फ़ोन पर सबसे पहले उसे ही पुकारा था. तब से फ़ोन पर हेलो शब्द चलन में आ गया. हालांकि ये किस्से नकारे जाने के पीछे बड़े ठोस तर्क हैं. दरअसल 1876 में ग्राहम बेल ने फ़ोन के आविष्कार का पेटेंट लिया था और 1877 में उनकी शादी हुई. उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड से ही शादी की थी और उसका नाम था मैबेल, न कि हेलो. टेलीफोन पर तो क्या ग्राहम अपनी पत्नी से आमने-सामने भी बोलकर संवाद नहीं कर पाते थे. दस्तावेज बताते हैं कि मैबेल की सुनने की क्षमता काफी कम थी. यह भी कहा जाता है कि ग्राहम बेल ने पहला फोन अपने सहायक, जो एक दूसरे कमरे में मौजूद था, को किया और उससे कहा था, 'यहां आओ, मैं तुमसे मिलना चाहता हूं.'

हेलो शब्द सबसे पहले लिखित रूप में 1833 में इस्तेमाल किया गया जो 1860 के बाद से चलन में आ गया. फोन पर इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले 1887 में थॉमस अल्वा एडिसन ने किया था और जो अब तक चला आ रहा है. मेनहट्टन की अमेरिकन टेलीग्राफ एंड टेलीफोन कंपनी के दस्तावेजों से पता चलता है कि फोन उठाकर हेलो कहने का सुझाव सबसे पहले एडिसन ने ही दिया था. उनका मानना था कि यह शब्द 10-20 फीट की दूरी से भी सुना जा सकता है. यह भी कहा जाता है कि एडिसन ने गलती से हलो (hullo) शब्द की जगह हेलो (hello) कह दिया और बाद में यही शब्द फोन पर अभिवादन के लिए स्वीकार कर लिया गया.

एडिसन ने यह सुझाव बरबस ही नहीं दे दिया था. इसके लिए उन्होंने फोनोग्राफ के साथ कई प्रयोग किए. एडिसन के सहयोगी रहे फ्रांसिस जेल ने अपने संस्मरणों में लिखा है कि एडिसन अक्सर फोनोग्राफ लेकर कमरे के अलग-अलग कोनों में घूमते रहते थे और हेलो, हलो, हालो जैसे शब्द जोर- जोर से बोलते रहते थे. अपने इन्हीं प्रयोगों के आधार पर उन्होंने हेलो को सबसे सटीक शब्द चुना जिससे फ़ोन पर बातचीत शुरू की जा सकती थी.